
बीएचयू बवाल फाइल फोटो
वाराणसी. काशी हिंदू विश्वविद्यालय में गत सितंबर में हुए बवाल के मामले की चल रही न्यायिक जांच के लिए अब संबंधित पक्ष 18 दिसंबर तक अपना साक्ष्य प्रस्तुत कर सकते हैं। बता दें कि उस पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय ने हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज न्यायमूर्ति वीके दीक्षित को सौंपी है। न्यायमूर्ति दीक्षित पिछले दो दिनों से विश्वविद्यालय के लक्ष्मण दास अतिथि गृह में संबंधित पक्षों से वार्ता कर रहे हैं। दोनों ही दिन छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने अपना पक्ष रखने के साथ ही कुछ साक्ष्य भी प्रस्तुत किए हैं।
इस बीच कई लोगों ने न्यायमूर्ति दीक्षित से व्यक्तिगत मुलाकात के बाद अब कुछ और साक्ष्य शपथ पत्र के साथ प्रस्तुत करना चाहते हैं। साथ ही कुछ नए लोग भी अपना पक्ष व साक्ष्य रखना चाहते हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन ने साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए इसकी मियाद 18 दिसंबर तक बढ़ा दी है। इस अवधि में कोई भी व्यक्ति, छात्र-छात्राएं अपने साक्ष्य, अतिरिक्त साक्ष्य, अतवा सुझाव निर्धारित तिथि तक जांच समिति के कैंप कार्यालय (लक्ष्मण दास अतिथि गृह) के कक्ष संख्या-313 में कार्यालय अवधि में प्रस्तुत कर सकते हैं। यह जानकारी बीएचयू घटना जांच समिति के एचजेएस सचिन राम कुमार गुप्त ने दी है।
बता दें कि गत 21 सितंबर की शाम विश्वविद्यालय परिसर में बीएफए की एक छात्रा संग छेड़खानी हुई थी। उसके बाद छात्राएं आरोपी की गिरफ्तारी तथा उसे दंडित किए जाने के साथ ही परिसर में छात्राओं की सुरक्षा की मांग को लेकर विश्वविद्यालय के सिंह द्वार पर धरने पर बैठ गई थीं। वे कुलपति को धरना स्थल पर बुलाने की मांग पर अड़ी थीं पर वह नहीं आए। दो दिन बाद 23 सितंबर की रात जब कुछ मध्यस्थों की पहल पर छात्राएं कुलपति से मिलने उनके आवास पर गईं तो उनके साथ कुछ छात्र भी थे जिन्हें देख सुरक्षाकर्मी भड़क गए। पहले दोनों पक्षों में नोकझोंक हुई फिर सुरक्षाकर्मियों ने लाठीचार्ज कर दिया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसकी सूचना जिला प्रशासन को दी जिस पर जिला सिविल प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारी परिसर में पहुंचे और निहत्थे छात्र-छात्राओं पर जमकर लाठियां बरसाई थीं। इसी मामले में कुलपति प्रो जीसी त्रिपाठी के बार-बार बदलते और आपत्तिजनक बयानों के चलते मानव संस्धान विकास मंत्रालय ने उन्हें कार्यकाल पूर्ण होने तक अवकाश पर भेज दिया था। अब उनका कार्यकाल पूर्ण हो चुका है। इसी बीच कुलपति ने पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज न्यायमूर्ति वीके दीक्षित को सौंपी थी। न्यायमूर्ति दीक्षित पूर्व में भी एक बार परिसर आए लेकिन तब उन्हें कोई खास सफलता नहीं मिली थी। ऐसे में वह दोबार दो दिन पहले पुनः बीएचयू आए हैं।
Published on:
08 Dec 2017 09:09 pm
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