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राम जन्मभूमि की राह पर ज्ञानवापी विवाद! क्या ASI सर्वे दिलाएगा हिंदुओं के पक्ष में फैसला?

वाराणसी(Varanasi) जिला जज के फैसले को मुस्लिम पक्ष ने हाई कोर्ट में चैलेंज किया है, जिसकी आज सुनवाई होगी। इस दौरान ASI रिपोर्ट का रोल क्या होगा? अयोध्या और ज्ञानवापी विवाद में क्या समानताएं हैं? पढ़ें पूरी रिपोर्ट...

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काशी विश्वनाथ मंदिर(Kashi Vishwanath Temple)के पास स्थित ज्ञानवापी परिसर में वाराणसी जिला कोर्ट ने हिंदू पक्ष को पूजा करने की अनुमति दे दी है। अब इस फैसले को चैलेंज करते हुए मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट का सहारा लिया है, जिसकी सुनवाई आज होगी। ऐसे में जनता के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच एक सवाल यह भी है कि क्या ASI सर्वे की वजह से कोर्ट का फैसला हिंदुओं के पक्ष में आएगा? आइए जानते हैं इसके जवाब…

ASI रिपोर्ट लाएगा हिंदुओं के पक्ष में फैसला!
करीब 500 सालों से चल रहे अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद पर जब मुहर लगी तो ज्ञानवापी मामला उजाले में आया। एक तरफ अयोध्या में 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा हुई तो दूसरी तरफ ज्ञानवापी मामले में ASI की सर्वे रिपोर्ट सामने आई। करीब 30 साल बाद ज्ञानवापी परिसर में हिंदू पक्ष ने पूजा-पाठ किया। ऐसे में यह मामला हाई कोर्ट पहुंचा है तो दोनों ही पक्ष फैसला जानने के लिए आतुर है। इस वक्त बड़ा सवाल यह है कि क्या कोर्ट के फैसले ASI सर्वे का कितना रोल होगा। आपको बता दें कि राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले का आधार ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) के सर्वे को ही माना था।

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद पर लिया ASI का सहारा
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ ने अयोध्या विवाद पर 9 नवंबर 2019 को दिए अपने ऐतिहासिक फैसले में ASI की 2003 में दी गई रिपोर्ट का सहारा लिया था। इस रिपोर्ट में यह बताया गया था कि मस्जिद को खाली जगह पर नहीं बनाया गया था। इसके साथ ही, खुदाई टीम इस जगह से कई मूर्तियां मिलीं, जो यहां एक मंदिर होने का सबूत देती हैं।

यह भी पढ़ें: अयोध्या-काशी के बाद अब मथुरा की बारी, ASI ने दिए ये अहम सबूत

अयोध्या विवाद और ज्ञानवापी विवाद में सामानताएं
1. 22 दिसंबर 1949 को अयोध्या में बाबरी परिसर के भीतर रामलला की मूर्ति दिखी। वहीं, ज्ञानवापी परिसर में 16 मई 2022 को हिंदू पक्ष ने परिसर में शिवलिंग होने का दावा किया।

2. अयोध्या विवाद में हुए ASI की रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि विवादित परिसर(ज्ञानवापी मस्जिद) पहले से मौजूद 12वीं सदी की एक संरचना पर बेस्ड हैं। वहीं, ज्ञानवापी परिसर में हुए ASI की रिपोर्ट में व्यास जी के तहखाने में कई हिंदू भगवानों की मूर्तियां मिल गई हैं।

3. हिंदू पक्ष ने यह दावा किया कि राम मंदिर को तोड़कर बाबर के कार्यकाल के दौरान मीर बांकी ने बाबरी मस्जिद बनवाया था। वहीं, ज्ञानवापी को लेकर यह दावा किया गया है कि काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर औरंगजेब ने मस्जिद बनवाई थी।

7 फरवरी को हाई कोर्ट में ज्ञानवापी परिसर के विवाद को लेकर सुनवाई हुई, अब अगली सुनवाई 12 फरवरी को होगी। अब देखना ये है कि कोर्ट इस मामले में क्या फैसला लेता है।

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