वाराणसी. काशी के धरोहरों में शामिल ललिता घाट, जो अब विश्वनाथ कॉरिडोर का हिस्सा हो चुका है। योजना के मुताबिक यहीं से मां गंगा और बाबा विश्वनाथ का मिलन होगा। यही वो घाट होगा जहां से लोग काशी विश्वनाथ मंदिर तक जाएंगे। इसी घाट पर है ललिता गौरी का ऐतिहासिक मंदिर। चैत्र नवरात्र के छठवें दिन गौरी स्वरूपा जगत जननी ललिता गौरी के दर्शन-पूजन की मान्यता है। ऐसे में गुरुवार को माता रानी के इस विग्रह का पूजन करने के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ा।
मां ललिता गौरी का मंदिर गंगा के सुरम्य तट पर हैं। मुख्य द्वार पूरब दिशा में है। मंदिर में मां ललिता गौरी के अलावा भैरव जी, हनुमान जी और भगवान शंकर विराजमान हैं। मंदिर का ऊपरी हिस्सा मौनी बाबा के अखाड़े के रूप में जाना जाता है। इसी के पास पशुपतिनाथ का मंदिर है। माना जाता है कि माता रानी के दर्शन से न सिर्फ रोग व शोक से मुक्ति मिलती है बल्कि, सुख-सौभाग्य का वर भी प्राप्त होता है। ऐसे में ललिता घाट पर माता ललिता गौरी के दर्शन-पूजन के लिए भोर से ही लाइन लग गई थी। गंगा तट पर मंदिर होने के कारण लोगों ने गंगा स्नान पुण्य लाभ भी अर्जित किया।
वहीं शक्ति के उपासकों ने माता कात्यायनी देवी का दर्शन लाभ प्राप्त किया। सुबह से ही मां कात्यायनी के दर्शन को श्रद्धालु माता के दरबार पहुंचने लगे थे। मंदिर में भक्तो के आने का सिलसिला पूरे दिन जारी रहा। मां के श्री चरणों में धुप दीप नैवैद्य, नारियल, पुष्प अर्पित कर भक्तों ने आशीर्वाद ग्रहण किया। माता को हल्दी और कुमकुम भी चढाया गया। मान्यता है कि माता को पीली वस्तुएं पसंद हैं। पीली चीजें चढाने से सभी मनोकामनाए पूर्ण होती हैं। कहा जाता है कि माता को हल्दी और कुमकुम का लेपन करने से कुवारी कन्याओं को मन चाहा वर मिलता है।
