
बनारस संवासिनी गृह में डीएम सुरेंद्र
वाराणसी. देवरिया में निजी बालिका गृह से 18 लड़कियों के गायब होने की घटना ने 18 साल पहले के बनारस संवासिनी कांड की याद ताजा कर दी है। तब बनारस में महीनों तक चला था यह प्रकरण। खुद संवासिनी गृह की लड़कियों ने लगाए थे जिला प्रोबेशन अधिकारी और संवासिनी गृह अधीक्षिका पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। प्रकरण की शुरूआती जांच सीओ कैंट जीके गोस्वामी ने किया था बाद में महानगर कांग्रेस की मांग पर सीबीआई जांच भी हुई थी। अब देवरिया प्रकरण के बाद शहर में फिर से 18 साल पहले का संवासिनी कांड याद हो गया है। बता दें कि उस वक्त भी प्रदेश में बीजेपी की ही सरकार थी और अब भी बीजेपी सरकार है। ऐसे में देवरिया कांड के बाद पूरे प्रदेश में संवासिनी गृहों पर छापेमारी शुरू हो गई है। बनारस के डीएम सुरेंद्र सिंह भी पहुंचे थे संवासिनी गृह। उन्होंने संवासिनी गृह की सुरक्षा बढ़ाने की हिदायत दी। साथ ही वहां रहने वाली हर लड़की को हर तरह की सुविधा मुहैया कराने का निर्देश देने के साथ ही लड़कियों को भी भरोसा दिलाया कि उन्हें किसी तरह की दिक्कत नहीं आएगी।
बनारस में 2000 में उठा था संवासिनी कांड
बनारस में 2000-01 में हुआ था संवासिनी कांड। तब संवासिनी गृह की लड़कियों ने तत्कालीन प्रोबेशन अधिकारी और संवासिनी गृह की अधीक्षिका पर लड़कियों की सप्लाई तक का आरोप लगाया था। तब कैंट थाने में मुकदमा दर्ज हुआ और तत्कालीन सीओ कैंट जीके गोस्वामी ने जांच शुरू की तो कई गंभीर तथ्य सामने आए। यहां तक कि तत्कालीन डीआईजी भी लपेटे में आ रहे थे। इस प्रकरण में यूपी सरकार के एक संगठन के चेयरमैन विपुल पाठक, कांग्रेस नेता आनंद मिश्र, व्यवसायी शाहिद परवेज की गिरफ्तारी हुई। तब सूबे में बीजेपी की सरकार थी और एक वरिष्ठ मंत्री के बेटे का भी नाम संवासिनी कांड से जुड़ा था, लेकिन सत्ता पक्ष के दबाव में उसे दबा दिया गया। वह युवा नेता आज भी राजनीति में सक्रिय हैं और भाजपा से जनप्रतिनिधि भी हैं। इस मामले ने तूल पकड़ा तीन जून 2000 को जब शहर युवक कांग्रेस अध्यक्ष अनिल श्रीवास्तव अन्नू ने मामले को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया। फिर जिला युवक कांग्रेस अध्यक्ष डॉ दयाशंकर मिश्र दयालू, व जिला व महानगर कांग्रेस ने भी आदोलन को आगे बढ़ाया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सलमान खुर्शीद भी आए। लेकिन अन्नू की सीबीआई जांच की मांग स्वीकार की गई। उस प्रकरण में गंगा किनारे कई नरकंकाल भी पाए गए थे जिसके बारे में बताया गया था कि वे संवासिनी गृह की लड़कियों के थे। अन्नू ने पत्रिका को बताया कि उस प्रकरण में कई आईएएस व आईपीएस के नाम भी सामने आए थे। तत्कालीन डीआईजी तो व्यवसायी शाहिद परवेज की गिरफ्तारी के बाद सारनाथ थाने धमक गए थे। हालांकि इस आंदोलन को कांग्रेस ने पूरे दमखम से चलाया। यह दीगर है कि आरंभिक चरण में कांग्रेस सीबीसीआईडी जांच की मांग कर रही थी जबकि शहर युवक कांग्रेस अध्यक्ष अन्नू सीबीआई जांच की मांग कर रहे थे। हालांकि बाद में पूरी कांग्रेस सीबीआई जांच की मांग पर अड़ गई। नतीजा अन्नू की मांग मान कर शासन सीबीआई जांच के लिए राजी भी हो गया। जांच शुरू भी हुई और कई तथ्य सामने आए। लेकिन कई सफेदपोश और आला अफसरों के नाम आने के बाद सीबीआई जांच में भी घटना को कपोल कल्पित मान कर सभी गिरफ्तार लोगों को रिहा कर दिया गया। हालांकि मुकदमा आज भी कायम है।
सीएम के निर्देश पर हुई छापेमारी
दरअसल मुख्यमंत्री के दिए गए निर्देश के बाद पूरे प्रदेश में संवासिनी गृह का निरीक्षण शुरू हो गया है। देवरिया में निरीक्षण के दौरान 18 लड़कियां गायब मिली, जिसके बाद पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया। सभी जिले के आला अधिकारी संवासिनी गृह के निरीक्षण में लग गए। इसी क्रम में आज वाराणसी में डीएम ने संवासिनी गृह का निरीक्षण कर यह बताया कि यहां पर 94 लोगों को रखा गया था जो यहां मौजूद हैं। यहां पर सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी चेक किए गए, जो कि चालू अवस्था में मिले। इस मामले में पुलिस ने बालिका गृह के संचालिका गिरिजा त्रिपाठी, उनके पति मोहन तिवारी और बेटी को गिरफ्तार कर लिया है। इस घटना के बाद से पूरे प्रदेश में इसे लेकर मामला गरमा गया हैं और पुलिस द्वारा निरीक्षण का दौर शुरू हो गया हैं। देवरिया में एक निजी बालिका गृह में रह रही लड़कियों ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं। एक लड़की की शिकायत पर पुलिस ने रविवार रात छापा मार कर बालिका गृह से 24 बच्चियों और लड़कियों को छुड़ाया है। जबकि बालिका गृह से 18 लड़कियां अभी भी गायब हैं।
निजी होम्स की होगी निगरानी, कमी पर दंडित होंगे संचालक
डीएम सिंह का कहना है कि जितने भी गैर सरकारी होम्स चल रहे हैं। उन पर भी निगरानी रखी जा रही है। वहां अगर कोई कमी या लापरवाही देखी जाती है तो उस पर भी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने राजकीय पाश्चात्यवर्ती देख-रेख संगठन पर कार्यरत 9 होमगार्ड को तीन शिफ्ट में 3-3 होमगार्ड को तैनात किये जाने का निर्देश देते हुए कहॉ कि जिसमें से 2 महिला होमगार्डस अन्दर ड्यूटी करेगी एवं 1 होमगार्ड मेन गेट पर ड्यूटी करे।
डीएम की जांच में सब ठीक मिला
डीएम सुरेन्द्र सिंह ने सोमवार को जैतपुरा स्थित राजकीय पाश्चात्यवर्ती देख रेख संगठन का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान राजकीय पाश्चात्यवर्ती देख-रेख संगठन में कुल चार सीसीटीवी क्रमशःगेट, किचेन, स्टोर तथा बाहर के तरफ लगा पाया गया व सभी चालू हालत में मिले। इस दौरान उन्होने पेयजल के लिये लगे आरओ का प्लेटफार्म बनाने का निर्देश दिया। राजकीय पाश्चात्यतर्वी देख-रेख संगठन में कुल सवांसिनीयों की संख्या 94 है, जिसमें 88 सवांसिनीयों एवं 06 उनके छोटे बच्चे है। सभी सवासिनीं 18 वर्ष से ऊपर की है, जिसमें 15 मानसिक रोग से प्रभावित है, 1टीबी तथा 1 लीवर रोग से ग्रसित है। तथा 4 शादीशुदा है एवं 6 छोटे बच्चों वाली मॉ है।
लड़कियों को बनाया जाएगा स्वावलंबी
राजकीय पाश्चात्यतर्वी देख-रेख संगठन में कुल 8 डोरमेट्री है, जिसमें कम से कम 8 से 10 बालिकायें रहती है। शौचालय अच्छी हालत में पाए गए। राजकीय पाश्चात्यवर्ती देख-रेख संगठन के अंदर लगे खराब हैंडपंप को शीघ्र ठीक कराने का निर्देश दिया। संवासनियों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के लिए उनके द्वारा तैयार किये गये उत्तम क्वालिटी बेकरी के केक, मफेन पेस्ट्रीय इत्यादि सामानों को चखा गुणवत्ता की प्रशंसा करते हुए विकास भवन एवं राइफल क्लब सभागार में आयोजित होने वाले बैठको में आवश्यकतानुसार प्रयोग किए जाने का निर्देश दिया।साथ ही 14 बालिकाओं द्वारा सिलाई किये गये कपड़ो की गुणवत्ता की प्रसंशा करते हुए प्राथमिक विद्यालय के बच्चों को दिए जाने वाले निःशुल्क ड्रेस बालिकाओं द्वारा तैयार किए जाने के लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से वार्ता कर कुछ आर्डर दिलाने का निर्देश दिया।
सरकारी काम में ली जाएगी मदद
बालिकाओं द्वारा हिन्दी एवं अंग्रेजी टाईपिंग से प्रभावित होकर जिलाधिकारी ने सरकारी योजनाओं में डाटा एंट्री का कार्य इन संवासिनीयों से कराने का निर्देश दिया। उन्होने खराब स्नानागार का नवनिर्माण कराने को भी कहा। रोगी बालिकाओं का नियमित इलाज डाक्टर द्वारा कराये जाने पर उन्होने विशेष जोर दिया। निरीक्षण के दौरान राजकीय पाश्चात्यवर्ती देख-रेख संगठन के अन्दर की साफ-सफाई की व्यवस्था सन्तोषजनक रहा। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने विजिटिंग रजिस्टर का अवलोकन करते हुए रजिस्टर में दर्ज नामों की पड़ताल भी की।
जिलाधिकारी सुरेंद्र कुमार ने बताया कि राजकीय पाश्चात्यवर्ती देख रेख संगठन, जैतपुरा में निराश्रित बालिकाओं से विवाह के लिए इच्छुक लडकों द्वारा दिए गए आवेदन का पुलिस वेरिफिकेशन कराया जा रहा है। वेरिफिकेशन के पश्चात उपयुक्त पाए गए लड़को का विवाह, मुख्यमंत्री की सामूहिक विवाह योजना के अन्तर्गत कराया जायेगा।
Published on:
06 Aug 2018 07:06 pm
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