
बीएचयू के शताब्दी वर्ष समारोह में पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी
वाराणसी. केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी, मशहूर गीतकार भूपेन हजारिका और नाना जी देशमुख को भारत रत्न से अलंकृत किया है। काशी का ये सौभाग्य है कि इन तीनों का बनारस से गहरा लगाव रहा है। तीनों ही एक-दो नहीं कई मौकों पर बनारस आ चुके हैं। प्रणव मुखर्जी तो 2016 में ही बीएचयू के शताब्दी वर्ष समारोह में भाग लेने वाराणसी आए थे।
बीएचयू के शताब्दी वर्ष से पहले भी वह कई बार बनारस हिंदू विश्वविद्यालय आ चुके हैं। कांग्रेस के गृह मंत्री रह चुके प्रणव मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी जो खुद एक मशहूर नृत्यांगना हैं वह भी बीएचयू के शताब्दी वर्ष में विश्वविद्यालय आई थीं और सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी थी।
बता दें कि पूर्वोत्तर राज्य असम से एक बहुमुखी प्रतिभा के गीतकार, संगीतकार और गायक भूपेन हजारिका ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से 1944 में बीए और 1946 में एमए (राजनीति विज्ञान) की पढ़ाई की थी। वह असमिया भाषा के कवि, फिल्म निर्माता, लेखक और असम की संस्कृति और संगीत के अच्छे जानकार भी रहे थे। वह अपने गीत खुद लिखते थे, संगीतबद्ध करते थे और गाते थे। उन्होंने कविता लेखन, पत्रकारिता, गायन, फिल्म निर्माण आदि अनेक क्षेत्रों में काम किया। अपनी मूल भाषा असमिया के अलावा भूपेन हजारिका हिंदी, बंगला समेत कई अन्य भारतीय भाषाओं में गाना गाते रहे थे। उन्हें पद्मभूषण सम्मान से भी सम्मानित किया गया था। अपने गंगा पर गाए गीत को लेकर वह काफी चर्चित हुए थे।
वहीं नाना जी देशमुख राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कई कार्यक्रमों में शिरकत करने काशी आ चुके हैं। यूपी के पूर्व वित्त मंत्री स्व, हरिश्चंद्र श्रीवास्तव के साथ उनके अंतरंग संबंध रहे। बता दें कि हरिश्चंद्र श्रीवास्तव 'हरीश' जी ने काशी में जनसंघ की नींव डालने वाला माना जाता है। वह आरएसएस के सक्रिय सदस्यों में रहे। ऐसे में नाना जी देशमुख जब भी बनारस आते उनसे जरूर मिलते थे।
Published on:
25 Jan 2019 08:50 pm
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