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जानिए वह पांच बड़े कारण जिससे कार्यकर्ताओं का बीजेपी से हो रहा मोहभंग

संसदीय सीट पर हुए उपचुनाव में मिली हार के बाद भी नहीं बदली स्थिति, लोकसभा में पार्टी कैसे दिखायेगी ताकत

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BJP worker

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वाराणसी. लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी के लिए सबसे बड़ी समस्या कार्यकर्ताओं की नाराजगी बन सकती है। केन्द्र व यूपी में सरकार आने के बाद से आम कार्यकर्ता पार्टी के नेताओं की कार्यशैली पर सवाल उठाने लगे हैं। यूपी की तीन सीटों पर हुए उपचुनाव में मिली हार के बाद भी पार्टी की स्थिति नहीं बदली है। मौजूदा व्यवस्था में जल्द बदलाव नहीं हुआ तो लोकसभा चुनाव 2019 में भगवा दल की परेशानी बढ़ सकती है।
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केन्द्र में पीएम नरेन्द्र मोदी सरकार बनने के बाद से बीजेपी कार्यकर्ता बनने की होड़ लग गयी थी। पीएम नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने कई राज्यों में चुनाव जीता था इसके बाद बीजेपी ने व्यापक स्तर पर सदस्यता अभियान शुरू किया था इसके बाद पार्टी का दावा था कार्यकर्ताओं की संख्या के मामले में बीजेपी दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है। यूपी में सीएम योगी सरकार बनने के बाद से कार्यकर्ताओं की नाराजगी बढऩे लगी। नाराजगी इतनी अधिक बढ़ चुकी है कि बीजेपी को गोरखपुर जैसे गढ़ में उपचुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। आइये जानते हैं कि वह कौन पांच कारण है जिससे बीजेपी कार्यकर्ता नाराज है।
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कार्यकर्ताओं की सुनवाई नहीं

पीएम नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस की बात की जाये तो यहां पर बीजेपी को सबसे अच्छा समय चल रहा है। देश का पीएम से लेकर शहर का मेयर तक बीजेपी का है इसके बाद भी कार्यकर्ताओं के क्षेत्र में आधारभूत सुविधा नहीं मिल रही है। बनारस में कुछ ही नेता की अधिकारी सुनते हैं इसलिए विभागों में भी कार्यकर्ताओं की समस्या का समाधान नहीं हो रहा है जिससे उनमे आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
विरोधी दलों से आये दबंग कार्यकर्ताओं को मिल रही अधिक तव्वजो
कार्यकर्ताओं का आरोप है कि वर्षों तक बीजेपी का प्रचार किया था। संगठन से कुछ नहीं मिलता था इसके बाद भी अपना पैसा, समय लगातार पार्टी को मजबूत कराने का काम किया। यूपी में सरकार बनी तो अन्य दलों से आये भूमाफिया, दबंग, ठेकेदारों को ज्यादा तव्वजो दी जा रही है जबकि आम कार्यकर्ता की कही सुनवाई नहीं हो रही।

भू माफिया से कार्यकर्ता सबसे अधिक परेशान

अखिलेश यादव व मायावती की सरकार पर भू माफिया को संरक्षण देने का आरोप लगाने वाली बीजेपी खुद ही परेशान है। भू माफिया सरकारी तंत्र पर हावी हो चुके हैं जिसका शिकार आम बीजेपी कार्यकर्ता भी हो रहा है। सीएम योगी के पोर्टल पर भूमाफिया के खिलाफ शिकायत तो दर्ज होती है लेकिन किसी मामले में कोई कार्रवाई नहीं होने से कार्यकर्ता काफी नाराज है।

व्यवस्था में बहुत बदलाव नहीं, जनता पूछ रही सवाल

बीजेपी ने विकास करने का वायदा करके चुनाव जीता था लेकिन उसका अधिक असर नहीं दिख रहा है। बीजेपी कार्यकर्ता ने कहा कि जब जनता के बीच जाते हैं तो लोग पूछते हैं कि पीएम मोदी जिन योजनाओं का उद्घाटन करके जाते हैं वह भी शुरू नहीं हो पाती है। हर प्रोजेक्ट देरी से चल रहा है लेकिन जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होती है।

बीजेपी में सोशल इंजीनियरिंग की दरक रही दीवार

चुनाव के पहले बीजेपी ने सभी जातियों को साधने के लिए उनसे जुड़े नेताओं को प्रमोट किया था और अनुप्रिया पटेल व ओमप्रकाश राजभर से पार्टी का गठबंधन हुआ था। सरकार बनने के बाद पुलिस थाने से लेकर अधिकारी वर्ग में खास लोगों की ही तैनाती हो रही है जिससे अन्य जाति के कार्यकर्ता बेहद नाराज है। नाम ने छापने की शर्त पर एक कार्यकर्ता ने कहा कि वोट के समय सबका साथ सबका विश्ववास का नारा दिया जाता है और जब महत्वपूर्ण विभागों में तैनाती की बात होती है तो कुछ खास लोगों का ही ध्यान रखा जाता है इससे अपनी जाति के वोटरों को बीजेपी के साथ फिर से जोडऩे में दिक्कत होगी।
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