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BHU: लैब विवाद ने पकड़ा तूल, मेडिकल सुपरिटेंडेंट ने विभागाध्यक्ष पर लगाए गंभीर आरोप

BHU के मेडिकल सुपरिटेंडेंट और विभागाध्यक्ष बीच लैब को लेकर चल रहे विवाद ने तूल पकड़ लिया है। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर के बाद दोनों एक दूसरे पर आरोप लगाते हुए नजर आ रहे हैं। आइए आपको बताते हैं क्या है पूरा मामला।

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Medical Supritendent Prof. KK Gupta

बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय BHU के सर सुंदरलाल हॉस्पिटल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रो केके गुप्ता और पैथोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ संदीप कुमार के बीच पैथोलॉजी लैब की अनियमितताओं को लेकर विवाद हो गया है। पूरे विभाग में तनातनी का माहौल बना हुआ है।

क्या है पूरा मामला ? 

बीते दिनों अपने बेटे को कंधे पर उठाकर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस IMS निदेशक एसएन संखवार के कार्यालय तक पहुंचे व्यक्ति के सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर से बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) प्रशासन के बीच तनातनी का माहौल बन गया। मामले को लेकर आला अधिकारियों के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। पूरे प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए कमिश्नर की ओर से BHU मेडिकल सुपरिटेंडेंट से रिपोर्ट मांगी गयी है। कमिश्नर को सौंपी रिपोर्ट में मेडिकल सुपरिटेंडेंट ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए।

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रिपोर्ट में मेडिकल सुपरिटेंडेंट ने बताया कि, ‘सम्बंधित व्यक्ति किसी प्रकार की कोई जांच के लिए नहीं आया था। इसके बाद रिपोर्ट में पैथोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. संदीप कुमार के ऊपर सवाल खड़े किये जैसे कि हॉस्पिटल के CCI लैब का कमरा नंबर 6 पैथोलॉजी विभाग के प्रयोगशाला में FNC जाँच के लिए पिछले सालभर से आवंटित है। इस लैब में सभी प्रकार की आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। इसके बाद भी पैथोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष द्वारा इसे प्रयोग में नहीं लाया गया। इस कारण से मरीजों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि पैथोलॉजी विभाग में अस्पताल के बाहर की भी जांच होती है जिसकी सूचना विश्वविद्यालय प्रशासन को भी नहीं हो पाती है। उन्होंने रिपोर्ट की कॉपी डिविजनल कमिश्नर कुशल राज शर्मा, जिलाधिकारी एस राजलिंगम और विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो अरुण कुमार सिंह को भेजी है।  

डॉ संदीप ने दी सफाई

पैथोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ संदीप कुमार ने कहा, “ ये सारी बातें मनगढंत हैं। मेडिकल सुपरिटेंडेंट को बाहर के जांच करने के आरोप का प्रमाण दिखाना चाहिए। अस्पताल के मरीजों की जांच करना ही मुश्किल होता है। हरसंभव समय से जांच की कोशिश की जाती है। ऐसे में यह आरोप लगाना गलत है। मैं बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) IMS डायरेक्टर को लेटर लिखूंगा। वो चाहे तो जांच करवा लें।

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