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समय से कराये बच्चों के दिल की बीमारी का इलाज

अत्याधुनिक तकनीक ने बनायी इलाज की राह आसान, जानिए बीमारी से जुड़ी खास बाते

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Devesh Singh

Jul 16, 2016

JP Hospital

JP Hospital


वाराणसी. बच्चों के दिल में छेद का समय से इलाज कराये। अत्याधुनिक तकनीक ने यह सुविधा दे दी है कि ऐसी बीमारी का समय से पता चल जाता है और चिकित्सकों से इलाज कराया जाये तो बीमारी हमेशा के लिए ठीक भी हो जाती है। यह बात शनिवार को जेपी अस्पताल की बाल हृदय रोग विशेषज्ञ डा.स्मिता मिश्रा ने एक तारांकित होटल में मीडिया से बात में दी।
उन्होंने कहा कि जेपी अस्पताल में बच्चो के हृदय रोग को ठीक करने के लिए नवीनतम तकनीक लगायी गयी है और देश के अन्य अस्पतालों से रेफर ऐसे बच्चों का भी इलाज किया जाता है जो अन्य कहीं पर नहीं हो पाता है। पूर्वांचल के लोगों को अब परामर्श के लिए महानगरों की दौड़ नहीं लगानी होगी। महमूरगंज स्थित गैलेक्सी अस्पताल में पूर्वांचल के मरीजों का यह सुविधा 17 जुलाई से मिलने लगेगी। यहां पर प्रत्येक माह के चौथे रविवार को डा.स्मृति मिश्रा ऐसे बच्चों की जांच कर उन्हें परामर्श देगी। उन्होंने बताया कि बच्चो में जन्मजात दिल की बीमारी भी होती है लेकिन इसको लेकर लोगों में जागरूकता का आभाव है। लोग सोचते हैं कि आयु बढऩे के साथ यह बीमारी ठीक हो जाती है, लेकिन ऐसा नहीं है जितनी जल्दी बच्चे का इलाज शुरू हो जाता है उतनी जल्दी ही बीमारी ठीक भी होती है। उन्होंने कहा कि मां के गर्भ में बच्चे के दिल में छेद हो जाने के बाद भी बच्चे को किसी तरह की दिक्कत नहीं होती है लेकिन जब बच्चे का जन्म होता है तो दिक्कत का पता चलता है। पेट में पल रहे बच्चे के दिल में ऐसी भी बीमारी होती है जिसका इलाज संभव नहीं होता है, ऐसे बच्चे को जन्म देने से रोक दिया जाना चाहिए।

छोटे बच्चों में बीमारी के लक्षण:- त्वचा, नाखून एवं होठ का रंग नीला होना, तेज सांस लेना व बच्चे को दुग्धपान करने में समस्य होनी, वजन न बढऩा, फेफड़ों में संक्रमण ऐसे लक्षण है जो हृदय की बीमारी की और इशारा करते हैं।

बड़े बच्चों में लक्षण:- सांसों का उखडऩा, व्यायाम करने में परेशानी व बेहोश हो जाना

तेजी से बढ़ रही किडनी रोग पीडि़तों की संख्या
जेपी अस्पताल के किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन डा.अमित देवड़ा ने बताया कि देश में मधुमेह व ब्लड प्रेशर के चलते किडनी रोगियों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। समय रहते हुए बीमारी का पता चल जाये तो किडनी को बचाया जा सकता है लेकिन आमतौर पर बीमारी का तब पता चलता है जब किडनी लगभग काम करना बंद कर देती है। डायलिसिस से अधिक दिनों तक मरीज को लाभ नहीं मिलता है, ऐसे में किडनी ट्रांसप्लांट ही ऐसा रास्ता बचता है जिससे मरीज लम्बा जीवन जी सकता है। उन्होंने कहा कि हमारे अस्पताल में अभी तक 50 लोगों का किडनी ट्रांसप्लांट किया गया है सभी स्वस्थ्य है इस तरह सफलता की दर शतप्रति है। इस अवसर पर गैलेक्सी अस्पताल के निदेशक डा.वीडी तिवारी भी उपस्थित थे।