डॉ. शंकर बताते हैं कि एम्स व्यवस्था परिवर्तन है। वह कहते हैं कि एम्स में सीटी स्कैन 250 रुपये में होता है तो वही सीटी स्कैन पीपीपी मॉडल के तहत आज बीएचयू में 1500 से 1800 रुपये में होता है। एमआरआई स्कैन की कहानी तो और भी मजेदार है। क्च॥ के हीं दो भागों, यानि सर सुंदरलाल अस्पताल और ट्रामा सेंटर में हीं 1000/रुपये का फर्क है। बीएचयू में सीटी स्कैन और एमआरआई के क्कक्कक्क मॉडल के मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है। अगर एम्स होगा तो पूर्वांचल और पूर्वी भारत की जनता को बड़ा लाभ होगा। वह कहते हैं कि काशी में एम्स की स्थापना होने से गरीबों का 250 रुपये में सी टी स्कैन, सभी जांच की सुविधा सस्ते दामों में 24 घंटे सुलभ हो सकेगी। उन्हें आधे दाम पर दवाइयां मिल सकेंगी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्च॥ को 200 करोड़ की वित्तीय सहायता मिली है तो फिर पीपीपी मॉडल से सीटी स्कैन व एमआरआई क्यों?