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BHU के नए कुलपति के लिए मंथन शुरू, वैज्ञानिक के नाम पर लग सकती है मुहर

सर्च कमेटी घोषित होते ही विश्वविद्यालय परिसर में बढ़ी हलचल। 25 नवंबर तक घोषित हो सकता है खुलासा।

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बीएचयू सिंह द्वार प्रतीकात्मक फोटो

बीएचयू सिंह द्वार प्रतीकात्मक फोटो

डॉ अजय कृष्ण चतुर्वेदी

वाराणसी. काशी हिंदू विश्वविद्यालय के नए कुलपति के चयन की प्रक्रिया अब तेज हो गई है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा सर्च कमेटी की घोषणा भी कर दी गई है। यह घोषणा गुरुवार को की गई है। अब प्रसिद्ध अर्थशास्त्री विजय केलकर की अध्यक्षता में गठित सर्च कमेटी मे दो आईआईटियंस को शामिल किया गया है। इसमें एक आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी हैं तो दूसरे आईआईटी गांधीनगर के निदेशक प्रो सुधीर जैन को शामिल किया गया है। सर्च कमेटी की घोषणा के साथ ही परिसर में हलचल बढ़ गई है। कयासों का गुणा गणित लगाने में प्रोफेसर जुट गए हैं। माना जा रहा है कि इस बार कोई वैज्ञानिक ही विश्वविद्यालय का कुलपति होगा। अगर ऐसा होता है तो प्रो जीसी त्रिपाठी के पूर्व कुलपति रहे डॉ लालजी सिंह के बाद यह दूसरे वैज्ञानिक कुलपति होंगे। वैसे बीएचयू में इससे पहले भी कई वैज्ञानिक कुलपति बन चुके हैं। हाल के वर्षों की बात की जाए तो सर्वाधिक चर्चित वैज्ञानिक कुलपति में प्रो आरपी रस्तोगी का नाम लिया जाता है जिन्होंने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधि को नियमित किया। परिसर में अनुशासन का माहौल बनाया। यहां तक कि छात्रसंघ पहली बार उनके ही कार्यकाल में भंग हुआ था। ऐसे में सूत्रों का कहना है कि अब केंद्र सरकार फिर से एक वैज्ञानिक पर ही भरोसा जता सकती है।

बता दें कि प्रो जीसी त्रिपाठी का कार्यकाल 27 नवंबर को पूरा हो रहा है। ऐसे में घोषित सर्च कमेटी के आगे बड़ी चुनौती होगी कि उससे पहले कुलपति के लिए तीन नामों का पैनल तैयार कर ले ताकि उसे विजिटर (राष्ट्रपति) के पास भेज कर उनकी रजामंदी ली जा सके। हालांकि सूत्र बताते हैं कि दिल्ली में कुलपति चयन की प्रक्रिया तेज हो गई है। माना जा रहा है कि अगले सप्ताह के आरंभ में ही सर्च कमेटी की पहली बैठक हो जाएगी। पहली बैठक में अब तक प्राप्त आवेदनों की स्क्रूटनी की जाएगी। सूत्रों का कहना है कि जैसा कि शोर था कि कोई महिला कुलपति बनेगी ऐसा नहीं होने जा रहा है। यही नहीं विश्वविद्यालय के जातीय आंकड़ों पर भी केंद्र सरकार की नजर है। ऐसें में जाति विशेष के लोगों से केंद्र सरकार परहेज कर सकती है।

सूत्रों की मानें तो इस बार कोई न कोई वैज्ञानिक ही कुलपति बनेगा। इसके पीछे वो सर्च कमेटी में दो आईआईटियंस को शामिल करने के पीछे की केंद्र सरकार की मंशा को आधार बना रहे हैं। उनका कहना है कि कुलपति के लिए जबलपुर, बिहार से दो आइटियंस ने पूरा जोर लगा रखा है। इसमें जबलपुर के आइटियंस तो सर्च कमेटी के सदस्यों के काफी नजदीकी बताए जा रहे हैं। इस बीच बीएचयू से भी एक आईआईटियन का नाम जोर शोर से लिया जा रहा है। बताया जा रहा है कि उन्होंने भी अपनी लॉबी में लॉबिंग तेज कर दी है। वैसे जिन आइटियंस या वैज्ञानिकों का नाम चर्चा में है वे पद्म पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं।

हालांकि वैज्ञानिक के कुलपति बनाए जाने की संभावनाओं के बीच विश्वविद्यालय परिसर में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि इस विश्वविद्यालय के सफल संचालन में वैज्ञानिक नहीं समाजवैज्ञानिक ही ज्यादा सफल होगा। ऐसे लोगों ने तो सर्च कमेटी पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। उनका कहना है कि यह तो एक पक्षीय कमेटी होगी जिसमें दो-दो आईआईटियंस हैं। वैसे कुछ लोग दावे के साथ कह रहे हैं कि सरकार ने कुलपति का नाम तय कर लिया है, सर्च कमेटी तो बस औपचारिकता पूरी करने की लिए गठित की गई है ताकि कोई अंगुली न उठे। वैसे सर्च कमेटी के अध्यक्ष की विद्वत्ता को लेकर सभी एकमत हैं।