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फल बाजार पर भी कोरोना की मार, खत्म हुई 80 फीसदी दुकानदारी

कोरोना वायरस का सबसे बड़ा प्रभाव मरीजों के स्वास्थ्य के साथ ही बाजार पर भी पड़ रहा है।

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फल बाजार पर भी कोरोना की मार, खत्म हुई 80 फीसदी दुकानदारी

वाराणासी. कोरोना वायरस का सबसे बड़ा प्रभाव मरीजों के स्वास्थ्य के साथ ही बाजार पर भी पड़ रहा है। बड़े कारोबारियों के अलावा छोटे कारोबारी और दुकानदार पूरी तरह से मायूस हैं। तकरीबन 20 दिनों से बाजार से रौनक पूरी तरह से गायब है। जिन दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ लगी होती थी, खरीददारी के लिए उन्हें काफी समय इंतज़ार करना पड़ता था। अब उन्हीं दुकानों पर दुकानदार घण्टों तक ग्राहकों के आने का इंतज़ार कर रहे हैं हाल ये है कि कहीं कहीं इक्का दुक्का ग्राहक आ रहे हैं तो कोई बिना खरीददारी किए घर वापस चला जा रहा।

कोरोना वायरस के संक्रमण और उसके रोकथाम को लेकर लगातार बढ़ती जागरूकता के बीच आज पत्रिका ने बनारस के मशहूर फलमंडी का जायजा लिया। यहां जाकर देखा तो सौ से अधिक दुकानों से सजी फलों की मंडी के बीच मुश्किल से 10 या 15 खरीददार नजर आए। ज्यादातर दुकानों पर कोई भी न दिखा। पत्रिका से बातचीत में फल कारोबारी विजय मौर्य ने कहा की कोरोना से 80 फीसदी से अधिक मार्केट डाउन कर दिया। उन्होंने कहा के हम जहां हर रोज आठ से 10 क्विंटल फलों को छोटे मझोटे दुलानदारों को हर रो बेच देते थे। आज हालात ये है कि 2 क्विंटल फल बेसीज पाना भी मेरे लिए बड़ी बात है।

वहीं मोहम्मद सिद्दीकी कहते हैं कि महीने की शुरुआत से ही ग्राहकों का आना कम होने लगा था। जब होली के पहले से बाजार में गिरावट ज्यादा हुई जो अब लगातार बढ़ती जा रही है। नारायण पटेल कहते हैं कि किस तरहबसे कोरोना को लेकर खौफ है उससे तो यही लग रहा है की एक दो महीने हमें संकट के दौर से गुजरना होगा। हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई की अगर सबकुछ ठीक रहा तो नवरात्रि से फलों का बाजार तेज हो सकता है पर इसकी संभावना कम है।

दाम कम फिर भी बिक्री न के बराबर

फलों के व्यापारी कहते हैं कि थोक तो छोड़िए हम फुटकर में भी दाम गिराकर बेचने को राजी है ताकि लागत निकल जाए। पर हालात ये है कि माल निकलना मुश्किल है। रिजवान कहते हैं कि जो सेब, अनार, अंगूर, केला तरबूज, अनानास, मौसमी, सन्तरा समेत सबबी फलों के दाम कम हो गए हैं पर खरीददारों का दर्शन दुर्लभ है। इन्हें चिंता है कि यही हाल रहा तो आने वाला समय और मुश्किल भरा होगा।

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