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बाहुबलियों का चुनाव जीतना नहीं होगा आसान, पहली बार बतानी होगी यह सच्चाई

चुनाव अधिसूचना जारी होने के बाद प्रत्याशी बनने के जुगाड़ में है बाहुबली नेता, जानिए क्या है कहानी

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Bahubali Leader

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वाराणसी. चुनाव अधिसूचना जारी होते ही लोकसभा चुनाव २०१९ का बिगुल बज गया है। सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति को अंतिम रुप देने में जुट गये हैं। बाहुबली प्रत्याशी भी चुनावी मैदान में ताल ठोकने को बेकरार है और विभिन्न दलों से टिकट पाने के लिए सेटिंग शुरू कर दी है। इस चुनाव में बाहुबलियों की राह आसान नहीं होगी। कोर्ट के निर्देशानुसार आपराधिक प्रवृत्ति के उम्मीदवारों को जनता को अपने आपराधिक इतिहास की जानकारी खुद देनी होगी।



पूर्वांचल की राजनीति में बाहुबलियों का अपना वर्चस्व होता है। मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद, धनजंय सिंह, बृजेश सिंह, राजा भैया आदि ऐसे नेता है जिन्हें बाहुबली कहा जाता है और उनके उपर आपराधिक मुकदमे भी दर्ज हैं। इन नेताओं का अपना जनाधान है लेकिन बहुत से ऐसे आपराधिक प्रवृत्ति के नेता भी हैं जो इस चुनाव में ताल ठोकने को तैयार है। हाईकोर्ट के नये निर्देश ने आपराधिक प्रवृत्तियों के नेताओं की राह कठिन कर दी गयी है। उच्चतम न्यायालय ने फार्म 26 में बदलाव किया है जिसमे आपराधिक छवि वाले प्रत्याशियों को अपने अपराध का ब्यौरा बड़े और स्पष्ट अक्षरों से चुनाव आयोग को देना होगा।

मीडिया में छपवाना पड़ेगा अपराधिक इतिहास की जानकारी
नये नियमों के अनुसार नामांकन वापसी के अंतिम तिथि से लेकर मतदान की तिथ्थ से दो दिन पूर्व तक कम से कम तीन बार प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में आपराधिक इतिहास की जानकारी छपवानी व देनी होगी। ऐसे प्रत्याशियों को अपने आपराधिक इतिहास की जानकारी संबंधित पार्टी की वेबसाइट पर भी जारी करनी होगी। समाचार पत्रों में आपराधिक इतिहास की जानकारी छपवान के बाद इसकी एक प्रति जिलाधिकारी को भी देनी होगी। इससे साफ हो गया है कि अब वोटरों को पता चल जायेगा कि किसी नेता पर कितना मुकदमा दर्ज है और किसी पार्टी ने सबसे अधिक आपराधिक प्रवृत्ति के नेताओं को प्रत्याशी बनाया है।

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