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Akanksha Dubey Suicide : समर सिंह और संजय सिंह पुलिस की गिरफ्त से बाहर, FIR कॉपी आई सामने, जानिए क्या लगे हैं आरोप

Akanksha Dubey Suicide : आकांक्षा दुबे का परिवार लगातार इस प्रकरण में समर सिंह और उनके भाई की भूमिका की बात कर रहा है। साथ ही मां मधु दुबे न्याय की आस में दर-दर भटक रहीं हैं। उन्होंने न्याय न मिलने पर मुख्यमंत्री का दरवाजा खटखटाने की बात कही है। क्योंकि उन्हें यकीन है कि योगी जी उन्हें न्याय जरूर दिलाएंगे।

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Akanksha Dubey Suicide

समर सिंह और संजय सिंह पुलिस की गिरफ्त से बाहर, जानिए क्या है एफआईआर

वाराणसी। भोजपुरी ऐक्ट्रेस आकांक्षा दुबे की मौत को आज 11 दिन हो गए हैं। सारनाथ के होटल सोमेंद्र रेसीडेंसी में उनका शव कमरा नंबर 105 में पंखे के हुक में साड़ी के फंदे से फसा मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी काज ऑफ डेथ हैंगिंग ही है। वहीं इस पूरे प्रकरण की वादिनी के अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने सीबीआई जांच की मांग की है। पुलिस अधिकारी हर बार मुकदमें के अनुसार जांच की बात कह रहे हैं। मुकदमें में नामजद सिंगर समर सिंह और उसका भाई संजय सिंह मुकदमा दर्ज होने के 10 दिन बाद भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। आखिर आकांक्षा की मां ने क्या तहरीर दी थी और किन धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था। इन सब पर से पर्दा उठाती ये खास रिपोर्ट...

27 मार्च को सारनाथ थाने में दर्ज हुई एफआईआर

आकांक्षा दुबे का शव 26 मार्च को मिला था। सारनाथ पुलिस ने फारेंसिक टीम द्वारा सख्सी संकलन के बाद शव को मोर्चरी भेजवा दिया था और परिजनों को सूचना दी थी। इसपर 27 मार्च को वाराणसी पहुंची मां माधु चौबे ने पुलिस से न्याय की गुहार लगाई और भोजपुरी सिंगर समर सिंह और उसके भाई संजय सिंह पर प्रताड़ना और मानसिक दबाव देने का आरोप लगाते हुए तहरीर दी।

क्या लिखा है मधु चौबे की तहरीर में

पुलिस की एफआईआर में मधु चौबे की तहरीर के अनुसार लिखा गया है कि प्रार्थिनी मधु दुबे पत्नी छोटेलाल, निवासी ग्राम बरदहां, थाना चौरी जनपद भदोहीं की मूल निवासी हैं। मेरी लड़की आकांक्षा दुबे जो कि भोजपुरी ऐक्ट्रेस है वह शूटिंग करने काशी आयी थी और होटल सोमेंद्र के कमरा नंबर 105 में रुकी थी। मेरी लड़की को पिछले तीन साल से समर सिंह और उसका भाई संजय सिंह टॉर्चर कर रहे थे। इन्ही लोगों की प्रताड़ना से तंग आकर मेरी बेटी ने जान गंवा दी। इसपर मैं आज यह तहरीर दे रही हूं।

पुलिस ने दर्ज की एफआईआर

इस तहरीर की नकल पर वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट के थाने पर सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। एडिशनल पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने बताया कि आईपीसी की धारा 306 में अभियोग पंजीकृत कर लिया गया है। जांच के बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। वहीं जब उनसे पूछा गया कि हत्या की बात सामने आ रही है तो उन्होंने कहा कि विवेचना और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके अनुसार धाराएं बढ़ाई जाएंगी।

धारा 306 में कितनी सजा का है प्रावधान

आईपीसी की धारा 306 में कितनी सजा का प्रावधान है। इस सम्बन्ध में patrika.com ने वाराणसी सेन्ट्रल बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ क्रिमिनल एडवोकेट विवेक शंकर तिवारी से बात की। उन्होंने कहा कि आईपीसी की धारा 306 यानी कोई व्यक्ति आत्महत्या करता है और जो भी व्यक्ति इस आत्महत्या का दुष्प्रेरण करता है। उसके ऊपर लगाई जाती है। इस धारा में 10 साल की सजा प्रावधान है। उन्होंने बताया कि 1 साल से 10 साल की सजा होती है, पर कोई भी कोर्ट 7 साल से कम की सजा नहीं सुनाती।