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akhilesh yadav and Narendra Modi
वाराणसी. आगामी लोकसभा चुनाव 2019 के पहले यूपी में सियासत चरम पर है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों एक दूसरे को पटखनी देने के लिये हर दांव चलने की तैयारी में है। सरकार और प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री विकास और तोहफों के सहारे एक बार फिर से सत्ता पाने की फिराक में हैं तो विपक्ष उनकी पोल खोलने में जुटा हुआ है। इन सबके अलावा चूंकि अब राजनीति में धर्म का तड़का लग चुका है ऐसे में सत्ता पक्ष के साथ ही अब विपक्ष ने भी धर्म का सहारा ले लिया है। राहुल गांधी मंदिरो के चक्कर लगा रहे हैं तो अखिलेश यादव को भी इसी राह पर चल पड़े हैं। अखिलेश तो अब उस पूजा में बैठने जा रहे हैं जिसमें बैठने के बाद उन्होंने 2012 में मुख्यमंत्री की कुर्सी पायी थी, पर मुख्यमंत्री बनने के बाद फिर उस तरफ रुख नहीं किया। अब गलती को ठीक करते हुए अखिलेश ने यह कदम उठाया है।
बात तब कि है जब मुलायम सिंह यादव तीन साल के लिये मुख्यमंत्री बने। उस समय अखिलेश यादव भी समाजवादी पार्टी से सांसद बन चुके थे। जब पिता मुलायम की 2007 में सत्ता चली गयी तो फिर सपा एक्टिव हुई। बनारस में होने वाली मशहूर गोवर्धन पूजा में जहां पहले मुलायम सिंह कई बार आ चुके थे वहीं पित की कुर्सी जाने के बाद अखिलेश यादव ने बनारस का रुख किया और 10 नवंबर 2007 को बनारस के खिड़किया घाट पर होने वाली भव्य गोवर्धन पूजा में शामिल हुए। यहीं से समाजवादी पार्टी ने सूबे में अपने परंपरागत वोटों को गोलबंद करना शुरू किया और सूबे में सत्ता के खिलाफ अभियान छेड़ दिया। इसका नतीजा रहा कि 2012 में समाजवादी पार्टी की लहर चली और अखिलेश यादव की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनी। अब जबकि एक बार फिर अखिलेश यादव सत्ता से बाहर हैं तो उन्हें यह टोटका समझ में आया है और वह 11 नवंबर गुरुवार को बनारस की मशहूर गोवर्धन पूजा में शामिल होने जा रहे हैं।
गोवर्धन पूजा से यादवों को करेंगे गोलबंद
सत्ता से विपक्ष में पहुंच चुके अखिलेश यादव को 2017 के चुनाव में झटका तब लगा जब उनके हाथ से सत्ता चली गयी। इसके बाद परंपरागत वोटों के खिसकने का डर भी सताने लगा। समय रहते उन्होंने इसे भांप लिया और इसको बचाए रखने की कवायद शुरू कर दी है। गोवर्धन पूजा यादवों की सबसे बड़ी पूजा होती है। इसमें आस-पड़ोस के जिलों से भी हजारो की तादाद में यादव समाज के लोग जुटते हैं। 2019 के चुनाव के पहले यह अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के लिये यादवों को गोलबंद करने के लिये मुफीद साबित हो सकता है। यही सोचकर इस बार अखिलेश यादव पूजा में आ रहे हैं। इस मौके को भुनाने के लिये पूरे शहर को सपा और अखिलेश के बैनर पोस्टर व होर्डिंग्स से पाट दिया गया है।
मुलायम सरकार गिरने के बाद आए थे अखिलेश, फिर बने मुख्यमंत्री
अखिलेश यादव का बनारस की गोवर्धन पूजा में यह दूसरी बार आगमन है। पहली बार अखिलेश यादव पिता के सत्ता से चले जाने के बाद 2007 में आए थे। इसके बाद 2012 में वह मुख्यमंत्री बने। पर इसके बाद पूरे पांच साल मुख्यमंत्री रहते उन्होंने इसका रुख नहीं किया। शायद इसी टोटके को समझकर शिवपाल यादव भी पहली बार 2016 में इसमें शामिल हुए। अब अखिलेश यादव एक बार फिर गोवर्धन पूजा में इस उम्मीद के साथ शामिल होंगे कि यहां से मिला आशीर्वाद उन्हें कुर्सी तक पहुंचा दे।
भव्य होती है बनारस की गोवर्धन पूजा
गोवर्धन पूजा को यादव समाज की सबसे बड़ी पूजा कहा जाता है। इस पूजा में पड़ोसी जिलों से भी लोग आते हैं। दिवाली के ठीक दूसरे दिन होने वाली इस पूजा की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि करीब 10 किलोमीटर की इस यात्रा में जबरदस्त भीड़ उमड़ती है। इसमें ज्यादातर यादव समाज के लोग होते हैं। शहर के चेतगंज स्थित हथुआ मार्केट से यादव बंधु एक विशाल और भव्य शोभा यात्रा निकालते हैं। इसमें धोती-कुर्ता पहने यादव बंधु हाथों में परंपरागत युद्ध कौशल का प्रदर्शन करने के लिये पटा बनेठी लिये होते हैं और रास्ते भर पटा-बनेठी की कला का प्रदर्शन करते चलते हैं। इतना ही नहीं इस शोभा यात्रा में वृंदावन और मथुरा से भी कलाकार आते हैं।
Published on:
08 Nov 2018 12:12 pm
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