अमरमणि त्रिपाठी
यूपी की राजनीति में रुचि रखने वाला शायद ही कोई ऐसा शख्स होगा जो अमरमणि त्रिपाठी के नाम से परिचित नहीं होगा। अमरमणि त्रिपाठी पूर्वी उत्तर प्रदेश से एक प्रभावशाली राजनेता हैं। यह उत्तर प्रदेश राज्य के पूर्व कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। त्रिपाठी ने अपने राजनैतिक सफर में कई पार्टियों का दामन थामा। वह कई बार विधायक चुने गए हैं। सितंबर 2003 में यूपी की ही एक युवा कवियित्री मधुमिता शुक्ला की हत्या के सिलसिले में यह गिरफ्तार हुए। वर्तमान में कवियित्री मधुमिता शुक्ला की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। अमरमणि त्रिपाठी पर इस हत्याकांड के अलावा भी कई मुकदमे दर्ज हैं। लेकिन राजनीतिक रसूख के चलते किसी भी मामले को सुलझाया नहीं जा सका। पिछले साल ही उनकी बहु की भी एक कथित एक्सीडेंट में मौत हो गई थी। जिसमें उनके बेटे का हाथ सामने आया था।
अमरमणि की ताकत का अंदाजा आप सिर्फ इस बात से लगा सकते हैं कि पूर्वी उत्तर प्रदेश की कई सीटों पर जीतने-हारने वालों का फैसला जेल की कोठरी से ही करता है। आलम तो यह है कि एक बार जेल से ही उसने सीडी के जरिए अपने बेटे अमनमणि के लिए वोट मांगा था।
मधुमिता और अमरमणि के नजदीकी सम्बंध ही बना कवियत्री के मौत का कारण
त्रिपाठी ने बचने के लिए सत्ता का पूरजोर इस्तेमाल किया पर सच्चाई छुप ना सकी। 9 मई, 2003 को लखनऊ के पेपर मिल कॉलोनी में कुछ लोगों ने मधुमिता की बड़ी क्रूरता से हत्या कर दी थी।
हत्या की जांच में पता चला कि मधुमिता के मंत्री अमरमणि से नाजायज संबंध थे और मरने के समय मधुमिता त्रिपाठी के बच्चे की मां बनने वाली थी और उन दोनों के नजदीकी संबंध ही मधुमिता की हत्या की वजह थी।
अमरमणि के उत्तर प्रदेश और बिहार के कई बड़े राजनेताओं और अपराधियों से संबंध रहे हैं। राजनीति में अमरमणि यूपी के बाहुबली नेता हरिशंकर तिवारी के सबसे ज्यादा करीबी थे।
राजनीति में प्रवेश करने से पहले ही अमरमणि एक अपराधिक छवि रखते थे और उन पर करीब 33 आपराधिक मामले लंबित थे जिनमें दो हत्या के भी थे।
राजनीति में शामिल होने के बाद अमरमणि ने कई नेताओं के साथ दल बदल कर और अन्य तरीकों से कई सरकारों का गठन करवाया। समय-समय पर यूपी के सभी बड़े दलों (सपा, बसपा, भाजपा और कांग्रेस) में त्रिपाठी अपनी सुविधानुसार अपनी सेवाएं दे चुके हैं।