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गोवर्धन पूजा: इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा, प्रसाद में चढ़ाए छप्पन भोग, पूरी होगी मनोकामना

महिलाएं अपने आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धन बनाकर उसकी पूजा करती हैं

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jaipur

Govardhan

मऊ. दिवाली के बाद 8 नवम्बर को गोवर्धन पूजा मनाया जाएगा। इस त्योहार को भगवान श्री कृष्ण को प्रसन्न करने के लिए मनाया जाता है। महिलाएं अपने आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धन बनाकर उसकी पूजा करती हैं। मान्यता है कि इस दिन इंद्र के प्रकोप से पूरे वृंदावन वासियों को बचाने के लिए श्री कृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत 7 दिन तक उठाया था। इस बार पूजा करने का शुभ मुहूर्त है-


गोवर्धन पूजा तिथि: 8 नवंबर 2018
गोवर्धन पूजा प्रात: काल मुहूर्त : सुबह 6:45 से 08:57 बजे तक
गोवर्धन पूजा सायं काल मुहूर्त : शाम 3:32 से 5:43 बजे तक
प्रतिपदा तिथि कब से शुरू : 7 नवंबर को रात 9:31 बजे
प्रतिपदा तिथि समाप्त : 8 नवंबर को रात 9:07

इसलिए मनाया जाता है गोवर्धन पूजा
वृंदावन के लोग हर साल भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए खूब सारा चढ़ावा चढ़ाते थे. ताकि भगवान इंद्र प्रसन्न रहें और किसानों पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखें और समय-समय पर फसलों के अनुसार बारिश करते रहें. बाल कृष्ण ने पाया कि ऐसा करने में किसानों पर भार बढ़ जाता है और वह अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा भगवान इंद्र को प्रसन्न करने में लगा देते हैं।


बाल कृष्ण ने किसानों से कहा कि वह भगवान इंद्र को चढ़ावा चढ़ाना बंद करें और अपनी आय से अपने परिवार का भरण पोषण करें. जब इंद्र ने पाया कि किसानों ने चढ़ावा चढ़ाना बंद कर दिया है तो वह नाराज हो गए और वृंदावन वासियों पर अपना कहर बरसाने लगे. कई दिनों तक बारिश होती रही. सभी वृंदावन वासी जीवन खोने के भय से कृष्ण के पास पहुंचे और उनसे उपाय मांगा।


कृष्ण ने वृंदावन वासियों की सहायता करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी अंगूली पर ही उठा लिया. गांव के सभी लोग उस पर्वत के नीचे आकर खड़े हो गए ताकि बारिश और तुफान से रक्षा हो सके।
कृष्ण 7 दिनों तक अपनी कानी अंगूली यानी सबसे छोटी अंगूली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर रखा. आखिरकार इंद्र ने बारिश और तुफान रोक लिया. इसके बाद वृंदावन की महिलाओं ने श्री कृष्ण के लिए 56 प्रकार के भोजन तैयार किए. ऐसा कहा जाता है कि श्री कृष्ण ने एक दिन में 8 बार भोजन ग्रहण किया था। क्योंकि पिछले सात दिनों के दौरान उन्होंने अन्न का एक दाना भी ग्रहण नहीं किया था।


भगवान गोवर्धन को चढ़ता है छप्पन भोग
इसलिए गोवर्धन पूजा के दिन छप्पन भोग बनाने का प्रचलन है, जिसमें हलवा, लड्डू, मिश्री और पेड़ा जरूर होता है. इसके अलावा मक्खन मिश्री, खीर, रसगुल्ला, जीरा लड्डू, जलेबी, रबरी, मठरी, मालपुवा, मोहन भोग, चटनी, मुरब्बा, साग, दही, चावल, दाल, कढ़ी, घेवर, चिला, पापड़, मूंग दाल का हलवा, पकोड़ा, खिचड़ी आदि भी होती है।