
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
वाराणसी. कोरोना संक्रमण की वजह से लगे लाॅक डाउन के चलते रुकी औद्योगिक और कारोबारी गतिविधियों का बनारस के बुनकर उद्योग पर भी बड़ा असर पड़ा। बीते साल मार्च के महीने से कारोबार में जो गिरावट आई उससे अब बुनकर उबर नहीं सके हैं। हालत ये है कि एक तरफ कच्चा माल महंगा हो गया है तो दूसरी ओर बाजार में खरीदार नहीं हैं। लागत बढ़ने के चलते साड़ियां महंगी हो गई हैं, जिससे खरीदार भी कम हुए हैं। अकेले बनारस में ही एक वसे डेढ़ लाख परिवार सीधे साड़ी कारोबार से जुड़े हैं। ऐसे में बुनकरों को बजट से उम्मीद है कि उनको तंगी से उबारने के लिये सरकार कुछ इंतजाम जरूर करेगी।
बनारस की साड़ियां पूरी दुनिया में मशहूर हैं। कहा जाता है कि बेहद खूबसूरत साड़ियां बनाने वाले शहर में हथकरघा और पावरलूम से बुनकरों के घरों के चूल्हे जलते हैं। कोरोना काल में इंडस्ट्री कुरी तरह से प्रभावित हुई। लाॅक डाउन खुलने के बाद कारोबार तो शुरू हुआ, कच्चा माल महंगा होने से लागत बेतहाशा बढ़ गई, जिससे धंधा बेहद मंदा चल रहा है। चाइना से आने वाला जो रेशम लाॅक डाउन में घटकर 2700 रुपये के रेट तक पहुंचा गया था वह अब बढ़कर 4200 से 4300 रुपये पर पहुंच गया है, ऐसे में लागत काफी बढ़ गई है। अगले तीन महीने तक शादियों का सीजन न होने से भी कारोबार में तेजी आती नहीं दिख रही। हर साल बुनकरों को इंतजार रहता है कि बजट में उनके लिये कुछ न कुछ सरकार की ओर से किया जाएगा। इस बार भी बुनकरों को उम्मीद है कि सरकार लाॅक डाउन से हुए नुकसान से उबरने में उनकी मदद करेगी और कारेाबार को गति देने के लिये कुछ न कुछ मंसूबे जरूर बनेंगे।
बुनकर बिरादराना तंजीम बारहों के सरदार हाशिम के मुताबिक काराेबार बुरी तरह प्रभावित है। बजट में किसी ऐसे कार्ड का ऐलान हो, जिससे बुनकरों को कच्चा माल सही रेट पर मिले। सस्ते रेट में धागा उपलब्ध हो। बुनकर जीएसटी और टैक्स देते हैं। सरकार को साड़ी कारोबार से अकेले बनारस से एक हजार करोड़ से उपर का राजस्व मिलता है। ऐसे में अगर बुनकरों की बेहतरी के लिये कोई ऐलान होता है तो सरकार का राजस्व भी बढ़ेगा। साड़ी कारोबारी अतीक अंसारी ने बताया कि फ्लैट रेट पर बिजली बुनकरों की बड़ी मांग है। सरकार तक हमारा प्रस्ताव पहुंच चुका है। पर अब तक इसपर कोई फैसला नहीं हुआ है। उम्मीद है कि हमारे प्रपोजल को सरकार मान लेगी। बता दें कि सरकार ने बुनकरों की बिजली फ्लैट रेट से हटाकर मीटर के हिसाब से कर दी है, जिसका बुनकर विरोध कर रहे हैं और काफी दिनों तक हड़ताल पर भी रहे। हालांकि सूत्रों के मुताबिक सरकर ने कुछ राहत के संकेत दिये हैं।
Published on:
27 Jan 2021 08:42 pm

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