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भयानक हादसा: कालीन कंपनी में भीषण आग, बुजुर्ग जिंदा जलकर मौत, देखकर दहशत में आए लोग

भदोही के शाहबाबाद मोहल्ले में बुधवार तड़के एक कालीन कंपनी में आग लगने से कालीन कारोबारी के पिता सहाई राम यादव की दर्दनाक मौत हो गई। आग इतनी तेजी से फैली कि बुजुर्ग कमरे से बाहर नहीं निकल पाए और जिंदा जल गए।
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वाराणसी

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Krishna Rai

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Updated: 19 Nov 2025, 11:08 PM IST

CG News: छर्राटांगर के बारदाना गोदाम में आग, 4 हजार बोरी खाक, बिजली नहीं फिर भी कैसे लगी?(photo-patrika)

CG News: छर्राटांगर के बारदाना गोदाम में आग, 4 हजार बोरी खाक, बिजली नहीं फिर भी कैसे लगी?(photo-patrika)

भदोही के शाहबाबाद मोहल्ले में बुधवार तड़के एक कालीन कंपनी में आग लगने से कालीन कारोबारी के पिता सहाई राम यादव की दर्दनाक मौत हो गई। आग इतनी तेजी से फैली कि बुजुर्ग कमरे से बाहर नहीं निकल पाए और जिंदा जल गए। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया।

कैसे लगी आग?

जानकारी के मुताबिक, सभाशंकर यादव और रमाशंकर यादव दो सगे भाई हैं जो कालीन का कारोबार करते हैं। उनका घर और कंपनी एक ही भवन में है। घर का ऊपरी हिस्सा परिवार के रहने के लिए था और नीचे कालीन का पूरा कामकाज चलता था। दोनों के पिता सहाई राम यादव हर रोज की तरह नीचे मौजूद ऑफिसनुमा कमरे में सो रहे थे।

चार बजे अचानक हुई शॉर्ट सर्किट

सुबह के करीब चार बजे अचानक शॉर्ट सर्किट होने से कमरे में आग लग गई। अंदर फर्नीचर, नक्शे और कालीन के सैंपल रखे होने से आग ने तेजी पकड़ ली। कुछ ही मिनटों में धुआं कमरे में भर गया, जिससे सहाई राम का दम घुटने लगा। वह बेहोश हो गए और बाहर नहीं निकल सके। इसी दौरान आग ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

परिजनों ने बुझाई आग

परिवार के लोगों को धुएं की गंध आने पर शक हुआ। वे नीचे पहुंचे तो आग लगी हुई थी। पड़ोसियों की मदद से उन्होंने लगभग पांच बजे तक आग पर काबू पा लिया। इसी दौरान सुबह 5:30 बजे दमकल की गाड़ी पहुंची, लेकिन आग बुझ चुकी थी, इसलिए उन्हें वापस भेज दिया गया। पुलिस ने अधजले शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

कारोबारी परिवार ने बताया कि आग अगर कमरे के बाहर रखे तैयार कालीनों तक पहुंच जाती, तो नुकसान कई गुना बढ़ सकता था। लाखों रुपये के कालीन बाहर रखे थे जिन्हें किसी तरह सुरक्षित बचा लिया गया। उन्होंने कहा कि आग की जानकारी समय से न मिलने के कारण उनके पिता की जान नहीं बच पाई।

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