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अखिलेश यादव ने लिया राज्यसभा चुनाव का बदला, मायावती के सियासी चक्रव्यूह में फंस गये राजा भैया!

लोकसभा चुनाव के पहले ही बढ़ गयी समस्या, जानिए क्या है कहानी

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Mayawayi, Raja Bhaiya and Akhilesh Yadav

Mayawayi, Raja Bhaiya and Akhilesh Yadav

वाराणसी. बसपा सुप्रीमो मायावती व अखिलेश यादव के सियासी चक्रव्यूह में राजा भैया फंस गये हैं। लोकसभा चुनाव के पहले ही बाहुबली नेता की मुसीबत बढ़ गयी है। राजा भैया जिस परिस्थिति में फंसते जा रहे हैं उसमे सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव भी मदद नहीं कर पायेंगे। लोकसभा चुनाव 2019 में प्रतापगढ़ संसदीय सीट पर जबरदस्त चुनावी मुकाबला देखने को मिलेगा। चर्चा है कि पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने राज्यसभा चुनाव का बदला लेते हुए ही यह सीट बसपा के खाते में डाली है।
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बसपा सुप्रीमो मायावती व राजा भैया की सियासी लड़ाई किसी से छिपी नहीं है। मुलायम सिंह यादव व शिवपाल यादव ने हमेशा ही राजा भैया की मदद की थी। राजा भैया पर सीओ हत्याकांड कराने का आरोप लगा था तो यूपी के तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव ने राजा भैया से मंत्री पद ले लिया था इसके बाद सीबीआई जांच में राजा भैया पर लगे सभी आरोप गलत पाये गये। लेकिन अखिलेश यादव व राजा भैया के संबंधों पर मंत्री पद जाने का प्रभाव पड़ा था। यूपी में सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार बन जाने के बाद राज्यसभा चुनाव हुआ था कहा जाता है कि अखिलेश यादव के कहने के बाद भी राजा भैया ने बसपा प्रत्याशी को वोट नहीं दिया था जिसके बाद अखिलेश यादव ने राजा भैया को लेकर ट्वीट किया था और बाद में ट्वीट हटा दिया था। राजा भैया ने कभी सार्वजनिक रुप से यह स्वीकार नहीं किया था कि उन्होंने किसे वोट दिया है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी राजा भैया के मतदान को लेकर बयान दिया था।
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तो फिर अखिलेश यादव ने राजा भैया से लिया राज्यसभा का बदला
राजनीति जगत में इस बात की चर्चा है कि राजा भैया से राज्यसभा चुनाव का बदला लेने के लिए ही अखिलेश यादव ने बसपा के कोटे में प्रतापगढ़ की सीट डाली है। यहां पर सपा का अच्छा जनाधार था। प्रतापगढ़ में यादव व मुस्लिमों की संख्या कम नहीं है। बसपा के इस सीट से चुनाव लडऩे से राजा भैया के लिए राह आसान नहीं होगी। कभी सपा के खास रहे राजा भैया को स्थानीय सपा नेताओं से अपना संबंध है ऐसे में सपा इस सीट से चुनाव लड़ती तो गठबंधन को अधिक फायदा हो सकता था लेकिन यहां पर गठबंधन के तहत बसपा चुनाव लडऩे जा रही है। यदि दलित, यादव के साथ मुस्लिम वोट बैंक एक हो जाता है तो राजा भैया के पार्टी के प्रत्याशी अक्षय प्रताप सिंह के लिए जीत की राह कठिन हो जायेगी।
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प्रतापगढ़ में कांग्रेस का है अपना वोट बैंक
प्रतापगढ़ में कांग्रेस का अपना वोट बैंक हैं। यहां पर कांग्रेस के टिकट पर राजकुमारी रत्ना सिंह चुनाव जीत चुकी है। चर्चा है कि इस बार भी राजकुमारी रत्ना सिंह को संसदीय चुनाव का टिकट मिल सकता है यदि ऐसा हुआ तो राजा भैया की परेशानी बढ़ जायेगी। एक तरफ उन्हें सपा व बसपा गठबंधन से लडऩा होगा तो दूसरी तरफ कांग्रेस व बीजेपी होगी। ऐसी स्थिति में राजा भैया के बेहद खास रहे मुलायम सिंह यादव भी उनकी मदद नहीं कर पायेेंगे।
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