
Dance Music Festival at Navsadhana Kala Kendra varanasi
वाराणसी. संगीत और नृत्य का संगम जब महोत्सव बन जाता है तब एक सतरंगी संसार का सृजन होता हैं। यह कहना है मुख्य अतिथि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय मंच एवं कला संकाय (कथक) की विभागाध्यक्ष डॉ विधि नागर का। वह सोमवार को नवसाधना कला केन्द्र के मिलन हाल में आयोजित 20वें नृत्य संगीत महोत्सव-2019, अंतर्जनपदीय अंतरविद्यालयीय प्रतियोगिता के उद्घाटन समारोह के अवसर पर कलासाधकों को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि सुर-लय और ताल हमें तृप्त करते है। कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि द्वारा दीप प्रज्ज्वलन व प्रार्थना भजन से हुआ।
ताल दादरा राग धानी में निबद्ध भक्ति रचना जीवन देने वाले तेरी जय हो से सभी को भक्ति रस से सराबोर कर दिया। इसे नवसाधना के कलासाधक विकास, प्रकाश, दीपक, ऋत्विक, लक्ष्मी व प्रतिभा ने प्रस्तुत किया। तबले पर प्रो. राकेश एडविन ने व हारमोनियम पर प्रज्ज्वल ने संगत किया। संगीत संयोजन गोविन्द वर्मा ने किया।
नवसाधना की कलासाधिकाओं ने तमिल गीत पर भरतनाट्यम की शास्त्रीय विधा में निबद्ध प्रार्थना नृत्य प्रस्तुत किया। इसे अरुण, नेहा, प्रिया, सोनम, शेली, पूजा, अर्चना, सलमा, रुचिका, निकिता, अर्नित, जयंति, हीना, गीता, अनीशा, अनुष्का ने प्रस्तुत किया। अंग संचालन और मुद्राओं से सभी ने ईश्वर, गुरु और अतिथियों की वंदना की। भरतनाट्यम की पारंपरिक शास्त्रीय प्रकृति पर आधारित नृत्य का संयोजन प्रो. रोस्मा रुबा ने किया।
प्रतियोगिता के नियमों को डॉ. रामसुधार सिंह ने विस्तार से बताया। प्रतियोगिता में एकल गायन, समूह गायन, एकल शास्त्रीय नृत्य, समूह लोक नृत्य और एकल वादन शामिल थे।
भरतनाट्यम के साधक रोशन, अनुराग, सुमिता, सोनिया, फिलोमिना, अंकिता, एक्सीना, अस्मिता, अंजना, डेविड, फ्रांसिस्का, नैंसी, विंसिका, निशा, प्रीति, सपना व सुप्रिया ने राग कुण्डला वारालि, ताल आदि में निबद्ध तिल्लाना प्रस्तुत कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। बालमुरलीकृष्ण के कर्नाटिक संगीत संयोजन का नृत्य संयोजन प्रो. ए. रॉबिन ने किया।
जय किशन, प्रकाश, दीपक, विकास, अभिषेक, प्रज्ज्वल, मोहित दास, मनीष यादव और निशी, शशि, सोनम, और रिया के द्वारा लाइव गाए गए बंगला लोक गीत बसंतो बौहीलो सखी, कोकिला डाकिले रे... गीत पर कलासाधकों ने बंगला लोकनृत्य प्रस्तुत कर बसंत बहार की खुशबू और रंगों से सभी को सराबोर कर दिया। प्रो. नेहा केसरी के नृत्य संयोजन में इसे मंच पर अरुण, नेहा राणा, रोज, प्रिया, पूजा, सलमा, निशा, मेरी, रेशमा, श्रेया व दयामणि ने प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं। मेले और बसंत के रंगों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। सारंगी पर अनीष मित्रा, बांसुरी पर मनीष, तबले पर अनंग गुप्ता ने संगत किया।
समापन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वाराणसी डीआरडीए के प्रोजेक्ट निदेशक उमेशमणि त्रिपाठी ने विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया। उन्होंने कहा कि संगीत है तो संस्कृति है। उन्होंने विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए कई टिप्स दिए।
नवसाधना कला केन्द्र के निदेशक डॉफादर विल्फ्रेड मोरस ने विभिन्न विद्यालयों से आए कलासाधकों की प्रतिभा को मौका देने और उन्हें आगे बढ़ाते रहने की बात कही। उन्होने कहा कि कलाकार के लिए एक सच्ची सफलता उसकी साधना से प्रकट होती है। उन्होंने सभी अतिथियों को अंगवस्त्र व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
स्वागत साहित्यकार डॉ रामसुधार सिंह ने किया। महोत्सव का संचालन डॉ रामसुधार सिंह व नवसाधना के कलासाधक एक्सिना, अर्चना व जयंति ने किया। धन्यवाद नवसाधना के प्राचार्य डॉ फादर विल्फ्रेड मोरस ने ज्ञापित किया।
इस मौके पर फादर सीआर जस्टी, फादर सुनील मथाइस, सिस्टर रोज़ली, सिस्टर संगीता, सिस्टर हेमलता, सिस्टर अगाथा सूरज, राकेश एडविन, डॉ भुवनेश्वर तिवारी, कामिनी मोहन पाण्डेय, गोविन्द वर्मा, रोस्मा रुबा, ए. रॉबिन, अनंग गुप्ता समेत कलाप्रेमी मौजूद रहे।
साधना की चमक से लगी पुरस्कारों की झड़ी
-96 बाल कलासाधकों ने लहराया परचम
-गायन-वादन व नृत्य के क्षेत्र में उभरे कई सितारे
इस 20वें नृत्य संगीत महोत्सव-2019 में बाल कलासाधकों ने अपनी प्रतिभा का अप्रतिम प्रदर्शन किया। प्रतिभागियों के उम्दा कला प्रदर्शन को तीन श्रेणियों में करतल ध्वनि से विजेता घोषित किया गया। पुरस्कार पाने वाले कलाकारों के प्रोत्साहन में देर तक तालियां की गड़गडाहट गूंजती रहीं। इस वर्ष कुल 96 बाल कलासाधकों ने पुरस्कार पाकर साधना का परचम लहराया। सम्पूर्ण प्रतियोगिताओं में सबसे अधिक पुरस्कार पाकर सनबीम भगवानपुर चैम्पियन बना। सनबीम स्कूल रंग बिरंगे परिधानों में सजे नन्हें कलाकारों द्वारा प्रस्तुत कथक, भरतनाट्यम, पंजाबी भांगड़ा, डांडिया, राजस्थानी कालबेलिया, मयूर व झूमर नृत्य ने पूरे देश की लोक व शास्त्रीय कला का दर्शन कराया। कई कलाकारों ने देश भक्ति के भावों को मंचित कर कर्मठता के लिए दर्शकों को ललकारा। कलाकारों ने शिव वंदना, दुर्गा वंदना, पारंपरिक कथक व भरतनाट्यम नृत्य के साथ समापन राधा-कृष्ण भाव नृत्य से किया।
परिणाम
एकल व समूह गायनः-
जूनियर वर्ग (एकल गायन) छठवीं से नौवीं वर्ग में प्रथम स्थान पर सनबीम स्कूल भगवानपुर की विदेही निमगांवकर, द्वितीय स्थान पर सेंट जाॅस स्कूल मड़ौली की अंशिका सिंह और तृतीय स्थान पर सनबीम स्कूल लहरतारा की समृद्धि सिंहानिया रहीं।
सीनियर वर्ग (एकल गायन) में दसवीं से 12वीं में प्रथम स्थान पर सनबीम स्कूल भगवानपुर की डालिया मुखर्जी, द्वितीय स्थान पर सेंट जाॅस स्कूल मड़ौली की प्राप्ति पुराणिक और तृतीय स्थान पर संत अतुलानंद रेजिडेंसियल एकेडमी होलापुर के गौरव प्रताप सिंह रहे।
इसी प्रकार जूनियर वर्ग में (समूह गायन) में प्रथम स्थान पर सनबीम स्कूल भगवानपुर व द्वितीय स्थान पर सेंट जाॅस स्कूल, मड़ौली, तृतीय स्थान पर सनबीम स्कूल वरुणा रहा।
सीनियर वर्ग (समूह गायन) में सनबीम स्कूल भगवानपुर को प्रथम, सनबीम सनसिटी स्कूल, करसड़ा को द्वितीय और सनबीम स्कूल लहरतारा को तृतीय स्थान मिला।
एकल शास्त्रीय व समूह लोक नृत्यः-
जूनियर वर्ग से भारतीय शास्त्रीय (एकल नृत्य) में प्रथम स्थान पर सनबीम स्कूल भगवानपुर की रिशा नंदी को पहला व द्वितीय स्थान पर जीवनदीप पब्लिक स्कूल चांदमारी की अनुष्का सिंह और तीसरे स्थान पर सनबीम स्कूल लहरतारा की वैष्णवी रहीं।
सीनियर वर्ग के (एकल शास्त्रीय नृत्य) में प्रथम स्थान पर सनबीम स्कूल, भगवानपुर की सुष्मिता सेन, व द्वितीय स्थान पर सनबीम सनसिटी की अदिती अम्बे, तृतीय स्थान पर सनबीम स्कूल मुगलसराय की निशा रानी मराण्डी रहीं।
जूनियर वर्ग से ही (समूह लोक नृत्य) में प्रथम स्थान पर सनबीम स्कूल भगवानपुर, दूसरे स्थान पर सनबीम सनसिटी करससड़ा, और तीसरे स्थान पर सनबीम स्कूल व अन्नपूर्णा रहा।
सीनियर वर्ग से (समूह लोक नृत्य) में प्रथम स्थान पर सनबीम भगवानपुर, द्वितीय स्थान पर सनबीम लहरतारा और तृतीय स्थान पर संत अतुलानंद रेजिडेशियल एकेडमी की टीम रहीं।
स्वर वाद्य व ताल वाद्यः-
जूनियर वर्ग से (स्वर वाद्य) में सनबीम स्कूल भगवानपुर के आर्यदीप को पहला और डालिम्स सनबीम स्कूल रोहनिया के देवेश कुमार सिंह को दूसरा व सनबीम स्कूल भगवानपुर के ही शबद त्रिपाठी को तीसरा स्थान मिला।
सीनियर वर्ग से (स्वर वाद्य) में सनबीम स्कूल भगवानपुर के शुभकांत साहू को पहला, सनबीम सनसिटी करसड़ा के ईशान पटेल को दूसरा और सनबीम स्कूल लहरतारा के अच्युतानंद को तीसरा स्थान मिला।
जूनियर वर्ग से (ताल वाद्य) में सनबीम स्कूल भगवानपुर के विवेक यादव को पहला, सनबीम सनसिटी करसड़ा के अथर्व मिश्र को दूसरा व सनबीम भगवानपुर के केशव अग्रवाल को तीसरा स्थान मिला।
सीनियर वर्ग से (ताल वाद्य) में सनबीम स्कूल भगवापुर के शांतनु सेन को पहला, सनबीम सनसिटी करसड़ा के करण वर्मा को दूसरा और सनबीम भगवानपुर के सौरभ त्रिपाठी को तीसरा स्थान मिला।
प्रतियोगिता की कुल बारह श्रेणियां दो-दो वर्गों में बंटी थीं। जूनियर वर्ग में छठवीं से नौवीं और सीनियर वर्ग में दसवीं से 12वीं कक्षा के कलासाधक शामिल थे।
महोत्सव में, संत अतुलानन्द रेजीडेंशियल एकेडमी, संत अतुलानंद कान्वेण्ट स्कूल कोइराजपुर, जीवन ज्योति हॉयर सेंकण्डरी, जीवनदीप पब्लिक स्कूल चांदमारी, सेंट डालिम्स सनबीम स्कूल सिगरा, रोहनिया, सनबीम स्कूल वरुणा, भगवानपुर, लहरतारा, अन्नपूर्णा, मुगलसराय, सनबीम सनसिटी स्कूल करसणा, सेंट जांस मड़ौली, सेंट जांस स्कूल डीएलडब्ल्यू, सेंट जांस स्कूल गाजीपुर, सेंट फ्रांसिस स्कूल रामनगर, सेंट जांस हिन्दी स्कूल लोहता, से आए बाल कलाकारों ने नवसाधना में कला का दम-खम दिखाया।
ये रहे निर्णायक
निर्णायक मंडल में शास्त्रीय गायन एकल और समूह के लिए फादर मैनुएल डीकुन्हा, कैथरिन व मिस ज्योति, एकल और समूह शास्त्रीय नृत्य के लिए सिस्टर दर्शना एस.आर.ए., ए. राॅबिन, प्रो. डाॅ. माला होम्बल व रोस्मा रुबा शामिल रहीं। स्वर वाद्य और ताल वाद्य के लिए फादर किरण, सोबिन सनी व शारदा प्रसाद शामिल रहे। सभी विजेताओं को पदक और पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
Published on:
21 Oct 2019 08:11 pm
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