
उत्तर प्रदेश भारत के उत्तरी भाग में स्थित एक प्रमुख राज्य है। यूपी को सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले और कृषि प्रधान राज्य के रूप में जाना जाता है। साल 2011 की जनगणना के अनुसार, इसकी जनसंख्या 19 करोड़ 98 लाख 12,341 थी।
हालांकि, वर्तमान समय में इस आंकड़े में बढ़त हुई है। अब यह लगभग 24 करोड़ तक पहुंच गया है। इसके अलावा, इसे भारत का सबसे अधिक जिलों वाला राज्य भी कहा जाता है। आपने यहां के विभिन्न जिलों के बारे में सुना और पढ़ा भी होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उत्तर प्रदेश का कौन-सा ऐसा जिला है जिसे "काशी की बहन" कहा जाता है? अगर नहीं, तो आइए जानते हैं कि वो कौन सा जिला है? जिसे काशी की बहन कहा जाता है।
मोक्ष की नगरी काशी का क्या है महत्व
काशी की बहन किस जिले को कहते हैं जानने से पहले यह जानना जरूरी है कि काशी क्या है। काशी भारत के प्रमुख धर्मस्थलों और तीर्थों में से एक है। इसके महत्व के विषय में वेदों और पुराणों तक में उल्लेख है। काशी को मोक्ष की नगरी भी कहा जाता है। वर्तमान समय में काशी को वाराणसी या बनारस के नाम से भी जाना जाता है। वाराणसी को शिव की नगरी कहते हैं। किवदंतियों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि जब सारी धरती नष्ट हो जाएगी उसके बाद सिर्फ काशी बचेगी। क्योंकि यह शिव जी के त्रिशूल पर टिकी है।
ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर है काशी
काशी या बनारस भारत और उत्तर प्रदेश का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर है। यह शहर अपने अद्वितीय इतिहास और धार्मिक महत्व के लिए विश्व विख्यात है। इसे भारत के सबसे प्राचीन नगरों में से एक माना जाता है। गंगा नदी के किनारे स्थित इस नगर को उसके अद्वितीय दृश्य और धार्मिक आयाम के लिए काफी सराहा गया है।
तो इस जिले को कहते है ‘काशी की बहन’
अब सवाल उठता है कि उत्तर प्रदेश का कौन-सा जिला "काशी की बहन" कहलाता है, तो आपको बता दें कि यह जिला भी गंगा नदी के किनारे स्थित है और इसे वर्तमान में गाजीपुर जिले के नाम से जाना जाता है। कहते हैं कि यह काशी या बनारस से काफी मिलता जुलता हुआ है।
एशिया का सबसे बड़ा गांव है इस जिले में
धार्मिक मान्यताओं के रंग ढंग में यह जिला बनारस या काशी से काफी मिलता जुलता है। जिससे इस जिले को एक विशेष पहचान मिलती है, गाजीपुर में एशिया का सबसे बड़ा गांव गहमर स्थित है। इस गांव में हर एक घर में कम से कम एक व्यक्ति सेना में तैनात है।
मुस्लिम शासक ने की थी स्थापना
गाजीपुर जिले का ऐतिहासिक संबंध तुगलक वंश के शासनकाल से है, जब सैयद मसूद गाजी ने इसे स्थापित किया था। प्राचीन दस्तावेजों के अनुसार, गाजीपुर के कठपउत में एक गढ़ था जो चौहान राजा मांधाता का था, जिन्होंने दिल्ली सुल्तान की शासनकाल को अस्वीकार कर स्वतंत्र रूप से शासन किया था।
जब दिल्ली सुल्तान को इसकी खबर मिली, तो मोहम्मद बिन तुगलक के सिपहसालार सैयद मसूद अली हुसैनी ने यहां पर हमला किया, इस हमले में राजा की हार हुई और उसकी मृत्यु के सैयद मसूद अली हुसैनी को वहां का राजा बना दिया गया। उन्हें मलिक-अल-सादात-गाजी की उपाधि से नवाजा गया। उन्होंने बाद में कठउत के बगल में गौसपुर को अपने गढ़ के रूप में स्थापित किया।
Published on:
06 Dec 2023 03:21 pm
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