
कोरोना संक्रमण
वाराणसी. भारत में कोरोना संक्रमण अब खात्मे की ओर है। अब यहां दूसरी या तीसरी लहर जैसी स्थिति नहीं आने वाली। दुनिया के किसी कोने में चाहे कोरोना को कोई नया वैरिएंट भी आ जाए भारत सुरक्षित रहेगा। ये दावा है बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के जंतु विज्ञान विभाग के प्रोफेसर, कोविड विशेषज्ञ प्रो ज्ञानेश्वर चौबे का। पत्रिका से बातचीत में उन्होंने अपने शोध आधारित निष्कर्ष साझा करते हुए ये बात कही।
भारत में बड़ी तादाद में कोरोना का नेचुरल इंफेक्शन कोरोना वायरस के निष्तेज होने का बड़ा कारण
प्रो चौबे ने कहा कि कोरोना वायरस के निस्तेज होने का सबसे बड़ा कारण भारतवासियों के नेचुरल संक्रमण है। भारत के अलावा अन्य किसी देश में इतने बड़े पैमाने पर नेचुरल इंफेक्शन नहीं हुआ। ऐसे में पहली और दूसरी लहर के दौरान जिस तरह से देश की बड़ी आबादी नेचुरल संक्रमण का शिकार हुई उसने हमसे बहुते करीबी लोगों को जरूर छीना पर बहुत बड़ी आबादी यानी 90 फीसद लोग संक्रमित हुए और उससे उबर कर बाहर आ गए। ऐसे लोगों के शरीर में कोरोना वायरस से लड़ने की रोग प्रतिरोधक क्षमता तेजी से विकसित हुई। यही वजह है कि तीसरी लहर में हमें दूसरी लहर जैसी खतरनाक स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा। अब तीसरी लहर में वो लोग ही संक्रमित पाए गए जो पूर्व की दो लहर में कोरोना संक्रमण से बच गए थे। अब इतनी बड़ी तादाद में लोगों के कोरोना संक्रमित हो कर ठीक होने के बाद कोरोना वायरस अब अब उन पर दोबारा हमला नहीं करेगा।
टीका से ज्यादा कारगर बड़ी तादाद में लोगों का नेचुरली संक्रमित होना
बृहद टीकाकरण के मुद्दे पर प्रो चौबे ने कहा कि किसी भी महामारी से बचाव के लिए टीकाकरण ठीक बात है। लेकिन जहां तक भारत वर्ष का सवाल है तो यहां कोरोना से नेचुरली संक्रमित होना और उससे बचाव सबसे बड़ा कारण है कोरोना संक्रमण के निष्प्रभावी होने का। बताया कि टीकाकरण तो अमेरिका में हमसे ज्यादा हुआ। वहां बड़ी तादाद में लोगों को टीके की चौथी डोज भी लग चुकी है बावजूद इसके अभी भी बड़ी तादाद में लोग कोरोना से संक्रमित हो रहे हैं।
किसी महामारी में ऐसे ही गिरता है संक्रमण दर
प्रो चौबे ने बताया कि पूर्व के महामारी के अध्ययन से भी यही पता चलता है कि जितनी तेजी से नेचुरल संक्रमण होता है और लोग तेजी से महामारी के शिकार होते है उसी अनुपात में वायरस निष्तेज होता जाता है। ऐसा ही भारत वर्ष में हुआ। कोरोना की तीसरी लहर में देश की करीब 90 फीसद आबादी इसकी चपेट में प्राकृतिक रूप से आई। इसमें बड़े पैमाने पर लोग काल के गाल में समा गए। लेकिन इससे जो ठीक हुए वो ही इसके खात्मे का कारण बने। अब अगर कोरोना का कोई नया वैरिएंट आता भी है तो बाकी बचे 10 फीसद लोगों तक ही सीमित रहेगा। जो लोग एक बार कोरोना के डेल्डा वैरिएंट से संक्रमित हो चुके हैं उन्हें ये दोबारा संक्रमित नहीं कर पाएगा।
वाराणसी में तीसरी लहर का पीक खत्म
प्रो चौबे ने बताया कि वाराणसी में अब कोरोना का पीक खत्म हो चुका है। यह पीक ऑवर कुल 14 दिनों तक रहा। इस दौरान जिले में कुल 8530 केसेज आए। जिले में कोरोना का पीक 12 जनवरी से 26 जनवरी तक रहा। 7 जनवरी से 27 जनवरी तक यानि कि 20 दिन में कोरोना के कुल 9177 मामले पाए गए। तीसरी लहर में अब तक 10,384 लोग पॉजिटिव आए हैं।
सप्ताह भर में ही सीमित हो गया पीक
कोविड मामलों के विशेषज्ञ प्रो चौबे ने अपने शोध के आधार पर बताया कि कोरोना संक्रमण की अवधि और पीक को समझने के लिए साप्ताहिक आंकड़ों का अध्ययन किया गया। इन साप्ताहिक केसेज में ही पीक का अनुमान लग गया। 27 जनवरी को वाराणसी में 201 नए केस मिले, जबकि 10 जनवरी को 228 केस। इसके बीच का समय ही पीक ऑवर रहा। कहा कि वाराणसी में कोरोना का पीक टाइम 17 जनवरी से 24 तक रहा। सर्वाधिक केस इस काल में मिले।
रिकवरी बता रही कि इंफेक्शन बहुत हाई था
प्रो. चौबे ने बताया कि वाराणसी में इतनी जल्दी केसेज का कम होना बताता है कि ओमिक्रॉन वैरिएंट का इंफेक्शन रेट बहुत हाई था।, क्योंकि दूसरी लहर में डेढ़ महीने से ज्यादा का समय लग गया था। पीक ऑवर 28 दिन तक चला था, जबकि तीसरी लहर में हाई इंफेक्शन महज 2 सप्ताह तक चल सका। इसके बाद वायरस कमजोर पड़ने लगा। यह सर्वमान्य है कि जो वायरस जितना तेजी से फैलता है उतनी ही तेजी से उसका ग्राफ नीचे आता है। ओमिक्रॉन के साथ हुआ वही।
Published on:
28 Jan 2022 01:04 pm
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