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अजा एकादशी 2017: इस व्रत को करने से राजा हरिश्चंद्र को मिला था उनका खोया परिवार, जानिए क्या है शुभ मुहुर्त

अजा एकादशी के दिन ऐसे करें पूजा मिलेगी सभी कष्टों से मुक्ति

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Aja Ekadashi

अजा एकादशी

वाराणसी. भाद्रपद कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को अजा एकादशी कहते हैं। इस दिन व्रती को भगवान विष्णु की पूजा करने से सारे कष्टों से मुक्ति मिलती है। मान्यता है कि राजा हरिश्चंद्र को यह व्रत करने से उनका खोया हुआ परिवार और साम्राज्य वापस मिला था।

कहते हैं जिस कामना से कोई यह व्रत करता है, उसकी वह सभी मनोकामनाएं तत्काल ही पूरी हो जाती हैं। इस व्रत में भगवान विष्णु जी के उपेन्द्र रुप की विधिवत पूजा की जाती है। इस बार अन्नदा एवं अजा एकादशी का व्रत 18 अगस्त को है और इसी दिन वत्स द्वादशी भी है तथा भगवान को प्रिय गाय और बछड़ों का पूजन करना चाहिए तथा उन्हें गुड़ और घास भी खिलानी चाहिए।

कैसे करे पूजन और व्रत-विधि
अजा एकादशी व्रत को जो व्यक्ति इस व्रत को रखना चाहते हैं उन्हें दशमी तिथि को सात्विक भोजन करना चाहिए ताकि व्रत के दौरान मन शुद्ध रहे।


एकादशी के दिन सुबह सूर्योदय के समय स्नान ध्यान करके भगवान विष्णु के सामने घी का दीपक जलाकर, फलों तथा फूलों से भक्तिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। भगवान की पूजा के बाद विष्णु सहस्रनाम या फिर गीता का पाठ करना चाहिए।

व्रती के लिए दिन में निराहार एवं निर्जल रहने का विधान है लेकिन शास्त्र यह भी कहता है कि बीमार और बच्चे फलाहार कर सकते हैं।


इस व्रत में रात्रि जागरण करने का बड़ा महत्व है। सामान्य स्थिति में रात्रि में भगवान की पूजा के बाद जल और फल ग्रहण करना चाहिए।


द्वादशी तिथि के दिन प्रातः ब्राह्मण को भोजन करवाने के बाद स्वयं भोजन करना चाहिए। व्रती को द्वादशी के दिन बैंगन नहीं खाना चाहिए।


अजा एकादशी व्रत कथा
प्राचीनकाल में हरिशचंद्र नामक एक चक्रवर्ती राजा राज्य करता था। उसने किसी कर्म के वशीभूत होकर अपना सारा राज्य व धन त्याग दिया, साथ ही अपनी स्त्री, पुत्र तथा स्वयं को बेच दिया।

वह राजा चांडाल का दास बनकर सत्य को धारण करता हुआ मृतकों का वस्त्र ग्रहण करता रहा। मगर किसी प्रकार से सत्य से विचलित नहीं हुआ। कई बार राजा चिंता के समुद्र में डूबकर अपने मन में विचार करने लगता कि मैं कहाँ जाऊँ, क्या करूँ, जिससे मेरा उद्धार हो।

इस प्रकार राजा को कई वर्ष बीत गए। एक दिन राजा इसी चिंता में बैठा हुआ था कि गौतम ऋषि आ गए। राजा ने उन्हें देखकर प्रणाम किया और अपनी सारी दुःखभरी कहानी कह सुनाई। यह बात सुनकर गौतम ऋषि कहने लगे कि राजन तुम्हारे भाग्य से आज से सात दिन बाद भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अजा नाम की एकादशी आएगी, तुम विधिपूर्वक उसका व्रत करो।