
यूपी बोर्ड लोगो
वाराणसी. मौजूदा यूपी सरकार के इस बड़े फैसले से प्रदेश के लाखों छात्र-छात्राओं का भविष्य अंधकारमय होने की आशंका बलवती हो गई है। खास तौर पर डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले विद्यार्थी ही नहीं उनके अभिभावकों पर भी सरकार और यूपी बोर्ड का यह फैसला भारी पड़ने जा रहा है। लेकिन सरकार के इशारे पर बोर्ड ने बिना किसी विशेषज्ञ की राय के अपने पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव कर सबको चकित कर रखा है।
बता दें कि यूपी बोर्ड ने जो नया पाठ्यक्रम लागू किया है उसके तहत अब हाई स्कूल के विद्यार्थियों को जीव विज्ञान विषय नहीं पढ़ाया जाएगा। यानी अब छात्र-छात्राओं का सीधे इंटरमीडिएट में जीव विज्ञान विषय से सामना होगा। विषय विशेषज्ञ बताते हैं कि जब हाईस्कूल में जीव विज्ञान (जंतु विज्ञान और वनस्पति विज्ञान) की पढ़ाई होती थी तब भी इंटर में जाने के बाद विद्यार्थियों को काफी लेंदी पाठ्यक्रम मिलता था जिसकी तैयारी आसान नहीं होती थी। फिर इंटरमीडिएट के बाद जो छात्र या छात्रा मेडिकल की तैयारी करते थे उनके लिए जीव विज्ञान के दोनों पेपरों की तैयारी वह भी केंमिस्ट्री और फिजिक्स के साथ काफी मुश्किल होती थी। अब जब हाईस्कूल में जीव विज्ञान पढ़ाया ही नहीं जाएगा तो ऐसे में इंटर में छात्रों को इस विषय की बेसिक जानकारी भी नहीं होगी। ऐसे में छात्र-छात्राओं की मुसीबत बढ़ना तय है। उनकी मेडिकल की राह मुश्किल होगी।
विशेषज्ञों ने पत्रिका से बातचीत में बताया कि यूपी बोर्ड ने जो पाठ्यक्रम में तब्दीली की है उसके अनुसार जीव विज्ञान विषय को समाप्त कर सामान्य विज्ञान के साथ जोड़ा गया है। अब इस सामान्य विज्ञान विषय का एक पेपर होगा। इस पेपर में जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान आदि विषय भी होंगे। ऐसे में यह सामान्य विज्ञान कला व वाणिज्य वर्ग के लिए तो कामचलाऊ हो सकता है क्योंकि उन्हें विज्ञान के हर विषय से छुआछूत हो जाएगा जो उनके सामान्य ज्ञान में वृद्धि कर सकता है लेकिन जो विद्यार्थी जीव विज्ञान को अपना कैरियर बनाना चाहते हैं उनके लिए यह प्रयोग सर्वथा हानिकारक होगा।
छात्रों के भविष्य के साथ खेल
विज्ञान विषय के शिक्षक व कमलापति त्रिपाठी आदर्श इंटर कॉलेज के सेवानिवृत्त शिक्षक व माध्यमिक शिक्षक संघ (चेतनारायण गुट) के प्रांतीय मीडिया प्रभारी अशोक कुमार श्रीवास्तव ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि यूपी बोर्ड का यह फैसला छात्रहित में नहीं है। पहले ही इंटर का जीव विज्ञान का पाठ्यक्रम बहुत लेंदी होता था उसे ही तैयार करने में दिक्कत होती थी बच्चों को अब जब उन्हें बेसिक जानकारी तक नहीं होगी। वे जीव विज्ञान की प्रयोगशाला में भी नहीं जाएंगे। बहुत सारे तकनीकी नामों से अपरिचित होंगे तो वो इंटर में ही जीव विज्ञान की तैयारी कर लें वही बहुत है मेडिकल की तैयारी पिछड़ना तय है। इससे मेधावी छात्र-छात्राओं का साल बर्बाद होगा। उन्होंने कहा कि इससे बेरोजगारी भी बढ़ेगी। जब जीव विज्ञान विषय ही नहीं होगा तो हाईस्कूल में आर्डिनरी बीएससी करने वाले शिक्षकों से काम चलाया जाएगा। यह जरूरी नहीं कि बीएससी, बीएड और टीईटी करने वाला शिक्षक जीव विज्ञान पढा हो। वह गणित से भी इंटर व बीएससी कर सकता है। ऐसे में हो सकता है कि वह गणित, भौतिक विज्ञान और रसायन विज्ञान तो पढ़ा ले पर जीव विज्ञान का पाठ वह छुए ही नहीं। ऐसे में यह निर्णय किसी स्तर से सही नहीं ठहराया जा सकता। ऐसा तो सीबीएसई और आईसीएसई में भी नहीं है। प्रयोग के नाम पर यूपी सरकार व यूपी बोर्ड छात्रों के भविष्य से खेल रही है, यह बंद होना चाहिए। पाठ्यक्रम मे परिवर्तन से पहले संबंधित विषय के जानकारों की राय ली जानी चाहिए।
Published on:
02 Aug 2018 02:02 pm
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