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Patrika Exclusive- अटल बिहारी वाजयेपी और काशी,  ”काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूं….”
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Patrika Exclusive- अटल बिहारी वाजयेपी और काशी, ”काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूं….”

काशी, काशी विश्वनाथ, मां गंगा और मलाई बहुत पसंद थी अटल जी को। काशी के कलाकारों से था बेहतरीन संबंध
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वाराणसी

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Ajay Chaturvedi

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Updated: 16 Aug 2018, 5:51 PM IST

डॉ अजय कृष्ण चतुर्वेदी

वाराणसी. महाकाल की नगरी काशी, मोक्ष की नगरी काशी और काशी से अत्यंत लगाव रखने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, जिन्होंने महाकाल, बाबा विश्वनाथ को स्मरण कर ही वह कविता लिखी, ”काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूं…।” वाजपेयी जी की यह कविता काफी लोकप्रिय हुई पर उसके पीछे का रहस्य कम ही लोग जानते हैं। वह जब यह कविता लिखते हैं तो महाकाल का ही जिक्र करते है। काल माने महाकाल और उनके मस्तक को पढ़ना और लिखने का दुस्साहस और किसी ने नहीं बल्कि अटल जी ने ही किया। अटल जी जिन्हें काशी बहुत रास आती थी। जीव के आरंभिक जीवन में उन्होंने इसी काशी से पत्रकारिता शुरू की। यहीं वह संपादक रहे। यह वाकया 1957-58 का है। काशी और काशी के कण-कण से उनका वास्ता रहा। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, मां गंगा का तट, तुलसीघाट, काशी की विश्व प्रसिद्ध मिठाई और खास तौर पर भोले बाबा का प्रसाद और उसके बाद मलाई खाना वह कभी नहीं भूले।

दालमंडी में था दफ्तर वहीं से शुरू की पत्रकारिता
बात 1957-58 की है, बनारस के दालंमंडी में था राष्ट्रीय जनसंघ और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का दफ्तर। यहीं से निकलती थी जनसंघ की पत्रिका, ‘राष्ट्र धर्म’ इस पत्रिका का संपादन स्वयं अटल बिहार वाजपेयी किया करते रहे। इस पत्रिका के संचालन और उसके प्रचार प्रसार के सिलसिले में वह डेढ़ साल तक बनारस में रहे। जनसंघ के जनक रहे पंडित दीन दयाल उपाध्याय जब भी बनारस आते थे तो उनकी आगवानी अटल जी ही किया करते थे। अटल जी और पंडित दीन दयाल उपाध्याय के बीच काफी घनिष्टता रही। पुराने लोग बताते हैं कि जब दीन दलायल जी का निधन हुआ था तो उनके शव को लेने के लिए भी वाजपेयी जी ही पहुंचे थे सबसे पहले मुगलसराय।

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से ‘हिंदू’ शब्द हटाने को हुए आंदोलन में हुए शरीक
लाल बहादुर शास्त्री के प्रधानमंत्री रहते 1965 में तत्कालीन शिक्षा मंत्री एमएसी छागड़ा ने संसद में एक विधेयक पेश किया। इसके तहत उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के नाम से हिंदू शब्द हटाने का प्रस्ताव रखा। उनका तर्क था कि इससे सांप्रदायिकता की बू आती है। उस वक्त जब बनारस से शुरू आंदोलन जब पूर्वांचल से होते पूरे देश में फैला तो उसकी अगुवाई भी अटल जी ने की। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी से ताल्लुख रखने वाले बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो कौशल किशोर मिश्र ने पत्रिका से खास बातचीत में यह जानकारी दी। बताया कि तब बीएचयू छात्रसंघ के अध्यक्ष हुआ करते थे राम बचन पांडेय। बतौर छात्रसंघ अध्यक्ष रामबचन पांडेय ने आंदोलन शुरू किया। उस आंदोलन में तब तीन संस्थाओं ने संभालना जिसमें राम राज्य परिषद, विद्यार्थी परिषद और राष्ट्रीय जनसंघ। आंदोलन के दौरान पंडित दीन दयाल उपाध्याय बनारस आए। बेनिया बाग के मैदान में सभा हुई। उस सभा को पंडित दीनदयाल जी के अलावा अटल बिहारी वाजपेयी, हरिश्चंद्र श्रीवास्तव ने संबोधित किया। बनारस में अटल जी का वह पहला सार्वजनिक संबोधन था।

गो हत्या आंदोलन
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल में 1968 में देश भर में शुरू हुआ गो हत्या बंद करो आंदोलन। इस आंदोलन के तहत दिल्ली में साधु-संतों पर गोलियां चली थीं। तब बनारस के लोगों में भी जबरदस्त गुस्सा था। राम राज्य परिषद और जनसंघ ने इसका नेतृत्व किया। यूं कहें कि दोनों एक हो गए थे गो रक्षा मुद्दे पर तो गलत न होगा। तब करपात्री जी तक की गिरफ्तारी हुई वह भी अकेले नहीं, स्वामी जी के साथ अटल जी भी गिरफ्तार हुए।

तब जेपी की सभा में नहीं हुए शरीक
प्रो मिश्र बताते हैं कि आपात काल से पहले जब जयप्रकाश नारायण ने देश व्यापी आंदोलन छेड़ रखा था। वाकया 1974 का है जय प्रकाश जी बनारस आए थे, लंका पर विशाल सभा हुई। इधर लंका पर सभा चल रही थी और अटल जी वाराणसी के सर्किट हाउस में रुके थे। जनसंघ जेपी के आंदोलन में शरीक हो चुकी थी। लेकिन अटल जी उस सभा में नहीं आए। उस सभा के स्थानीय आयोजकों में शामिल मोहन प्रकाश आदि ने अटल जी को सर्किट हाउस से लाने का प्रयास भी किया लेकिन वह नहीं आए। बाद में जेपी ने जब बिहार में आंदोलन को तेज किया तो वह उनके साथ मंच साझा करने लगे।

बनारस के इन लोगों से थे वाजपेयी जी के अनन्य संबंध
अटल जी विलक्षण प्रतिभा के धनी थे उनका हर वर्ग के साथ निकट का संबंध रहा। कवि हृदय अटल बिहारी वाजपेयी शास्त्रीय संगीत के प्रेमी भी थे। प्रो कौशल किशोर मिश्र बताते हैं कि अटल जी स्वामी करपात्री जी के शिष्यों में एक रहे तो जनसंघ के जनक मंडल में एक रहे हरिश्चंद्र श्रीवास्तव ‘हरीश जी’ उनके निकटस्थ लोगों में रहे। इनके अलावा मशहूर पखावज वादक पंडित अमर नाथ मिश्र, तबला वादक किशन महाराज, गंगा आंदोलन के जनक प्रो वीरभद्र मिश्र, पद्मविभूषण पट्टाभि रमण शास्त्री, प्रो विद्या निवास मिश्र, प्रो कृष्ण नाथ शर्मा, नजीर बनारसी भी अटल जी के हृदय के नजदीक थे।


नगर निगम के तिलक प्रेक्षागृह में काशी के कलाकारों का किया था सम्मान
बात है 1996 की, तब बनारस की मेयर हुआ करती थीं सरोज सिंह और उनके पति ओम प्रकाश सिंह प्रदेश के सिंचाई मंत्री थे। प्रदेश में कल्याण सिंह के नेतृत्व वाली सरकार थी। तब अटल जी बनारस आए थे। यहीं नगर निगम के तिलक प्रेक्षागृह (जिसे वर्तमान सरकार ने नेस्त नाबूत करा दिया है।) में काशी के कलाकारों का सम्मान किया था। उसमें शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खां, तबला वादक किशन महाराज, ज्योति भट्टाचार्य, सितारा देवी, गिरिजा देवी, महामहोपाध्याय मुसलगांवकर को सम्मानित किया गया था। उसी वक्त अटल जी ने कहा था कि उस्ताद बिस्मिल्लाह खां और पंडित किशन महाराज को भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा। उसके बाद ही जब बीजेपी गठबंधन की सरकार आई तो बिस्मिल्लाह खां को भारत रत्न से नवाजा गया। अटल जी के नेतृत्व वाली सरकार में ही जहां बिस्मिल्लाह खान को भारत रत्न मिला तो, किशन महाराज को पद्मविभूषण से नवाजा गया। अटल जी ने उसी वक्त प्रो विद्या निवास मिश्र को राज्यसभा का सदस्य बनाया। वह तो प्रो वीरभद्र मिश्र को भी राज्यसभा में ले जाना चाहते थे मगर वह राजी नहीं हुए। साफ कह दिया कि उन्हें राजनीति में नहीं जाना।

छात्र राजनीति से था लगाव, छात्र संघ को देते थे महत्व
अटल बिहारी वाजपेयी ने छात्र राजनीति को हमेशा तवज्जो दी। छात्रसंघ को वह राजनीति की पाठशाला मानते थे। यही वजह थी कि 1996 में जब बीएचयू छात्र संघ के अध्यक्ष व महामंत्री पद पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का कब्जा हुआ तो वह छात्र संघ का उद्घाटन करने बीएचयू पहुंचे। तब छात्र संघ के अध्यक्ष थे राठौर। बीएचयू छात्रसंघ के पूर्व उपाध्यक्ष अनिल मिश्र उर्फ ‘झुन्ना गुरू’ को अटल जी बेहद मानते रहे।

मां गंगा की स्वच्छता को मिले थे प्रो वीरभद्र मिश्र
प्रो मिश्र बताते हैं कि अटल जी और प्रो वीरभद्र मिश्र का ऐसा नजदीकी संबंध था कि गंगा स्वच्छता के मुद्दे पर वार्ता के लिए बनारस आए तो सीधे तुलसीघाट पहुंचे। वहीं महंत आवास से सटे भवन में करीब चार घंटे तक रुके रहे। विस्तार से बातचीत हुई। इससे पहले प्रो मिश्र प्रधानमंत्री आवास पहुंच कर भी संकट मोचन फाउंडेशन के तहत तैयार गंगा स्वच्छता प्रोजेक्ट पर अटल जी से वार्ता कर चुके थे। प्रोजेक्ट रिपोर्ट सौंप चुके थे। इस मुद्दे पर जब उत्तर प्रदेश के नगर विकास मंत्री लालजी टंडन से प्रो मिश्र की तकरार हुई तो अटल जी ही थे जिन्होंने हस्तक्षेप किया।