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BHU के नए प्रॉक्टोरियल बोर्ड में 13 महिलाएं, कई पुरुष दिग्गज बाहर

छात्राओं पर पुरुष सुरक्षाकर्मियों व पुलिस वालों के लाठीचार्ज के बाद हुआ बड़ा बदलाव।    

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बीएचयू

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वाराणसी. काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में पिछले महीने बीएफए की छात्रा के साथ हुई छेड़खानी के बाद हुए बवाल के बाद विश्विद्यालय के आंतरिक सुरक्षा बल में भारी फेरबदल किया गया है। सबसे पहले विश्वविद्यालय की पहली चीफ प्रॉक्टर बनीं प्रो. रोयाना सिंह। फिर बुधवार को प्रो. सिंह के नेतृत्व में उनके सहित 32 सदस्यीय नए प्रॉक्टोरियल बोर्ड की घोषणा कर दी गई। इसमें चीफ प्रॉक्टर सहित 13 महिला शिक्षकों को प्रॉक्टर बनाया गया है। यह सूचना विश्वविद्यालय के मीडिया सेल द्वारा दी गई है।

बीएचयू के असिस्टेंट रजिस्ट्रार (प्रशासन) की ओर से जारी सूचना के मुताबिक 32 सदस्यीय प्रॉक्टोरियल बोर्ड से पुराने मठाधीशों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। टीम में शामिल महिला शिक्षकों में प्रो. श्रद्धा सिंह और प्रो. निर्मला होरो को डिप्टी चीफ प्रॉक्टर बनाया गया है। इसके अलावा डॉ सुजाता गौतम, डॉ आभा मिश्रा पाठक, डॉ सीमा तिवारी, डॉ जसमिंदर कौर, डॉ विनीता सिंह, डॉ गीता राय, डॉ इंद्रा तिवारी, डॉ आंचल सिंह, डॉ. सिद्धिदात्री भारद्वाज और डॉ किरन गिरि हैं। इसके अलावा प्रो. विवेक सिंह और प्रो. एमएस पांडेय को भी डिप्टी चीफ प्रॉक्टर बनाया गया है। साथ ही प्रो. ललित मोहन अग्रवाल, प्रो. संजय सोनकर, डॉ बी जिर्ली, डॉ एनपी सिंह, डॉ आरके लोधवाल, डॉ प्रभाकर सिंह, डॉ अजय कुमार यादव, डॉ योगेंद्र पांडेय, डॉ विवेक पाठक, डॉ महावीर पनवर, डॉ विजय पाल, डॉ अवधेश सिंह, प्रो. एमए अंसारी, डॉ राहुल अग्रवाल, डॉ एलपी मीना, डॉ एके पाठक और डॉ सत्येंद्र तिवारी को भी प्रो. रोयाना सिंह की टीम में जगह मिली है।

बता दें कि विश्वविद्यालय के इतिहास में किसी प्रॉक्टोरिलय बोर्ड में इतनी बड़ी तादाद में पहली बार महिला शिक्षकों को स्थान मिला है। ऐसा छात्राओं के हितों के मद्देनजर किया गया है। यहां यह भी बता दें कि पिछले महीने 23 सितंबर की रात जब लाठीचार्ज हुआ था तब विश्वविद्यालय और जिला पुलिस पर यह आरोप लगा था कि छात्राओं पर पुरुष सुरक्षाकर्मियों व पुलिसि के सिपाहियों द्वारा पीटा गया था। यहां तक कि छात्राओं के हॉस्टल तक में पुरुष सुरक्षा बल व पुरुष पुलिस के जवान ही शामिल थे। तब कोई महिला सुरक्षा कर्मी व सिपाही नहीं था। इस मामले ने तूल पकड़ा। महिला आयोग ने भी इस पर सवाल उठाया था। हालांकि उसके पहले ही प्रॉक्टोरियल बोर्ड की कमान प्रो. रोयाना सिंह को सौंप कर विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह भूल सुधार का प्रयास किया था। अब प्रॉक्टोरियल बोर्ड में कुल 13 महिला शिक्षकों को शामिल कर प्रशासन ने भूल सुधार के साथ मामले को ठंडा करने का प्रयास तो किया ही है साथ ही छात्राओं को भी भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि अब उनके साथ कदम कदम पर महिला सुरक्षाकर्मी होंगे जो उनकी बातों को सुनने के साथ ही समस्याओं को समझेंगे अन्यथा अभी तक छात्राओं का भी आरोप रहता रहा कि पुरुष सुरक्षाकर्मी उनकी मदद करने की बजाय उन्हें ही आरोपित करते हैं।