
Chaitra Navratri 2023 : अष्टमी तिथि पर काशी में मंगला गौरी के दर्शन को उमड़े भक्त
वाराणसी। धर्म की नगरी काशी में चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि को भक्त मां मंगला गौरी के दर्शन कर रहे हैं। मां मंगलागौरी का प्राचीन और भव्य मंदिर काशी के पंचगंगा घाट के ऊपर स्थित है। मान्यता है कि भगवान् सूर्य ने इस मंदिर की स्थापना की है। मंगला आरती के बाद जब मां के दरबार के पट खोले गए तो पूरा मंदिर परिसर मां के जयकारे से गूंज उठा।
भगवान सूर्य ने किया स्थापित
मंदिर के महंत नारायण गुरु ने बताया कि यह मंदिर काशी के आनंदवन और कटिवन की चोटी पर स्थापित है। पुराणों में हैं कि इसी स्थान पर भगवान सूर्य ने तपस्या कि थी। उनका जो पसीना निकला वो किलना नदी के नाम से विख्यात है और नीचे पंचगंगा तीर्थ है। ऊपर पहाड़ की चोटी पर मां मंगला गौरी को भगवान सूर्य ने स्थापित किया था।
सौभाग्य और मंगल की प्रधान देवी
महंत नारायण गुरु ने बताया कि मां मंगला गौरी सौभाय और मंगल की देवी हैं। व्रती महिलाएं यहां नवरात्र में 9 दिन दर्शन को आती हैं। माता का दर्शन साल भर सौभागय कामना और मंगला कामना के लिए आती हैं यहां सभी की मनोकामना पूरी होती है। उन्होंने बताया कि अष्टमी का मान दो दिन होने के प्रचार की वजह से सप्तमी को ही अत्यधिक महिलाओं ने अष्टमी के मान में दर्शन किया है।
दर्शन मात्र से दूर होती है विवाह बाधा
उन्होंने बताया कि काशी के इस मंदिर में विवाह बाधा दर्शन मात्र से दूर हो जाती है। उन्होंने कहा कि मंगला गौरी के दर्शन के लिए 5 मंगल, 7 मंगल या 14 मंगल दर्शन करने वो भी अजोरा पाक यानी सावन, चैत और बैसाख पर विशेष तिथियों में दर्शन करने आती हैं और तीन महीने में यहां कुमकुम अर्चन होता है। ऐसे लोग जिनकी शादी नहीं हो रही वो दान करें, यह जप करवाएं या कुमकुम अर्चन करवाएं उनके विवाह बाधा हर हाल में दूर होगी ऐसी मान्यता है।
Published on:
29 Mar 2023 09:56 am
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