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स्वर्णिम आभा से दमक उठीं श्री काशी विश्वनाथ मंदिर गर्भगृह की भीतरी दीवारें, अब चौकठों की बारी

श्री काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के बाद अब मंदिर के गर्भगृह की भीतरी दीवारों को भी स्वर्णमंडित कर दिया गया है। रात की पीली रोशनी के बीच गर्भगृह की स्वर्णिम दमक ने भक्तों को किया विभोर। अब गर्भगृह के चारों द्वार की चोकठ से भी चांदी हटा कर उन्हें स्वर्णमंडित किया जाएगा।

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श्री काशी विश्वनाथ  मंदिर गर्भगृह की भीतरी दीवारें स्वर्णमंडित

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर गर्भगृह की भीतरी दीवारें स्वर्णमंडित

वाराणसी. करीब डेढ-पौने दो सौ साल बाद श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में एक नया अध्याय जुड़ गया जब बाबा के गर्भगृह की भीतरी दीवारें भी स्वर्णिम आभा से दमक उठीं। पीली रोशनी में दमदमाता गर्भगृह देख आम श्रद्धालु क्या खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी चकित रह गए। गर्भगृह की भीतरी दीवारों के स्वर्णमंडित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले श्रद्घालु बने जिन्होंने बाबा का सविधि पूजन-अर्चन किया। अब गर्भगृह के चारों द्वार के चौकठ पर लगी चांद हटा कर उन पर भी सोने के पत्तर जड़े जाएंगे। यहां बता दें कि ये सब एक दक्षिण भारतीय के दान से संभव हो पाया है। बताया जा रहा है कि इससे पहले पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह ने मंदिर के शिकर को स्वर्णमंडित कराया था।

बता दें कि करीब डेढ़ महीना पहले एक दक्षिण भारतीय ने बाबा के गर्भगृह की भीतरी दीवारों को स्वर्णमंडित करने की इच्छा जतायी थी। शिव भक्त की इच्छा पर मंदिर प्रशासन की मुहर लगने के बाद काम शुरू हुआ। पहले विशेषज्ञों की देखरेख में इसके लिए सांचा बनाया गया। नई दिल्ली की कंपनी ने कड़ी सुरक्षा के बीच ट्रक से सोना वाराणसी पहुंचवाया। फिर शुरू हुआ गर्भगृह की भीतरी दीवारों को स्वर्णमंडित करने का काम। करीब 30 घंटे की मशक्कत के बाद रविवार को दोपहर बाद गर्भगृह की भीतरी दीवारें स्वर्णिण आभा से दमक उठीं।

वैसे जिस शिवभक्त की इच्छा पर गर्भगृह की भीतरी दीवारें स्वर्णमंडित की गई हैं उस दानी ने चूंकि गुप्त दान किया है लिहाजा उसके नाम का उल्लेख नहीं किया जा रहा है। यहां ये भी बता दें कि 2012 में भी गर्भगृह को स्वर्णमंडित करने की योजना बनी थी। पर तब आईआईटी बीएचयू के विशेषज्ञों ने बताया था कि गर्भगृह के दीवारों में इतना भार नहीं सहन करने की क्षमता नहीं है। लिहाजा योजना धरी की धरी रह गई। लेकिन 13 दिसंबर 2021 को काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के बाद गर्भगृह की दीवारों को मजबूती मिली तो दक्षिण भारतीय दानदाता की इच्छा पर विचार कर इन दीवारों को स्वर्णमंडित करने का निर्णय लिया गया।

काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण महारानी अहिल्या बाई होल्कर द्वारा साल 1780 में कराया गया। करीब 123 साल बाद 1853 में महाराजा रणजीत सिंह ने 22 मन शुद्ध सोने से पूरे शिखर को स्वर्ण मंडित कराकर स्वर्ण कलश स्थापित किया। इसके बाद अब महाशिवरात्रि से पूर्व ही बाबा दरबार को सोने से सजा दिया गया।

अब मंदिर प्रशासन जल्द ही गर्भगृह के चारों द्वार को भी स्वर्णमंडित करने पर विचार कर रहा है। इसके तहत चौकठों पर जड़ित चांदी को हटा कर उसकी जगह सोने के पत्तर जड़े जाएंगे।