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आयुर्वेदिक वैज्ञानिकों का दावाः कैंसर के इलाज में असरकारक है गोमूत्र का अर्क

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के वैदिक विज्ञान केंद्र में चल रहे भारतीय गाय, कृषि तथा समग्र स्वास्थ्य विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी में आए आयुर्वेद से जुड़े वैज्ञानिकों का मत है कि गौ वंश की रक्षा और उससे मिलने वाली हर चीज स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद है। यहां तक गौ मूत्र भी स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। जटिल से जटिल से रोगों के इलाज में ये सहायक है। यहां तक कि कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी में भी गो मूत्र फायदेमंद है।

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कैंसर के इलाज में असरकारक है गोमूत्र का अर्क

कैंसर के इलाज में असरकारक है गोमूत्र का अर्क

वाराणसी. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के वैदिक विज्ञान केंद्र में चल रही भारतीय गाय, कृषि तथा समग्र स्वास्थ्य विषयक तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगष्ठी में देश के कोने-कोने से पधारे आयुर्वेदिक वैज्ञानिकों का मत है कि हर हाल मे गौवंश की रक्षा करना इंसानी जीवन के लिए लाभप्रद है। गौ माता का दूध तो अमृत है ही, गो मूत्र भी घातक जानलेवा बीमारियों के इलाज में सहायक है।

कैंसर के इलाज में गोमूत्र का अर्क सहायक

देशी गाय के गोमूत्र का अर्क कैंसर जैसी खतरनाक और जानलेवा बीमारी के इलाज में बहुत कारगर है। ये कहना है वैद्य नंदिनी भोगराज का। संगोष्ठी के तकनीकी सत्र को संबधित करते हुए वैद्य नंदिनी भोगराज ने बताया कि 10 हजार कैंसर रोगियों पर देशी गाय के गो मूत्र का अर्क का प्रयोग किया गया। उन्होंने बताया कि जिन कैंसर रोगियों की शल्य चिकित्सा हो चुकी थी उन्हें जब गो मूत्र का अर्क दिया गया उनमें ट्यूमर की जटिलता दोबारा नहीं देखने को मिली। आयुर्वेदिक वैज्ञानिकों ने बताया कि गोमूत्र के अर्क से दवाओं का प्रभाव बढ़ने के साथ-साथ शरीर की कैंसर से लडऩे की क्षमता भी बढ़ती है। वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआइआर) की प्रयोगशाला ने इसका पेटेंट अब अमेरिकी पेटेंट कार्यालय से हासिल भी कर लिया है। इस मौके पर प्रो आरएस चौहान ने काऊपैथी के वैज्ञानिक प्रमाण भी प्रस्तुत किए। इसके अलावा प्रो जीएस तोमर ने भी गोमूत्र की उपयोगिता के बारे में विस्तार से बताया।

दुनिया के 50 देशों ने संरक्षित किया है गोवंश को

इस संगोष्ठी में नागपुर से आए गौ विज्ञान अनुसंधान केंद्र, देवलापार के समन्वयक सुनील मानसिंह ने बताया कि दुनिया के 50 से अधिक देशों में भारतीय नस्ल की गायों को संरक्षित किया गया है। यूपी की गंगातीरी गाय को तो विवदेशों में ब्राह्मण ब्रीड के रूप में मान्ता मिली है। बताया कि अमेरिका और यूरोपी देशों में एक करोड़ से अधिक भारतीय नस्ल की गायों को संरक्षित व संवर्धित किया गया है।