
CRS Fund Scam
Ghazipur CRS Fund Fraud: इन दिनों ठगों के हौसले बुलंद हैं। कभी लॉटरी तो कभी सरकारी योजनाओं के नाम पर चूना लगाने वाले जालसाज अब सामाजिक संस्थाओं को भी अपना निशाना बना रहे हैं। वाराणसी और मुंबई के शातिरों ने मिलकर गाजीपुर के एक प्रतिष्ठित ट्रस्ट को करोड़ों रुपये का कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड दिलाने का ऐसा सब्जबाग दिखाया कि पीड़ित उनके जाल में फंसता चला गया। जब ठगी का अहसास हुआ और रकम वापस मांगी गई, तो दाऊद और अंडरवर्ल्ड के नाम पर सीधे जान से मारने की धमकियां मिलने लगीं।
मामला गाजीपुर के शादियाबाद थाना क्षेत्र के गुरैनी का है। यहां स्थित 'शारदा शिक्षण संस्थान जन सेवा ट्रस्ट' के सचिव अवधेश यादव को समाजसेवा के काम को आगे बढ़ाना था। अक्टूबर 2023 में उनकी मुलाकात वाराणसी के नदेसर निवासी धर्मेंद्र टांक दुबे और विकास पांडे से हुई। इन दोनों ने खुद को 'हरिहर महादेव टेंपल ट्रस्ट' का कर्ताधर्ता बताया और दावा किया कि मुंबई की 'जी क्यूबे इंश्योरेंस कंपनी' के कर्ताधर्ता अमित दास से उनकी गहरी पैठ है।
जालसाजों ने अवधेश यादव को झांसा दिया कि वे उनकी संस्था को 4.30 करोड़ रुपये का भारी-भरकम सीएसआर फंड दिलवा देंगे। लेकिन इसके लिए एक शर्त रखी गई 'सिक्योरिटी मनी'। झांसे में आकर पीड़ित ने 30 अक्टूबर 2023 को 4.30 लाख रुपये और एक कैंसिल्ड चेक आरोपियों के हवाले कर दिया। इसके बाद भी ठगों का पेट नहीं भरा और उन्होंने फाइल पास कराने व अन्य खर्चों के नाम पर अलग-अलग किस्तों में 6.20 लाख रुपये और ऐंठ लिए। यानी कुल मिलाकर 10.50 लाख रुपये ठग लिए गए, लेकिन फंड के नाम पर एक ढेला भी नहीं मिला।
काफी समय बीतने के बाद जब अवधेश यादव को अहसास हुआ कि वे ठगी का शिकार हो चुके हैं, तो उन्होंने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू की। पैसे मांगते ही ठगों का रंग बदल गया। वाराणसी और मुंबई के इन शातिरों ने अपनी राजनीतिक पहुंच की धौंस दिखानी शुरू कर दी। हद तो तब हो गई जब आरोपियों ने पीड़ित को चुप रहने के लिए मुंबई अंडरवर्ल्ड और खूंखार अपराधियों से संबंध होने का दावा करते हुए जान से मारने की धमकी दे डाली।
कानूनी कार्रवाई: डरने के बजाय पीड़ित अवधेश यादव ने हिम्मत दिखाई और गाजीपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) से लिखित शिकायत की। एसपी के निर्देश पर पुलिस ने वाराणसी के धर्मेंद्र टांक दुबे, विकास पांडेय और नवी मुंबई (ठाणे) के अमित दास के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
भारतीय कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत जिन कंपनियों का नेटवर्थ 500 करोड़ या सालाना टर्नओवर 1000 करोड़ से अधिक होता है, उन्हें अपने 3 साल के औसत मुनाफे का 2 प्रतिशत हिस्सा सामाजिक कार्यों (शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण) पर खर्च करना अनिवार्य होता है। इसी को कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड कहते हैं।
चूंकि ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में कई छोटे एनजीओ (NGO) और शिक्षण संस्थान फंड की कमी से जूझते हैं, ठग इसी मजबूरी का फायदा उठाते हैं। वे बड़ी कंपनियों के फर्जी एजेंट बनकर आते हैं और कहते हैं कि "हमारे पास करोड़ों का फंड पड़ा है, बस 2-5% कमीशन या सिक्योरिटी डिपॉजिट दे दो।"
कोई एडवांस नहीं: भारत सरकार या किसी भी वैध कंपनी के नियम के मुताबिक, सीएसआर फंड जारी करने के लिए किसी भी तरह की 'सिक्योरिटी मनी' या एडवांस कैश की मांग नहीं की जाती।
सीधा संपर्क: किसी बिचौलिए या स्वघोषित 'ट्रस्ट' पर भरोसा करने के बजाय सीधे कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या उनके सीएसआर विंग से संपर्क करें।
सत्यापन जरूरी: पैसे का लेन-देन करने से पहले सामने वाले की कंपनी का कॉर्पोरेट आइडेंटिफिकेशन नंबर (CIN) और क्रेडेंशियल्स एमसीए (MCA) की वेबसाइट पर जरूर चेक करें।
गाजीपुर पुलिस का कहना है कि आरोपियों की धरपकड़ के लिए टीमें रवाना कर दी गई हैं। जनता से अपील है कि भारी-भरकम फंड के लालच में आकर किसी भी अज्ञात व्यक्ति को मोटी रकम एडवांस में न दें।
Updated on:
19 Jul 2026 03:05 pm
Published on:
19 Jul 2026 02:58 pm
