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Gyanvapi Case: हिंदू पक्ष बांट रहा मिठाई, मुस्लिम पक्ष के पास अब बचा ये विकल्प, ‘जरूरत पड़ी तो खुदाई भी होगी’

Gyanvapi Case: ज्ञानवापी सर्वे पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले से मुस्लिम पक्ष को बड़ा झटका लगा है। हिंदू पक्ष ने इसे बड़ी जीत बताया है मगर मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का फैसला किया है। ऐसे में क्या होगा? जानिए इस रूख से ज्ञानवापी के सर्वे पर क्या असर होगा?

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Gyanvapi Case: इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले से साफ हो गया है कि ज्ञानवापी में एएसआई का सर्वे जारी रहेगा। हाईकोर्ट ने वाराणसी की जिला अदालत के फैसले को बरकरार रखा और मुस्लिम पक्ष की ओर से दायर सर्वे पर रोक लगाने की अर्जी खारिज कर दी । एएसआई ने कोर्ट को बताया कि सर्वे के दौरान खुदाई की जरूरत हुई तो पहले अदालत से अनुमति ली जाएगी। इस दौरान ज्ञानवापी के किसी स्ट्रक्चर को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।

सर्वे में अभी तक क्या मिला ?
मई 2022 में पहली बार कोर्ट के आदेश पर ज्ञानवापी का सर्वे हुआ था। कोर्ट की ओर से तैनात एडवोकेट कमिश्नर के सर्वे में मस्जिद के वजूखाने में कथित शिवलिंग होने का दावा किया गया। इसके बाद फिर जिला अदालत के आदेश के बाद 24 जुलाई को एएसआई की टीम ने सर्वे शुरु किया था। 30 जुलाई को एएसआई की तीस सदस्यीय टीम ने सुबह सात बजे से 11:50 बजे तक पड़ताल की थी। तब दावा किया गया कि शुरुआती जांच में ज्ञानवापी मंदिर की दीवारों पर कमल के फूल,स्वास्तिक, डमरू, त्रिशूल और देवी-देवताओं के उकेरे गए चित्र मिले। सर्वे के खिलाफ 24 जुलाई को मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई थी। उसी दिन सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानवापी में सर्वे पर रोक लगा दी। 25 जुलाई को मुस्लिम पक्ष ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। 27 जुलाई को सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

अब कब तक चलेगा सर्वे?
हाई कोर्ट के आदेश के बाद 3 अगस्त से ही दोबारा सर्वे शुरू हो सकता है। वाराणसी के डीएम ने बताया कि तत्काल दोबारा सर्वे शुरू करना आसान नहीं है, इसके लिए प्रशासन और एएसआई को तैयारी करनी होती है। मुस्लिम पक्ष ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले से असहमति जताई है। मसाजिद अंजुमन इंतजामिया कमेटी ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का ऐलान किया है। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि कोर्ट ने उनकी कई दलीलों को खारिज दिया है। सर्वे कब तक चलेगा?,यह सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पर निर्भर करेगा। जिला अदालत ने अपने फैसले में सर्वे के लिए कोई डेडलाइन तय नहीं की है।


अब पुरातत्व विभाग कैसे जांच करेगा ?
हिंदू पक्ष के वकील ने कोर्ट में एएसआई की ओर से दी गई दलील के आधार पर बताया कि सर्वे के दौरान खुदाई नहीं होगी। जांच के लिए ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (जीपीआर) का इस्तेमाल हो सकता है। जीपीआर टेस्टिंग टेक्नीक में रेडियो वेव की हाई फ्रीक्वेंसी के जरिये मेटल की जांच की जाती है। इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव से मिले डेटा से पता चल जाता है कि जमीन या दीवार के भीतर क्या है? इसके अलावा कार्बन डेटिंग पद्धति से भी वहां मौजूद साक्ष्यों की जांच की जाएगी। किसी भी तरह की खुदाई से पहले पुरातत्व विभाग को कोर्ट से अनुमति लेनी होगी।


योगी आदित्यनाथ भी बता चुके हैं ज्ञानवापी को मंदिर
हाल ही में योगी आदित्यनाथ ने ज्ञानवापी को मस्जिद कहने पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि अगर ज्ञानवापी के साथ मस्जिद को जोड़ते रहेंगे तो समस्या का समाधान नहीं होगा। ज्ञानवापी में मिले त्रिशूल और डमरू की आकृति के हवाले से उन्होंने कहा था कि दीवारें चीख-चीखकर सच बता रही हैं। सीएम योगी ने मुस्लिम समुदाय को बड़ा दिल दिखाकर ऐतिहासिक गलती को सुधारने की सलाह दी थी।

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