
भाजपा व सहयोगी दल के दिग्गज
डॉ अजय कृष्ण चतुर्वेदी
वाराणसी. 17वीं लोकसभा के लिए सात चरण में हो रहे चुनाव के तहत आधा चरण पूरा हो चुका है। अब महज तीन चरण शेष हैं। उसमें भी अंतिम दो चरण में महज पूर्वाचल की ही सीटें हैं। इन दो चरणो में कुल 27 सीटों पर मुकाबला होना है। इन सीटों में रोचक संघर्ष है। सबसे खास यह कि भाजपा के दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा इस बार दांव पर है। इसमें मुख्यमंत्री सीएम योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ महेंद्र नाथ पांडेय प्रमुख है। उधर बात करें सपा-बसपा गठबंधन की तो सपा मुखिया अखिलेश यादव, कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ राजेश मिश्र, अपना दल नेता अनुप्रिया पटेल हैं। इनमें से कुछ या तो खुद चुनाव मैदान में हैं तो कुछ चुनाव लड़ा रहे हैं। इन सब से ऊपर प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी खुद इसी पूर्वांचल की राजधानी के रूप में शुमार वाराणसी से मैदान में है। कहा तो यही जाता है कि मोदी करिश्मा के चलते ही बीजेपी ने 2014 में पूर्वांचल में अपना झंडा गाड़ा था। देखना यह भी होगा कि वह करिश्मा इस बार कितना कारगर साबित होता है।
छठा चरण– (12 मई) 14 सीट
सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, फूलपुर, इलाहाबाद, अंबेडकरनगर, श्रावस्ती, डुमरियागंज, बस्ती, संतकबीरनगर, लालगंज, आज़मगढ़, जौनपुर, मछलीशहर, भदोही
सातवां चरण– (19 मई) 13 सीट
महराजगंज, गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, बांसगांव, घोसी, सलेमपुर, बलिया, गाजीपुर, चंदौली, वाराणसी, मिर्जापुर, रॉबर्ट्सगंज
बता दें कि अंतिम सातवें चरण के चुनाव के लिए नाम वापसी की समय सीमा भी गुरुवार को खत्म हो चुकी है। इसी के साथ सभी सीटों पर प्रत्याशियों की तस्वीर साफ हो गई है। पूर्वांचल के सात जिलों की आठ सीटों के लिए अंतिम चरण में 19 मई को मतदान होगा। सबसे ज्यादा 26 प्रत्याशी वाराणसी और सबसे कम 9 प्रत्याशी मिर्जापुर सीट पर मुकाबला करेंगे। इन प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न भी आवंटित हो गया है। आइये जाने किस सीट पर कौन कौन से प्रत्याशी हैं अौर किसे कौन सा चुनाव चिह्न मिला है।
वाराणसी की बात करें तो कुल 26 प्रत्याशी मैदान में हैं। इनमें से भाजपा प्रत्याशी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। बनारस में मोदी को घेरने के लिए साझा विपक्ष का प्रत्याशी उतारने की सारी कवायद खत्म हो चुकी है। ऐसे में उन्हें दोबारा चुनौती देने के लिए कांग्रेस से अजय राय मैदान में हैं तो सपा-बसपा गठबंधन से कांग्रेस की मेयर पद की उम्मीदवार रहीं शालिनी यादव मैदान में हैं। हालांकि सपा ने बीएसएफ के बरखास्त जवाव तेजबहादुर यादव पर भी दांव लगाया था लेकिन उनकी दावेदारी को जिला निर्वाचन अधिकारी ने खारिज कर दिया है। ऐसे में देखना होगा कि नरेंद्र मोदी के खिलाफ कौन कितनी मजबूती से लड़ता है।
सीएम योगी आदित्यनाथ की जिन्होंने गोरखपुर सीट से लगातार पांच बार जीत हासिल की। अबकी बार वह मुख्यमंत्री हैं। एमएलसी हैं। लिहाजा उनकी सीट पर भाजाप ने भोजपुरी सिने स्टार रविकिशन को मैदान में उतारा है। यहां बता दें कि योगी आदित्यनाथ के यूपी का सीएम बनने के बाद खाली हुई सीट पर हुए उपचुनाव में योगी आदित्यनाथ सहित भाजपपा को सपा-बसपा ने मिल कर बड़ा झटका दिया था और सपा प्रत्याशी प्रवीण निषाद ने योगी आदित्यनाथ की सीट छीन कर सपा की झोली में डाल दी थी। बता दें कि गोरखपुर उपचुनाव से ही सपा-बसपा गठबंधन का जन्म हुआ था। सपा से गोरखपुर उपचुनाव जीतने वाले प्रवीण निषाद इस बार संत कबीर नगर से मैदान में है। अब यहां बीजेपी प्रत्याशी रवि किशन के मुकाबिल सपा से राम भुआल हैं तो कांग्रेस ने वरिष्ठ अधिवक्ता मधुसूदन तिवारी को मैदान में उतारा है। ऐसी स्थिति में योगी आदित्यनाथ की जिम्मेदारी है कि वह रवि किशन को जिता कर अपनी प्रतिष्ठा बचाएं।
वहीं फूलपुर की बात करे तो यहां से 2014 में पहली बार सिराथू के विधायक केशव प्रसाद मौर्य ने जीत हासिल की थी। बाद में वह बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष भी बने। लेकिन 2017 में यूपी में बीजेपी के प्रचंड बहुमत से जीत दिलाने के बाद वह सीएम पद के प्रबल दावेदार बने लेकिन यह पद योगी आदित्यनाथ को मिला और वह डिप्टी सीएम बने। केशव के डिप्टी सीएम बनने के बाद खाली हुई सीट पर हुए उपचुनाव में वह भी अपनी सीट को बचा न सके और सपा ने यहां से भी बाजी मारी। सपा प्रत्याशी नागेंद्र सिंह पटेल ने बीजेपी उम्मीदवार वाराणसी के मोयर रह चुके कौशलेंद्र को मात दी। अबकी बार बीजेपी ने जिला पंचायत अध्य़क्ष केशरी देवी को टिकट दिया है। ऐसे में केशव की बड़ी जिम्मेदारी केशरी को जिता कर उपचुनाव में खोई सीट फिर से हासिल करना है।
गाजीपुर से खुद मैदान में रेल व संचार राज्य मंत्री मनोज सिन्हा। मनोज सिन्हा इस सीट पर पूर्व में 1996, 99 और 2014 में जीत चुके है। लेकिन इस बार उन्हें टक्कर दे रहे हैं बसपा प्रत्याशी अफजाल अंसारी जो मनोज को 2004 में हरा चुके हैं। ऐसे में सपा-बसपा गठबंधन से अफजाल तो कांग्रेस से अजीत प्रसाद कुशवाहा टक्कर दे रहे हैं।
बात की जाए चंदौली की तो 2014 में यहां से डॉ महेंद्र नाथ पांडेय ने जीत हासिल की थी। वह केंद्र में मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री भी रहे। फिर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष का चुनौतीपूर्ण पद संभाला। अब वह फिर से चुनाव मैदान में हैं। यहां से सपा-बसपा गठबंधन से सपा ने संजय चौहान को मैदान में उतारा है। इस लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं ने शुरूआत में विऱोध भी जताया था। अब मतदान में उसका कितना असर पड़ेगा वह तो वक्त बताएगा, लेकिन मुकाबला आसान नहीं है डॉ महेद्र के लिए। कारण यहां से कांग्रेस ने बाबू सिंह कुशवाहा की पत्नी शिवकन्या को उतारा है जो 2014 में गाजीपुर से सिन्हा को कड़ी टक्कर दी थी।
इलाहाबाद (प्रयागराज) की बात की जाए तो यहां से बीजेपी ने डॉ रीता बहुगुणा जोशी को उतारा है। अब नंद गोपाल नंदी, उनकी पत्नी मेयर अभिलाषा गुप्ता और सिद्धार्थ नाथ सिंह की बड़ी जिम्मेदारी है डॉ बहुगुणा को विजयी बनाने की।
उधर देवरिया के सांसद कलराज मिश्र की प्रतिष्ठा भी दांव पर है। उन पर जिम्मेदारी है पार्टी प्रत्याशी रमापति राम त्रिपाठी को जिताने की।
अब अगर बात करें अपना दल की तो मिर्जापुर से एक बार फिर से केंद्रीय स्वास्थ्य कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल मैदान में है। वहां उन्हें कांग्रेस प्रत्याशी ललितेशपति त्रिपाठी और गठबंधन प्रत्याशी रामचरित्र निषाद कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
राबर्ट्सगंज (सुरक्षित सीट) से बीजेपी ने पकौड़ी लाल कोल को मैदान में उतारा है। वह 2009 में यहां से सासंद रहे। इन्हें सपा-बसपा गठबंधन से भाई लाल कोल तो कांग्रेस से भगवती प्रसाद चौधरी से टक्कर मिल रही है।
बलिया में 10 प्रत्याशियों के बीच मुकाबला है। बीजेपी से वीरेंद्र सिंह मस्त मैदा में है। बता दें कि मस्त को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद बलिया के सांसद भरत सिंह समर्थकों ने काफी विरोध किया था। अब उस विरोध का कितना असर होता है या सब कुछ सामान्य हो चुका है, यह तो 23 मई को परिणाम आने पर ही पता चलेगा। लेकिन यहां भाजपा को सपा से सनातन पांडेय कड़ी टक्कर देते नजर आ रहे हैं। इनके अलावा भाजपा के सहयोगी रहे सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने विनोद तिवारी को मैदान में उतारा है। वहीं जनता क्रांति पार्टी से सीमा चौहान ने भी दावेदारी पेश की है। निर्दल ओम प्रकाश भी किसी से कम नहीं।
सलेमपुर में 15 उम्मीदवार हैं। यहां भाजपा ने जहां रवींद्र कुशवाहा को मैदान में उतारा है तो बसपा ने आरएस कुशवाहा को। वहीं कांग्रेस ने वाराणसी के सासंद रह चुके डॉ राजेश मिश्र पर दांव लगाया है। यहां त्रिकोणीय संघर्ष दिख सकता है।
घोसी में 15 प्रत्याशी मैदान में हैं। इसमें भाजपा से हरिनरायन, कांग्रेस से बालकृष्ण तो अतुल कुमार सिंह उर्फ अतुल राय बसपा से और भाकपा से अतुल कुमार सिंह उर्फ अतुल कुमार सिंह अनजान मैदान में है।
आजमगढ़ की बात करें तो पूर्वांचल की एक मात्र सीट है जहां 2014 में भी मोदी लहर काम नहीं कर पाई थी और तत्कालीन सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने जीत हासिल की थी। इस बार मौजूदा सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव मैदान में हैं जिनके खिलाफ भाजपा ने भोजपुरी सिने स्टार निरहुआ को मैदान में उतारा है।
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Published on:
03 May 2019 01:40 pm
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