12 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

BHU के डॉक्टर ने कहा, काशी को झुनझुना नहीं एम्स चाहिए

बताया एम्स और एम्स जैसा में है भारी अंतर. जानिये ये क्या है अंतर...

2 min read
Google source verification

image

Ajay Chaturvedi

Nov 01, 2016

 BHU doctor demands AIIMS in Varanasi

BHU doctor demands AIIMS in Varanasi

वाराणसी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वांचल की जनता के लिए हाल ही में बड़ा तोहफा दिया है। इसके तहत उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सरसुंदर लाल चिकित्सालय को एम्स जैसी सुविधाओं का पैकेज दिया है। यह तोहफा धनवंतरी जयंती को मिला है। लेकिन पीएम के इस पैकेज बीएचयू के कार्डियोलॉजिस्ट ने झुनझुना ठहरा दिया है। उन्होंने कहा कि इस पैकेज से पूर्वी भारत की जनता का लाभ नहीं होने वाला। काशी को झुनझुना नहीं एम्स चाहिए। बतादें कि कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. ओम शंकर पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह और पूर्व कुलपति डॉ. लालजी सिहं के कार्यकाल से काशी में एम्स की मांग कर रहे हैं। डॉ.लाल जी सिंह के कार्यकाल में उन्हें इसके लिए निलंबित भी किया जा चुका है। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अपनी मुहिम जारी रखी है। उन्होंने कहा है कि पीपीपी मॉडल की चिकित्सा सुविधा काशी, पूर्वांचल या पूर्व भारत की जनता के मुफीद नहीं है।



क्या है अंतर पीपीपी और एम्स में
डॉ. शंकर बताते हैं कि एम्स व्यवस्था परिवर्तन है। वह कहते हैं कि एम्स में सीटी स्कैन 250 रुपये में होता है तो वही सीटी स्कैन पीपीपी मॉडल के तहत आज बीएचयू में 1500 से 1800 रुपये में होता है। एमआरआई स्कैन की कहानी तो और भी मजेदार है। क्च॥ के हीं दो भागों, यानि सर सुंदरलाल अस्पताल और ट्रामा सेंटर में हीं 1000/रुपये का फर्क है। बीएचयू में सीटी स्कैन और एमआरआई के क्कक्कक्क मॉडल के मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है। अगर एम्स होगा तो पूर्वांचल और पूर्वी भारत की जनता को बड़ा लाभ होगा। वह कहते हैं कि काशी में एम्स की स्थापना होने से गरीबों का 250 रुपये में सी टी स्कैन, सभी जांच की सुविधा सस्ते दामों में 24 घंटे सुलभ हो सकेगी। उन्हें आधे दाम पर दवाइयां मिल सकेंगी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्च॥ को 200 करोड़ की वित्तीय सहायता मिली है तो फिर पीपीपी मॉडल से सीटी स्कैन व एमआरआई क्यों?




पीपीपी मॉडल चिकित्सा और नर्सिंग होम में क्या फर्क?

उन्होंने कहा है कि एम्स का मतलब होता है आम जनता को सस्ती दर पर उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा। लेकिन एम्स जैसा का मतलब होता है पीपीपी मॉडल जो इस क्षेत्र की जनता की जेब पर भारी ही नहीं बहुत भारी है। इससे पूर्वी भारत की जनता का लाभ नहीं होने वाला। वह कहते हैं कि पूर्वी भारत के यूपी सहित सात राज्यों और पड़ोसी देश नेपाल की जनता के पीपीपी मॉडल चिकित्सा सुविधा और नर्सिंग होम में कोई अंतर नहीं।



एम्स का प्रशासनिक ढांचा आम जन के लिए है मुफीद
डॉ ओम शंकर का कहना है कि एम्स का प्रशासनिक ढांचा भी आमजन के हित वाला होता है। यह सही है कि एम्स में ऐसे आईएएस को भेजा जाता है जो अपनी ईमानदारी के लिए जाना जाता है। ऐसे में वह पूरी व्यवस्था पर नजर रखता है। ऐसे अफसर के नेतृत्व में कोई हीला हवाली हो ही नहीं सकती। वह अफसर ईमानदारी के साथ अस्पताल में कड़ा अनुशासन भी लाता है। आम जनता यही तो चाहती है।