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किसान के इस बेटे ने लिख दी नई इबारत, बिना कोचिंग कंपीट किया PCS

बोले प्रतिभाशाली अनुराग, धीरज रखें, ईमानदारी से परिश्रम करें सफलता कदम चूमेंगी।

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अनुराग सिंह

अनुराग सिंह

डॉ अजय कृष्ण चतुर्वेदी

वाराणसी. गाजीपुर के मतेहुआं गांव से निकल कर सर्व विद्या की राजधानी काशी पहुंचे शिक्षा ग्रहण करने तभी ठान लिया था कि जीवन में कुछ बड़ा मुकाम हासिल करना है। अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित, हौले-हौले एक-एक कदम बढ़ाते रहे। और छू लिया आसमान। आज उनकी इस सफलता पर घरवाले ही नहीं बल्कि गांव और साथी भी इतराते घूम रहे हैं।

बनारस के यूपी कॉलेज से इंटर तक की शिक्षा ग्रहण करने के बाद बीएचयू से आधुनिक इतिहास में स्नातक डिग्री हासिल कर प्रशासनिक सेवा की तैयारी के लिहाज से चले गए इलाहाबाद। वहीं इलाहाबाद विश्वविद्यालय से आधुनिक भारत में परास्नातक की डिग्री ली फिर वहीं पीएचडी करने के साथ यूपी पीसीएस की तैयारी में जुट गए। और मार लिया मैदान।

ये और कोई नहीं किसान पिता उपेंद्र नाथ सिंह के तीन बेटों में एक अनुराग सिंह हैं। मां धर्मावती देवी गृहणी हैं। बड़े भाई अजीत सिंह एसएसबी में डिप्टी कमांडेंट हैं तो एक अन्य भाई गांव पर ही बीएमएस की तैयारी कर रहे हैं। अनुराग हैं कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर पी हरीश के निर्देश में पीएचडी कर रहे हैं।

अनुराग ने पत्रिका से बातचीत में बताया कि इलाहाबाद में रह कर पीसीएस की तैयारी कर रहा था। कभी कोचिंग नहीं की। बीए में रक्षा अध्ययन और इतिहास मेरा विषय रहा। लिहाजा कंपटीशन के लिए इतिहास विषय चुना। गहन अध्ययन किया। मित्रों से मदद ली और बन गया नायब तहसीलदार। बताया कि पिछले सालों के पेपर से तैयारी की। उन्होंने इस सफलता के लिए अपने मित्रों के सहयोग के लिए उनका आभार जताया।

अनुराग का कहना है कि किसी भी प्रतियोगिता में सफलता हासिल करने के लिए धैर्य रखना बेहद जरूरी है। दूसरे खुद पर विश्वास रखें और कठिन परिश्रम करते रहें। ईमानदारी से अपनी धुन में लगे रहेंगे तो लक्ष्य आसान हो जाएगा।