
जर्मनी के राष्ट्रपति
वाराणसी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में विकास भले न दिख रहा हो, गंगा का आंचल दिन विशेष को भले ही उज्जवल धवल दिखे। गंगा में गिरते नालों को बड़ी-बड़ी होर्डिंग से ढांक दिया जाए। गंगा में दिखने वाली रेत को यह कह कर टाल दिया जाए कि बरसात में बाढ आने पर ऐसा नहीं रहता। पर विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के आगमन का सिलसिला जारी है। ऐतिहासिकता व प्राचीनता भले नष्ट करने की योजना को मूर्त रूप देने की कवायद तेज हो गई हो पर विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के बीच काशी का महत्व वैसे ही है, कारण साफ है जो उन्होंने सुना और पढा है वो उसे ही देखना चाहते हैं। यह दीगर है कि दिखे कुछ और। बता दें कि उसी प्राचीन काशी को देखने के लिए पहले जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे बनारस आए। गंगा पूजन किया, गंगा आरती देखी। उसके बाद हाल ही में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैंक्रोन आए, नौका विहार किया गंगा में। अब जर्मनी के राष्ट्रपति जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक वाल्टर स्टाइनमायर 22 मार्च को काशी आ रहे हैं।
इसकी प्रारंभिक सूचना जिला प्रशासन को मिल गई है और अपने इस खास मेहमान की आगवानी के लिए प्रशासनिक अमला एक बार फिर से तैयारियों में जुट गया है। जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने मीडिया को बताया कि 22 मार्च को जर्मनी के राष्ट्रपति का काशी दौरा प्रस्तावित है। इसका प्रारंभिक प्रोटोकाल गृह मंत्रालय की ओर से स्थानीय प्रशासन को मिल चुका है। इसके मद्देनजर 15 दिन पहले जर्मनी के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों ने बनारस में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक भी की थी और राष्ट्रपति की तरफ से किए जाने वाले भ्रमण स्थलों को भी देखा था।
डीएम के अनुसार जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक वाल्टर स्टाइनमायर 22 मार्च को बीएचयू, सारनाथ, दीनदयाल हस्तकला संकुल के अलावा अस्सी से दशा सुमेर घाट तक गंगा में नौका विहार करेंगे और शाम को दशाश्वमेध घाट पर होने वाली गंगा आरती भी देखेंगे। साथ ही वह काशी हिंदू विश्वविद्यालय भी जाएंगे, जहां पर छात्र-छात्राओं संग रू-ब-रू होंगे। पीएमओ ने इन स्थलों की सुरक्षा से सम्बंधित ब्यौरा तलब किया है।
Published on:
15 Mar 2018 05:45 pm
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