शास्त्रों के अनुसार महादेव के बालरूप के रुप में बाबा बटुक भैरव कमच्छा स्थित मंदिर में विराजमान है। प्रतिवर्ष यहां पर वार्षिक श्रृंगार का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है जो इतना भव्य होता है कि काशी के लोग इस दिन का इंतजार करते हैं। सुबह पांच बजे बाबा बटुक भैरव को पंचामृत स्नान कराया गया। इसके बाद नवीन वस्त्र धारण करा कर मंगला आरती की गयी। इस अवसर पर प्रसिद्ध शहनाई वादक जामिन खां एवं उनक साथियों ने गंगा द्वारे बधईयां बाजे आदि भक्ति गीत की धुन प्रस्तुत करके भक्तों का मन मोह लिया। इसके बाद बाबा का मयूरासन पर विराजमान हुए और भक्तों के दर्शन के लिए मंदिर का कपाट खोल दिया गया। मंदिर को कामिनी, अशोक, बेला, गेंदे की पत्तियों व गुलाब के फूल से भव्य रूप से सजाया गया था। मंदिर के बाहर भी अनोखे ढंग से सजावट की गयी थी। भक्तों को वैष्णो देवी की गुफा का एहसास कराने के लिए मंदिर के बाहर ही गुफा रूपी द्वार बनाया गया था। जबकि मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर भगवान बुद्ध की प्रतिमा लगायी गयी थी, जिनका अलौकिक दर्शन पाकर भक्त निहाल हो गये। एक तरफ नामी कलाकार अपने भजनों ने बाबा को नमन कर रहे थे तो दूसरी तरफ धीखी धूम में लाइन लगा कर मंदिर पहुंच रहे भक्त अपने बाबा का दर्शन पाकर धन्य हो रहे थे। सुबह से दर्शन का क्रम जो शुरू हुआ था वह देर रात तक जारी रहा।