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World Blood Donor Day: अगर आप ले रहे हैं ये दवाइयां तो न करें रक्तदान, हो सकता है खतरा

जानिए किसे करना चाहिए रक्तदान, फायदे और नुकसान

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Blood Donate

रक्तदान

वाराणसी. रक्तदान महादान है। यह कई जिंदगियों को बचाता है। कई बार जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे लोगों को हम खून देकर बचाते हैं। हालांकि रक्तदान बिल्कुल सुरक्षित है और ब्लड डोनेट करने के बाद कुछ ही देर में खून बन जाता है लेकिन कुछ स्थितियों में ब्लड डोनेट नहीं करना चाहिए। ये ऐसी स्थितियां है जिससे ब्लड डोनेट करने वाले और जिसे ब्लड चढ़ाया जा रहा है दोनों खतरा हो सकता है। आइए हम आपको बताते हैं कि रक्तदान के क्या फायदे और नुकसान हैं और किन स्थितियों में रक्तदान करने से बचना चाहिए।

कौन नहीं कर सकता है रक्तदान– Who cannot donating blood
बच्चों को स्तनपान कराने वाली महिला ब्लड डोनेट नहीं कर सकती।
हिमोग्लोबिन 5 प्रतिशत से कम होने पर रक्तदान नहीं दिया जाता है।
जिन्हें आगे आने वाले 12 घंटों में लंबी यात्रा, वायु यात्रा करनी हो या किसी तरह का भारी काम करना हो।
श्वास की बीमारी जैसे लगातार खांसी, जुखाम, गला खराब, या लंबे समय से एंटीबायोटिक ले रहे हों या अस्थमा के मरीज जो स्टीरइड ले रहे हों।
किसी तरह का कोई मेजर/ माइनर ऑपरेशन हुआ हो।
हृदय रोगी जो एंजाइना, ब्लॉकेज के मरीज हो।
अंत:स्रावी ग्रंथियों के रोगियों से रक्त नहीं लिया जाता।
डायबिटीज के रोगी जो इंसुलिन लेते हो।
किडनी, पाचनतंत्र के रोगी रक्तनदान नहीं कर सकते।
हेपेटाइटिस, एचआईवी एड्स, सिफिलिस, टीबीआदि के रोगी रक्त दान नहीं कर सकते।
बेहोशी या मिर्गी आती हो, या जो पिछले 3 वर्षो में पीलिया हुआ हो।
जो एस्प्रीन, एन्टीथायरॉइड, एन्टीबायोटिक, स्टीरइड आदि दवाइयां ले रहे हों।
वह महिलाएं जो पिछले 6 महीनों में गर्भवती हुई हो।

रक्तदान करने के क्या फायदे – Blood Donate Advantage
ब्लड डोनेट करने वालों को कैंसर होने का खतरा बहुत कम होता है।
दिल से जुड़ी बीमारियों के होने का खतरा कम हो जाता है।
हार्ट अटैक आने की आशंका भी कम हो जाती है।
इससे कैलोरी भी होती है वजन कंट्रोल कर सकते हैं।
शरीर में अतिरिक्त आयरन को जमने से रोकता है।

रक्तदान से सेहत को नुकसान– Blood Donate DisAdvantage
रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित है और इससे आपकी सेहत को कोई नुकसान नहीं होगा। रक्तदान से कई लोगों का जीवन बचाया जा सकता है। बहुत से लोग यह समझते हैं कि रक्तदान से शरीर कमज़ोर हो जाता है, और उस रक्त की भरपाई होने में महीनों लग जाते हैं। लोगों में यह गलतफहमी भी है कि नियमित ख़ून देने से लोगों की रोग से लड़ने की क्षमता कम होती है और उसे बीमारियां जल्दी होती हैं। यह भ्रम इस कदर है कि लोग रक्तदान का नाम सुनकर ही डर जाते हैं। विश्व रक्तदान दिवस समाज में रक्तदान को लेकर गलतफहमी को दूर करने का और रक्तदान को बढ़ावा का काम करता है।