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Mahashivratri Festival 2020: शिव तांडव स्त्रोतम, कवियों के काव्य फुहार और फूलों की होली में सराबोर हुए भक्त

-काशी में पहली बार शुरू हुआ महाशिवरात्रि महोत्सव-राजघाट पर पहली निशा में दर्शकों ने जमकर उठाया लुत्फ

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Mahashivaratri festival

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वाराणसी. महाशिवरात्रि के मौके पर शिव की नगरी काशी में शिव तांडव स्त्रोतम, कवियों के काव्य फुहार और फूलों की होली संग शुरू हुआ महाशिवरात्रि महोत्सव। बता दें कि यह पहला मौका है जब काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर के बाहर ऐसे भव्य महोत्सव की शुरूआत हुई है। इस महोत्सव के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 50 लाख रुपये आवंटित किए हैं।

महाशिवरात्रि के मौके पर काशी आने वाले तीर्थ यात्रियों, बाबा के भक्तों को काशी की विरासत और संस्कृति से रू-ब-रू कराने के उद्देश्य से इस महोत्सव का आगाज हुआ है। इस तीन दिवसीय आयोजन की प्रथम संध्या में गुरुवार को राजघाट पर विशेष रूप से भगवान शिव पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए।

थीम सांग के रूप में गायक प्रणव सिंह गीतकार अवधेश विमल बावरा संगीत अनिल रमन, कलाकार विशाल कृष्णा की ओर से भगवान शिव पर आधारित शिव तांडव स्त्रोतम का कत्थक नृत्य, कलाकार अमलेश शुक्ला द्वारा शिव भजन का गायन, मथुरा से आई गीतलि शर्मा और उनके सहयोगी कलाकारों के द्वारा ब्रज की फूलों की होली की मोहक प्रस्तुतियां हुईं। इसके उपरांत दूसरे चरण में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन सुनील जोगी के संचालन में हुआ।

IMAGE CREDIT: patrika

कवि सम्मेलन में सरदार मनजीत सिंह, राजेश चेतन, अनिल चौबे, प्रख्यात मिश्रा, सुरेश अवस्थी, डॉ सुमन दुबे के अलावा दमदार बनारसी एवं सांड बनारसी ने काव्यपाठ किया।

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उत्तर प्रदेश के पर्यटन, संस्कृति, धर्मार्थ कार्य एवं प्रोटोकॉल राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ नीलकंठ तिवारी ने गुरुवार को गंगा के तट राजघाट पर आयोजित "महाशिवरात्रि महोत्सव" का दीप प्रज्वलित कर विधिवत आगाज किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि अयोध्या में 2017 से दीपोत्सव, ब्रज में रंगोत्सव होली उत्सव का कार्यक्रम बड़े पैमाने पर होता है। इसी श्रृंखला में बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में महाशिवरात्रि के पर्व पर बड़ा एवं भव्य कार्यक्रम हो रहा है। इसके लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात करने पर उन्होंने इसके लिए तत्काल सहमति जताते हुए कहां की काशी में महाशिवरात्रि के पर्व पर बड़ा एवं समारोह के रूप में शिवत्व के रूप में शिवमय कार्यक्रम कराया जाए। मंत्री डॉक्टर नीलकंठ तिवारी ने कहां की काशी का मस्त मौला स्वरूप एवं काशी की सांस्कृतिक विरासत महाशिवरात्रि महोत्सव के दौरान लोगो को देखने को मिलेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम एक अद्भुत कार्यक्रम बनेगा।

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महाशिवरात्रि महोत्सव के द्वितीय दिवस पर शुक्रवार को कत्थक एवं भजन के साथ-साथ तृप्ति शाक्या एवं प्रेम प्रकाश दुबे के द्वारा भजन की प्रस्तुति की जाएगी। तृतीय दिवस पर प्रख्यात भजन गायक अग्निहोत्री बंधुओं के साथ-साथ सुखदेव मिश्र वादन में एवं गणेश मिश्र द्वारा गायन की प्रस्तुति की जाएगी।

इसके अलावा 23 फरवरी, 2020 को राजघाट पर बोट फेस्टिवल का आयोजन विभिन्न प्रायोजकों के साथ किया जायेगा। इस बोट फेस्टिवल के अंतर्गत 23 फरवरी को प्रातः 9:00 बजे हस्त 40 नौकाओं की एक रेस रविदास घाट से प्रारंभ होगी।

बताते चलें कि वैसे तो देश के कोने-कोने में हिंदू आस्थावान महा शिवरात्रि का पर्व मनाते हैं, लेकिन भोले की नगरी काशी में बाबा भोले के विवाह का पर्व इसलिए भी खास हो जाता है क्योंकि काशी में द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सर्वोपरि श्री काशी विश्वनाथ विराजमान हैं। यही वजह है कि शिवरात्रि के पावन मौके पर पूरी की पूरी काशी नगरी हर-हर महादेव के उद्घोष से गूंज उठती है। पूरे वर्ष में सिर्फ इसी एक दिन बाबा काशी विश्वनाथ का दर्शन पूजन और जागरण पूरी रात्रि जारी रहता है। काशी में महाशिवरात्रि का विशेष महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि भगवान भोले यहां खुद श्मशान में विराजमान हैं और यहां खुद वे तारक मंत्र भी देते हैं। सभी ज्योतिर्लिंग भोग, स्वर्ग, शांति, यश सम्मान देते हैं, लेकिन काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग जन्तु को भूलोक में फिर न आने की अंतिम इच्छा को बाबा विश्वनाथ तारक मंत्र देकर पूर्ण करते हैं।

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