ज्ञानवापी मस्जिद की सुनवाई पर लगी रोक, नहीं होगा एएसआई सर्वेक्षण

ASI Survey of Gyanwapi Maszid Stopped by Allahabad Highcourt Decision- काशी विश्वेश्वर नाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Mandir) और ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanwapi Maszid) की जमीन को लेकर चल रहे विवाद के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad Highcourt) ने बड़ा निर्णय लिया है। कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को ज्ञानवापी के सर्वेक्षण पर रोक लगाने का आदेश दिया है।

By: Karishma Lalwani

Updated: 10 Sep 2021, 09:37 AM IST

वाराणसी. ASI Survey of Gyanwapi Maszid Stopped by Allahabad Highcourt Decision. काशी विश्वेश्वर नाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Mandir) और ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanwapi Maszid) की जमीन को लेकर चल रहे विवाद के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad Highcourt) ने बड़ा निर्णय लिया है। कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को ज्ञानवापी के सर्वेक्षण पर रोक लगाने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड व अंजुमन इंतजामिया मस्जिद वाराणसी की तरफ से दाखिल याचिकाओं पर दिया गया है। 1992 से जिला अदालत में विचाराधीन मंदिर मस्जिद विवाद की सुनवाई प्रक्रिया पर कोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा है कि दीवानी मुकदमे की पोषणीयता को लेकर सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की याचिका पर हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित कर रखा है, इसकी जानकारी अधीनस्थ अदालत को है तो न्यायिक अनुशासन का पालन करते हुए मंदिरों का सर्वे कराने की अर्जी नहीं तय करनी चाहिए। कोर्ट ने याचिका पर भारत सरकार व अन्य विपक्षियों से तीन हफ्ते में जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई आठ अक्टूबर को होगी।

विवादित स्थल पर मस्जिद नहीं

गौरतलब है कि 15 अक्टूबर, 1991 को स्वयंभू विश्वेश्वर नाथ मंदिर की तरफ से वाराणसी के सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के समक्ष मुकदमा दाखिल किया था। इसमें प्लाट संख्या 9130 मौजा शहर खास के दो हिस्सों का हवाला दिया गया है। इसी के साथ पुराने ज्ञानवापी मंदिर, तहखाना, चार मंडप, ज्ञान कूप, मूर्तियां व पेड़ पर हिंदुओं के आधिपत्य एवं उत्तरी गेट पर नौबतखाना व मस्जिद के दावे पर सवाल उठाए गए हैं। यह भी दावा किया गया है कि इस्लामिक कानून के अनुसार विवादित स्थल पर मस्जिद नहीं हो सकती। सतयुग से आज तक स्वयंभू ज्योतिलिंग हटाया नहीं जा सकता। वर्ष 1947 की स्थिति में परिवर्तन नहीं किया जाएगा। इस बारे में सिविल जज ने मुकदमा खारिज कर दिया। इसके खिलाफ पुनरीक्षण अर्जी मंजूर कर ली गई। इसी मुकदमे की सुनवाई कोर्ट में चल रही है।दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया है।

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Karishma Lalwani
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