
George Fernandes
वाराणसी. देश के जानेमाने समाजवादी जार्ज फर्नांडीज का मंगलवार की सुबह निधन हो गया। जार्ज जिनका बनारस से गहरा लगाव रहा। वह अक्सर आया करते थे। अस्सी स्थित पप्पू की चाय की दुकान पर वह जरूर जाते। यहां तक कि मीडिया से मिलने के लिए भी यह दुकान उनके लिए सबसे मुफीद थी। जनता पार्टी से अगल होने के बाद उन्होंने समता पार्टी बनाई जिससे जुड़े काशी हिंदू विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष शिवकुमार सिंह।
लेकिन लंबे अरसे तक फर्नांडीज के साथ रहने का मौका मिला वाराणसी के समाजवादी विजय नारायण को। वह बताते हैं कि आपातकाल के दौरान गिरफ्तारी से बचने के लिए जार्ज फर्नांडिस ने दाढ़ी रखी और पगड़ी पहन कर सिख का भेष धारण कर लिया। हालांकि, गिरफ्तारी के बाद तिहाड़ जेल में कैदियों को वह गीता के श्लोक भी सुनाते थे। बतौर रेलमंत्री फर्नांडिस के सचिव रहे समाजवादी विजय नारायण के मुताबिक, पुलिस हमें ढूंढ रही थी,. हम ना सिर्फ छिप रहे थे, बल्कि अपना काम भी करते जा रहे थे। गिरफ्तारी से बचने के लिए फर्नांडीज ने बाल बढ़ा लिए थे और पगड़ी और दाढ़ी के साथ सिख का भेष धारण कर रखा था। वह मशहूर लेखक के नाम पर खुद को ‘खुशवंत सिंह' कहा करते थे।
फर्नांडिस के साथ विजय नारायण और अन्य लोगों को 10 जून, 1976 को कोलकाता में गिरफ्तार किया गया था। बड़ौदा डायनामाइट प्रकरण में उन पर मुकदमा चलाया गया। इस मामले में उन पर सरकार का तख्तापलट करने के लिए सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने का भी मुकदमा चला था। जेल में साथ-साथ समय बिताने वाले समाजवादी विजय नारायण के मुताबिक, ‘सेंट पॉल्स चर्च में जार्ज के पास एक टाइपराइटर, एक साइक्लोस्टाइल मशीन थी. वह इसी से पत्र लिखते थे, जिसे मैं विभिन्न स्टेशनों पर रेलवे मेल सर्विस के काउंटरों पर डालने जाया करता था। मैंने पुलिस से बचने के लिए एक बनारसी मुस्लिम बुनकर का वेश धारण किया था। हम भले ही छिप रहे थे, लेकिन निष्क्रिय नहीं थे। जार्ज को 10 जून की रात भारतीय वायुसेना के एक कार्गो विमान में दिल्ली ले जाया गया, मुझे पुलिस हिरासत में रखा गया और करीब एक पखवारे तक कोलकाता में पुलिस के खुफिया ब्यूरो द्वारा मुझसे पूछताछ की गई। बाद में हम सभी को दिल्ली के तिहाड़ जेल में डाल दिया गया और मुकदमा तीस हजारी कोर्ट में चला।
जार्ज फर्नांडीज का जीवनवृत्त
जन्म- मैंगलोर में 03 जून 1930 को
शादी-लीला कबीर से 21 जुलार्इ, 1971 में विवाह किया
- 1967 से 2004 तक वह 09 बार लोकसभा चुनाव जीत कर संसद पहुंचे
- सांसद के रूप में उनका आखिरी कार्यकाल अगस्त 2009 और जुलाई 2010 के बीच राज्यसभा सांसद के रूप में रहा
- जॉर्ज फर्नांडिस संघवादी, कृषिविद्, राजनीतिक कार्यकर्ता और पत्रकार रहे
- ट्रेड यूनियन पॉलिटिक्स में भी वह किसी फायरब्रांड नेता से कमतर नहीं थे
- अपने जीवन में उन्होंने मजदूरों के हक की लड़ाई भी खूब लड़ी
- ईसाई परिवार में जन्मे फर्नांडिस, संसद में कभी अंग्रेजी में नहीं बोले
- उनकी हिंदी, मराठी और कन्नड भाषा पर अच्छी पकड़ रही।
Published on:
29 Jan 2019 12:40 pm

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