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मुख कैंसर रोगियों के लिए राहत, बिना चीर फाड़ के होगा आपरेशन

मुख के कैंसर रोगियों का मुख नहीं खुलता। ऐसे में आपरेशन में भी दिक्कत होती रही। पर अब लेजर विधि ने यह काम भी आसान कर दिया है। बीएचयू में भी मिलेगी यह सुविधा।

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mouth cancer

mouth cancer

डॉ अजय कृष्ण चतुर्वेदी


वाराणसी. मुख कैंसर के रोगियों के लिए अच्छी खबर है। अब उनकी बायप्सी भी हो जाएगी और ऑपरेशन भी। एक बूंद रक्त भी नही निकलेगा। अगर मुंह नहीं खुलता हो तो भी कोई दिक्कत नहीं होगी। ये सब हो पाएगा रेजर सर्जरी से। यह सुविधा जल्द ही बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के दंत रोग विभाग में उपलब्ध होने जा रही है।

इस लेजर सर्जरी के बाबत दंत रोग विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो टीपी चतुर्वेदी ने पत्रिका को बताया कि लेजर सर्जिकल प्रक्रिया में प्रकाश स्त्रोत का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह रक्त रहित सर्जरी है। इसकी विशेषताएं निम्न लिखित हैं...


-कैंसर में यह बायोप्सी में सहायक होगा। (बायोप्सी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें निदान के लिए एक छोटी मात्रा में संबंधित हिस्सा निकाला जाता है)

-मुख में किसी छोटे अल्सर का इलाज किया जा सकता है

-लेजर सर्जरी से दर्द भी नहीं होता।

- मसूढ़ा संबंधी रोग का इलाज किया जा सकता है

-किसी भी छोटे ट्यूमर को हटाया जा सकता है

-दांतों के विघटन को सही किया जा सकता है (इस प्रक्रिया को ब्लीचिंग के रूप में जाना जाता है)

-चिकित्सकीय कैरी रूट नहर उपचार का इलाज किया जा सकता है। बैक्टीरिया की हत्या में मददगार है

-हड्डी में दांत लेजर सर्जरी और दांतों के तारों की मदद से ठीक किया जा सकता है

लेजर सर्जरी का लाभ
लाभ यह है कि यह ज्यादातर रक्तहीन प्रक्रिया है

हानि
नुकसान यह कि अगर सावधानी नहीं बरती गई तो चिकित्सकीय प्रक्रिया के दौरान यह रोगी या डॉक्टर की आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है

उन्होंने बताया कि मुख कैंसर के मरीज का मुख बहुत कम खुलता है। ऐसे में परंपरागत सर्जरी में दिक्कत आती थी। ऑपरेशन में कई घंटे लगते थे। साथ ही घाव जल्दी सूखता नहीं था। लेकिन लेजर सर्जरी से इन सारी समस्या का समाधान हो जाएगा। महज आधे घंटे में हो जाएगा ऑपरेशन और घाव भी जल्द ही भर जाएगा। कोई मसूढ़ों में सूजन और रक्त स्राव की समस्या है तो उसका भी ऑपरेशन हो जाएगा। यह गर्भवती महिलाओं के लिए काफी लाभदायक है। पहले ऐसी गर्भवती महिलाएं जिन्हें मसूड़ों की दिक्कत होती थी और खून निकलता था उन्हें दवा देने में भी काफी सावधानी बरतनी पड़ती थी क्योंकि दवाओं का साइड इफेक्ट गर्भ में पल रहे बच्चे पर भी पड़ने की आशंका बनी रहती थी। प्रो चतुर्वेदी के मुताबिक लेजर सर्जरी से दांतों के बीच का गैप भी दूर किया जा सकता है।

इस संबंध में बीएचयू के कुलपति प्रो राकेश भटनागर का कहना है कि एम्स जैसी सुविधाओं के तहत दंत चिकित्सा विभाग को जल्द ही लेजर सर्जरी की मशीन उपलब्ध हो जाएगी।