
काजल
वाराणसी. बनारस और बनारसीपन की दुहाई शायद बार-बार इसीलिए दी जाती है, एक मासूम बच्ची जो 6 दिन से बीएचयू के ट्रामा सेंटर में दर्द से कराह रही थी। एक गलियारे में स्ट्रेचर पर पड़ी थी। सड़क दुर्घटना में घायल बच्ची के पैर में गंभीर चोट आई थी। उसका आपरेशऩ होन था जिसके लिए उसके पास पैसे नहीं थे। यह जान कर बीएचयू के समाज विज्ञान संकाय के छात्रों ने मुहिम चलाई। लोगो से चंदा इकट्ठा करना शुरू किया। पत्रिका ने छात्रों की इस नेक पहल को जगह दी। शुक्रवार की शाम को यह खबर चलाई थी पत्रिका ने। उसके बाद आनन-फानन में मददगार सामने आए और देर रात बच्ची का सफल आपरेशन भी हो गया। फिलाहल बच्ची अस्पताल में स्वस्थ्य व प्रसन्न है।
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घटना के बारे में बीएचयू के समाजविज्ञान संकाय के बीए तृतीय वर्ष के छात्र शिवम यादव और हर्ष राज ने पत्रिका से बातचीत में बताया कि बच्ची अपनी मां के साथ लंका क्षेत्र में ही एक बिल्डिंग कंस्ट्रक्टर के अंडर में काम करती रही। पिता की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। बच्ची जिसका नाम काजल है की एक छोटी दुधमुंही बहन भी है। छह दिन पहले काम से लौटते वक्त लंका में ही एक ऑटो व स्कूट की चपेट में आने से बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई। उसके हाथ व पैर में चोट आई थी। पैर की चोट ज्यादा गंभीर थी। किसी तरह बच्ची बीएचयू ट्रामा सेंटर तो पहुंच गई जहां उसका प्राथमिक उपचार भी हुआ लेकिन उसके पैर के आपरेशन के लिए 40 हजार रुपये की दरकार थी। बिना पैसे के आपरेशन संभव नहीं थी। ऐसे में अस्पातल से उसे छुट्टी भी मिल गई लेकिन वह एक स्ट्रेचर पर अस्पताल में ही दर्द से कराहती रही।
चार दिन बाद इस बच्ची की जानकारी बीएचयू के नरेंद्र देव छात्रावास के मेस महाराज ने छात्रावास के छात्र शिवम यादव, हर्ष राज आदि को दी। दोनों देर रात ट्रामा सेंटर पहुंचे और बच्ची को देखा। उसकी मां और ट्राम सेंटर के नर्सिंग स्टॉफ से बात की। फिर जुट गए मुहिम में। उन्होंने सोशल मीडिया पर बच्ची की वीडियो क्लिप के साथ लोगों से मदद की याचना की। साथ ही कार्ड बोर्ड और पोस्ट आदि बना कर सड़क पर, सर सुंदर लाल अस्पताल और ट्रामा सेंटर में लोगों से चंदा इकट्ठा करना शुरू किया।
इन छात्रों की इस मुहिम में कुछ मीडियाकर्मी भी शामिल हुए। पत्रिका ने भी यह खबर चलाई। उसके बाद ट्रामा सेंटर परिसर स्थित एचडीएफसी बैंक प्रबंधन भी मदद को आगे आया। हर्ष ने बताया कि एचडीएफसी बैंक के अलावा वह ऑटो चालक भी आगे आया और उसने भी 5000 रुपये की मदद की। इस बीच छात्रों ने अपनी मुहिम से करीब 11 हजार रुपये जुटाए। ट्रामा सेंटर नर्सिंग स्टॉफ ने भी मदद की। इस तरह से शुक्रवार की रात में ही बच्ची का आपरेशन हुआ। हर्ष ने बताया कि आपरेशन करीब ढाई बजे रात तक चला। उसके बाद बच्ची के पैर में रॉड डाली गई, प्लास्टर किया गया। अब बच्ची स्वस्थ व प्रसन्न है।
ये है महामना मदन मोहन मालवीय की बगिया का असली चेहरा, जहां मानवता इस कदर आज भी जिंदा है। ये महामना की तपोस्थली की ही देन है, जहां के बच्चों ने मिल कर एक गरीब, बेसहारा मासूम बच्ची के लिए मुहिम चलाई और उसका इलाज कराने में सफल रहे। इस पूरी मुहिम में बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान कर्मी बीरम चौरसिया के योगदान को भी नकारा नहीं जा सकता जिन्होंने बच्ची के आपरेशन के लिए प्रधानमंत्री तक को ट्वीट किया। अब बच्ची की मुस्कान के साथ सभी के चेहरे खिले हैं। कई छात्र तो बच्ची के प्लास्टर पर अपना ऑटोग्राफ भी दे रहे हैं।
Published on:
04 Jan 2020 01:27 pm
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