
उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर संपन्न हुआ छठ महापर्व
Chhath Puja 2023: नहाए खाए से शुरू हुआ लोक आस्था का पर्व सोमवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर संपन्न हुआ। संतान सुख, सुख-समृद्धि के लिए रखा जाने वाला यह पर्व अकेला है जिसमे साक्षात भगवान अर्थात सूर्य की पूजा होती है। रविवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर रात भर जलराशि में रहकर सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देते समय व्रती महिलाओं की आंखों में आंसू था कि वो छठी मईया का व्रत कर पाई। इस दौरान गंगा तट, सूर्य सरोवर, वरुणा तट और शहर के अनुय तालाबों और पोखरों के अलावा लोगों ने घरों में भी उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया और जमकर आतिशबाजी की।
सतयुग में राम-सीता ने रखा था महाव्रत
घाट पुरोहित ने बताया कि इस महाव्रत को सबसे पहले सतयुग में श्रीराम-सीता ने किया । महाभारत काल में कुंती ने सूर्य की आराधना की। द्रौपदी ने भी छठ पूजा की थी। इस पर्व को मनाने के पीछे कई कारण और मान्यताएं हैं जैसे छठ देवी सूर्य देव की बहन हैं और उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए जीवन के महत्वपूर्ण अवयवों में सूर्य व जल की महत्ता को मानते हुए, इन्हें साक्षी मान कर भगवान सूर्य की आराधना तथा उनका धन्यवाद करते हुए मां गंगा-यमुना या किसी भी पवित्र नदी या पोखर(तालाब) के किनारे यह पूजा की जाती है। इन सब मान्यताओं के साथ लोगों का विश्वास भी है जो इस पर्व को और भी बड़ा बना देता है।
जमकर हुई आतिशबाजी
सोमवार को सूर्य के उगने के इंतज़ार में व्रती महिलाओं ने मां गंगा की गोद में बिताया तो उनके साथ आये परिवार के लोगों ने घाट पर भोर में आतिशबाज़ी का लुत्फ़ उठाया। छठ की छटा से पूरी फिजा सराबोर है और हर दिल में यही एहसास है छठ मईया हमारी पुकार सुन लो, हमारी मनोकामना पूरी कर दो। कहते हैं छठ पर्व को मनाने की परंपरा आदिकाल से ही चली आ रही है और हमेशा होती भी रहेगी, क्योकि न ही छठ मईया का महत्ता कभी कम होगी और न ही इस महापर्व में हमारी आस्था।
Updated on:
20 Nov 2023 09:33 am
Published on:
20 Nov 2023 09:31 am
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