
डॉ विवेक दीक्षित
वाराणसी. पिछले दो दशक से देश की 90 फ़ीसदी आबादी विटामिन डी की कमी से जूझ रही हैं। यह हालात वहां के हैं जहां अध्यात्म है। हमने पढ़ा है कि विटामिन डी की पूर्ति सूर्य के किरणों से होती है और हमारे देश में सूर्य की उपासना की जाती है। ऐसे में विटामिन डी की कमी से तरह तरह की समस्याएं सामने आ रही हैं खास तौर पर हड्डियों के कमजोर हो जाने की शिकायतें आम हो रही हैं। ड़ॉ. दीक्षित ने कहा कि हमारे शरीर में कैल्शियम जमा रहता है लेकिन विटामिन डी के प्रचुर मात्रा में ना होने से कैल्शियम की कमी की शिकायतें दर्ज की जाती हैं। उन्होंने कहा कि सर्वे से यह भी ज्ञात हुआ है कि खेत में काम करने वाले मजदूरों, धूप में काम करने वाली गृहणियों यहां तक की अर्धसैनिक बलों में भी विटामिन डी की कमी दर्ज हुई है। इसके पीछे की वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा 70 से 80 फ़ीसदी वंशानुगत हैं। खाद्य पदार्थों में भी हमें विटामिन डी की कमी हो रही है और परिधान भी इसका मुख्य कारण है।
डायबिटीज पर हो सकता है नियंत्रण
बीएचयू आईएमएस के न्यूरोलॉजी विभाग में मरीजों और विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए एम्स के अस्थि रोग विशेषज्ञ वैज्ञानिक ड़ॉ. विवेक दीक्षित ने कहा कि यदि विटामिन डी की मात्रा हमारे शरीर में सही रहे तो डायबिटीज की बीमारी को पांच वर्ष दूर धकेला जा सकता है। इतना ही नहीं विटामिन डी इंसुलिन की मात्रा को भी दुरुस्त रखता है। बाल झड़ना, त्वचा रोग या न्यूरोलॉजी की दवाओं से होने वाले विटामिन की कमी को भी सही रखता है।
महिलाओं को विटामिन डी की कमी का ज्यादा खतरा
उन्होंने कहा कि महिलाओं को पुरुषों की अपेक्षा विटामिन डी की कमी का ज्यादा खतरा रहता है। माहवारी, गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान महिलाओं को अपने विटामिन डी के रूटीन चेकअप कराना चाहिए। साथ ही 45 वर्ष की आयु के बाद जब माहवारी समाप्त हो रही हो उस दौरान ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है यदि उस वक्त महिलाएं ध्यान नहीं देती तो हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और कूल्हे, कलाई और स्पाइनल की समस्याएं घेर लेती हैं।
कैसे हो विटामिन डी की पूर्ति
उन्होंने कहा कि विटामिन डी की शरीर में पूर्ति के लिए जरूरत है 40 मिनट तक आप धूप में रहे। उन्होंने यह भी बताया कि नए शोध में यह खुलासा हुआ है कि यदि आप सुबह 7 से लेकर 11के बीच धूप में रहते हैं तो विटामिन की आपूर्ति नहीं हो सकती। इसके लिए आपको 11 से 1 के बीच धूप में रहना होगा जो आपाधापी के इस दौर में संभव नहीं है। उन्होंने सतर्क करते हुए कहा कि कभी भी कोई भी इलाज खुद से नहीं करनी चाहिए। इसके लिए सभी को विशेषज्ञों की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
ये थे मौजूद
इस दौरान प्रोफेसर एन. के. अग्रवाल, डॉ. गीता गौतम, डॉ अभय सिंह, स्मृति सिंह, भार्गवी मिश्रा, डॉ अर्शदीप, राकेश सहित सैकड़ों की संख्या में छात्र व मरीज उपस्थित रहें। न्यूरोलॉजी विभाग की अध्यक्ष प्रो दीपिका जोशी ने ड़ॉ. विवेक दीक्षित का स्वागत किया। डॉ अर्शदीप और विनीता ने भेंट बुके भेंट किया जबकि विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर अभिषेक पाठक ने अंगवस्त्रम भेंट किया। संचालन प्रो विजय नाथ मिश्र ने किया।
Published on:
11 Jul 2018 05:26 pm
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