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अक्षय तृतीय पर काशी में भगवान सूर्य को दिया अर्ध्य, मां गंगा का किया दुग्धाभिषेक

अक्षय तृतीय पर काशी में सुबह से ही पूजन-अर्चन का सिलसिला जारी है। सुबह आस्थावानों गंगा स्नान कर दान-पुण्य तो किया ही साथ ही मां गंगे का जलाभिषेक भी किया। इसके अलावा भगवान भास्कर को अर्ध्यदान भी किया गया। इस मौके पर परशुराम जयंती के उपलक्ष्य में शोभा आरती भी निकाली गई।

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अक्षय तृतीया पर मां गंगा को अर्घ्यदान

अक्षय तृतीया पर मां गंगा को अर्घ्यदान

वाराणसी. अक्षय तृतीया पर धर्म नगरी काशी में सुबह से ही पूजन-अर्चन, गंगा स्नान का जो सिलसिला आरंभ हुआ वो दोपहर बाद तक जारी रहा। इस मौके पर आस्थावानों ने सुबह गंगा स्नान के बाद जहां भगवान भास्कर को अर्घ्य दान किया तो मां गंगा का दुग्धाभिषेक किया। फिर श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंच कर बाबा का जलाभिषेक किया। शहर से लेकर देहात तक मंदिरों में पूजन-अर्चन का सिलसिला अनवरत जारी है। इस बीच अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद की ओर से शोभायात्रा भी निकाली गई।

मां गंगा की निर्मलता का लिया संकल्प

अक्षय तृतीया के पावन पर्व के मौके पर नमामि गंगे काशी क्षेत्र की टीम ने दशाश्वमेध घाट पर गंगा निर्मलीकरण के अक्षय संकल्प के साथ मां गंगा का दुग्धाभिषेक किया। साथ ही पर्यावरण संरक्षण की कामना से भगवान भास्कर को अर्घ्यदान किया तदुपरांत सूर्य और मां गंगा की आरती उतारी। इस अवसर पर मां गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए संकल्प भी लिया। ये संकल्प संयोजक राजेश शुक्ला ने दिलायी।

बाबा विश्वनाथ को अर्पित की गई जलधरी

इस पुण्य दिवस को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर सहित अन्य शिवालयों में बाबा को गर्मी के ताप से बचाने के लिए जलधरी भी अर्पित की गई। साथ ही लगाए गए खस के पर्दे। अब शिवलिंग के ऊपर लगी जलधरी से दिन-रात अनवरत गंगा जल की फुहारें पड़ती रहेंगी ताकि भोलेनाथ को गर्मी न सताए।

भगवान विष्णु को लगा चंदन का लेप
काशी भले ही शिव की नगरी है पर यहां भगवान विष्णु भी समान रूप से पूजित हैं। ऐेसे में जब आज के दिन शिवालयों में शिवलिंग के ऊपर जलधरी लगाई गई तो भगवान विष्णु को चंदन का लेप लगाया गया। यह क्रम 21 दिन तक जारी रहेगा।

महाराज युधिष्ठि को इसी दिन प्राप्त हुआ था अक्षय पात्र

बता दें कि वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का सनातन हिंदू धर्म में खास महत्व है। इसी दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। मान्यता है कि इसी दिन मां गंगा का अवतरण दिवस भी मनाया जाता है। यही वो दिन है जब महाराजा युधिष्ठिर को अक्षय पात्र की प्राप्ति हुई थी। लिहाजा ने आस्थावानों ने मां गंगा की आरधना की। अर्घ्यदान और दीप दान कर अक्षय पुण्य लाभ प्राप्ति की कामना की।