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 मयूरासन पर विराजमन हुए बाबा बटुक भैरव, भक्तों ने किया फूल और भक्ति गीतों से नमन

कमच्छा स्थित बाबा बटुक भैरव मंदिर में रविवार को बाबा का भव्य श्रृंगार किया गया। हरियाली व जल विहार श्रृंगार में मयूरासन पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दिया।

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Devesh Singh

Aug 28, 2016

Baba Batuk Bhairav

Baba Batuk Bhairav


वाराणसी. कमच्छा स्थित बाबा बटुक भैरव मंदिर में रविवार को बाबा का भव्य श्रृंगार किया गया। हरियाली व जल विहार श्रृंगार में मयूरासन पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दिया। बाबा की एक झलक पाने के लिए सुबह से ही लम्बी लाइन लगी रही। फूलों से महक रहे बाबा धाम परिसर में कलाकारों ने सुबह से ही जो भक्ति गीतों की माला पिरोने का क्रम शुरू किया था वह देर रात तक जारी रहा।
शास्त्रों के अनुसार महादेव के बालरूप के रुप में बाबा बटुक भैरव कमच्छा स्थित मंदिर में विराजमान है। प्रतिवर्ष यहां पर वार्षिक श्रृंगार का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है जो इतना भव्य होता है कि काशी के लोग इस दिन का इंतजार करते हैं। सुबह पांच बजे बाबा बटुक भैरव को पंचामृत स्नान कराया गया। इसके बाद नवीन वस्त्र धारण करा कर मंगला आरती की गयी। इस अवसर पर प्रसिद्ध शहनाई वादक जामिन खां एवं उनक साथियों ने गंगा द्वारे बधईयां बाजे आदि भक्ति गीत की धुन प्रस्तुत करके भक्तों का मन मोह लिया। इसके बाद बाबा का मयूरासन पर विराजमान हुए और भक्तों के दर्शन के लिए मंदिर का कपाट खोल दिया गया। मंदिर को कामिनी, अशोक, बेला, गेंदे की पत्तियों व गुलाब के फूल से भव्य रूप से सजाया गया था। मंदिर के बाहर भी अनोखे ढंग से सजावट की गयी थी। भक्तों को वैष्णो देवी की गुफा का एहसास कराने के लिए मंदिर के बाहर ही गुफा रूपी द्वार बनाया गया था। जबकि मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर भगवान बुद्ध की प्रतिमा लगायी गयी थी, जिनका अलौकिक दर्शन पाकर भक्त निहाल हो गये। एक तरफ नामी कलाकार अपने भजनों ने बाबा को नमन कर रहे थे तो दूसरी तरफ धीखी धूम में लाइन लगा कर मंदिर पहुंच रहे भक्त अपने बाबा का दर्शन पाकर धन्य हो रहे थे। सुबह से दर्शन का क्रम जो शुरू हुआ था वह देर रात तक जारी रहा।


बाबा बटुक भैरव की हुई महाआरती
महंत राकेश पुरी ने रात 9 बजे बाबा की महाआरती की। 1008 बत्ती वाले दीपदान व सवा किलो कपूर से बाबा की महाआरती हुई हैं। महाआरती के दौरान 51 भक्त लगातार डमरू बजा रहे थे। इसके बाद फिर से भजन संध्या का आयोजन किया गया। हरियाली व जलविहार श्रृंगार में भास्कर पुरी, अनिल कुमार जैन, आलोक जैन, गितिका, सुशांत श्रीवास्तव आदि लोगों का विशेष योगदान रहा है।

एक पल ऐसा लगा कि पहुंच गये मानसरोवर
भक्तों को एक पल लगा कि वह कैलाश मानसरोवर पहुंच गये हैं। गुफा के अंदर से भक्तों को होकर मंदिर तक जाना पड़ रहा था यहां का वातावरण, पक्षी, साफ आदि लोगों को मानसरोवर यात्रा का अहसास करा रहे थे।