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अगर आप पूरी करते हैं यह अर्हता तो लड़ सकते हैं निकाय चुनाव

निकाय चुनाव लड़ने के लिए आपको कुछ मानक पर खरा उतरना होता है। अगर आप यह मानक पूरा करते हैं तो निकाय चुनाव लड़ सकते हैं

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 Municipal Corporation Election 2017

आप पूरी करते हैं यह अर्हता तो लड़ सकते हैं निकाय चुनाव

प्रतापगढ़/वाराणसी. निकाय चुनाव के लिए लड़ने के लिए आपको कुछ मानक पर खरा उतरना होता है। अगर आप यह मानक पूरा करते हैं तो निकाय चुनाव लड़ सकते हैं। आइए हम बताते हैं कि निकाय चुनाव के लिए क्या मानक हैं और प्रत्याशी का नामांकन कैसे वैध होता है।

प्रतापगढ़ के उप जिला निर्वाचन अधिकारी (नगर निकाय) राम सिंह वर्मा ने नगर निकाय सामान्य निर्वाचन-2017 के लिए उम्मीदवारों के मानक के बारे में पत्रिका को बताया। बकौल वर्मा, राज्य निर्वाचन आयोग (नगरीय निकाय) से जारी प्राविधानों के अनुसार नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों में अध्यक्ष पद के लिए वे ही उम्मीदवार चुनाव लड़ सकेंगे जो 30 वर्ष की आयु पूर्ण कर लिए हैं, जबकि नगर निकायों के सदस्यों के लिए चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की आयु आयोग ने 21 वर्ष या उससे अधिक तय किया है। एक उम्मीदवार दो से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों से सदस्य/पार्षद पद के लिए चुनाव नहीं लड़ सकता है।

ऐसा होने पर आप नहीं लड़ पाएंगे चुनाव
आयोग के दिशा निर्देशों के अनुसार वे व्यक्ति ही निर्वाचन के लिए अयोग्य होंगे जो दिवालिया हों।
नगर निकाय या उसके नियंत्रण में कोई लाभ का पद धारण करते हों।
राज्य सरकार/केन्द्रीय सरकार/स्थानीय प्राधिकारी की सेवा में हों।
जिला सरकारी काउन्सिल/अपर या सहायक जिला काउन्सिल/अवैतनिक मजिस्ट्रेट/अवैतनिक मुन्सिफ/अवैतनिक सहायक कलेक्टर हों।
किसी स्थानीय प्राधिकारी का पदच्युत सेवक रहे हों और जिसे पुनः सेवायोजन के लिए विवर्चित किया गया हो।
पदच्युत होने की तारीख से 6 वर्ष की अवधि समाप्त न हो गयी हो।
ऐसे व्यक्ति भी चुनाव नहीं लड़ पाएंगे जो किसी न्यायालय द्वारा अधिनियमों में उल्लेखित किसी अपराध के लिए दोषी पाए गए हों या सदाचार बनाए रखने के लिये पाबन्द किए गए हों और 5 वर्ष की अवधि समाप्त न हो गई हो।
उ0प्र0 नगर पालिका अधिनियम 1916 की धारा-40(3) के अन्तर्गत सदस्य पद से हटाये गए हों और हटाये जाने की तारीख से 5 वर्ष की अवधि समाप्त न हो गई हो।
अध्यक्ष पद से हटाये जाने की दशा में अपने हटाए जाने की तारीख दिनांक से 5 वर्ष की अवधि तक अध्यक्ष या सदस्य के रूप में पुनर्निर्वाचन के पात्र नही होंगे।
ऐसे व्यक्ति भी चुनाव नही लड़ सकेंगे जो नगर निकाय के देय किसी कर का 1 वर्ष से अधिक अवधि का देनदार हो।

नामांकन के लिए नियम
उप जिला निर्वाचन अधिकारी वर्मा ने निर्वाचन आयोग के हवाले से यह भी बताया है कि अध्यक्ष नगर पालिका परिषद के लिए नाम निर्देशन पत्र की विक्री 500 रू0 में की जायेगी जिसमें जमानत की धनराशि 8000 रुपए होगी और 4 लाख रुपये तक चुनाव व्यय सीमा निर्धारित की गई है।
अध्यक्ष नगर पंचायत के लिए नाम निर्देशन पत्र का मूल्य 250 रुपया जमानत धनराशि 5 हजार रुपया और चुनाव खर्च की सीमा 1 लाख रुपया तक निर्धारित है।
इसी प्रकार नगर पालिका सदस्य के नामांकन पत्र 200 रुपया में खरीदे जायेंगे और जमानत की राशि इस पद के लिए 2000 रुपया रखी गई है, जबकि इस पद के लिए चुनाव खर्च की सीमा 40 हजार निर्धारित की गई है।
नगर पंचायत सदस्य के लिए आयोग से तय मानक के अनुसार नाम निर्देशन पत्र 100 रुपए में बिक्री किए जायेंगे, जमानत की राशि 2000 रुपया और इस पद के लिए चुनाव खर्च सीमा 2000 रुपया निर्धारित की गई है।
आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार जैसे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति/पिछड़ा वर्ग अथवा महिला के लिए सभी पदों के लिए नाम निर्देशन पत्र का मूल्य व जमानत की धनराशि आधी होगी।
आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों द्वारा अनारक्षित पद पर नाम निर्देशन करने पर भी आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए निर्धारित नाम निर्देशन पत्र का मूल्य लिया जाएगा। नाम निर्देशन पत्र नकद मूल्य देकर क्रय किया जा सकेगा।

यह भी जानना जरूरी

उप जिला निर्वाचन अधिकारी वर्मा ने बताया है कि उम्मीदवारों के नाम निर्देशन पत्र एक प्रस्तावक द्वारा हस्ताक्षरित किए जाएंगे तथा उम्मीदवार एवं प्रस्तावक का फोटो भी नाम निर्देशन पत्र पर चस्पा किया जायेगा। सदस्य नगर पालिका परिषद्/नगर पंचायत के मामलों में प्रस्तावक उसी पक्ष का निर्वाचक हो सकता है जिस कक्ष से उम्मीदवार निर्वाचन लड़ रहा है।


नगर पालिका परिषद् और नगर पंचायतों के अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के मामले में प्रस्तावक सम्बन्धित निकाय के किसी भी कक्ष का निर्वाचक हो सकता है, जिस निकाय से उम्मीदवार निर्वाचन लड़ रहा है।
कोई मतदाता एक से अधिक अभ्यर्थी को प्रस्ताव के रूप में नाम निर्दिष्ट नहीं कर सकता है। जहां तक नाम निर्देशन पत्र के साथ संलग्न किए जाने वाले अभिलेख या प्रमाण पत्र का सम्बन्ध है इस बारे में आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि, सम्बन्धित निकाय के एक वर्ष से अधिक अवधि के बकाये का देनदार न होने का प्रमाण पत्र नाम निर्देशन पत्र के साथ संलग्न करना अनिवार्य होगा।