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गोलियों की गूंज से दहल उठा था जौनपुर, धनंजय सिंह के काफिले पर चलीं थीं गोलियां, अभय सिंह पर लगे थे आरोप

वाराणसी के 2002 टकसाल सिनेमा फायरिंग केस में कोर्ट ने अभय सिंह समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया।

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टकसाल सिनेमा कांड में अभय सिंह समेत सभी आरोपी बरी

टकसाल सिनेमा कांड में अभय सिंह समेत सभी आरोपी बरी

Dhananjay Singh Vs Abhay Singh News: वाराणसी के 24 साल पुराने टकसाल सिनेमा कांड में धनंजय सिंह को बड़ा झटका लगा है। एमपी-एमएलए कोर्ट ने बुधवार को इस मामले में फैसला सुनाते हुए अभय सिंह और विनीत सिंह समेत सभी 6 आरोपियों को बरी कर दिया। इससे पहले भी 2025 में गैंगस्टर एक्ट के मामले में सभी आरोपी दोषमुक्त हो चुके थे।

क्या था पूरा मामला?

यह घटना 4 अक्टूबर 2002 की है। उस समय धनंजय सिंह जौनपुर की रारी सीट से निर्दलीय विधायक थे। वे अपने साथियों के साथ सफारी गाड़ी से वाराणसी से जौनपुर लौट रहे थे। आरोप है कि जब उनकी गाड़ी कैंट थाना क्षेत्र के नदेसर स्थित टकसाल सिनेमा के पास पहुंची, तभी बोलेरो में सवार अभय सिंह और उनके साथियों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। इस हमले में धनंजय सिंह, उनके गनर, ड्राइवर और अन्य लोग घायल हो गए। सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि हमलावर मौके से फरार हो गए।

केस और कानूनी कार्रवाई

हमले के बाद धनंजय सिंह ने अभय सिंह, विनीत सिंह, संदीप सिंह, संजय रघुवंशी, विनोद सिंह और सतेंद्र सिंह बबलू के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। पुलिस ने कुछ आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत भी केस दर्ज किया। लेकिन 29 अगस्त 2025 को कोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट मामले में भी सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। अब मुख्य केस में भी सभी को राहत मिल गई है।

दोस्ती से दुश्मनी तक का सफर

अभय सिंह के अनुसार, उनकी और धनंजय सिंह की पहली मुलाकात 1992 में हुई थी। दोनों की दोस्ती लखनऊ यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान और मजबूत हुई। अभय सिंह धनंजय से एक साल सीनियर थे और उन्होंने ही हॉस्टल में उनके रहने की व्यवस्था कराई थी। जौनपुर के अरुण उपाध्याय भी उनके करीबी दोस्त थे। तीनों छात्र राजनीति में सक्रिय थे और उनकी तिकड़ी यूनिवर्सिटी में काफी मशहूर थी।

रिश्तों में आई दरार

शुरुआत में तीनों अच्छे दोस्त थे और कई आंदोलनों में साथ नजर आते थे। लेकिन समय के साथ उनके रिश्तों में खटास आने लगी। 2002 में हुए इस हमले के बाद धनंजय सिंह ने अपने पुराने दोस्त अभय सिंह को ही आरोपी बना दिया। इसके बाद उनकी दोस्ती पूरी तरह दुश्मनी में बदल गई। इस लंबे चले केस में अब कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। इससे यह मामला कानूनी रूप से खत्म हो गया, लेकिन यह घटना दोस्ती, राजनीति और दुश्मनी की एक बड़ी कहानी बनकर सामने आई है।