
हरियाली तीज
वाराणसी. हरियाली तीज पति के सलामती का व्रत होता है। यह श्रावण मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरियाली तीज पर्व के रूप में मनाया जाता है। इसे हरियाली तीज या श्रावणी तीज कहते हैं। इस बार हरियाली तीज 13 अगस्त को मनाई जाएगी। यह व्रत भगवान शिव और देवी पार्वती को समर्पित होता है। रक्षाबंधन 2017: राखी बांधने का सही मुहूर्त एवं समय पंचांग के अनुसार हरियाली तीज श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। इसे श्रावणी तीज, सिंजारा तीज या छोटी तीज के नाम से भी जाना जाता है। माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव और पार्वती का पुनर्मिलन हुआ था। इस दिन निर्जला उपवास और शिव पार्वती की पूजा का विधान है। महिलाएं इस दिन मां पार्वती और भगवान शंकर की पूजा करती हैं और अपने पति के लंबी आयु की कामना करती हैं।
हरियाली तीज का मुहूर्त
साल 2018 में हरियाली तीज 13th अगस्त 2018, सोमवार के दिन मनाई जाएगी। सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीय तिथि यानी कि 13 अगस्त 2018, सोमवार सुबह 08:36 से इसका मुहूर्त शुरू होगा। इसका समापन 14 अगस्त 2018, मंगलवार को सुबह 05:45 पर हो जाएगा।
व्रत की विधि
इस व्रत को निर्जला किए जाने का विधान है। इस दिन सुहागिनें विशेष रूप से हरी साड़ी और चूडि़यां पहनती हैं। इस दिन स्नान कर, सज-धज कर, प्रसन्न मन से व्रत का प्रारंभ करना चाहिए। पूरे दिन मन ही मन भगवान शिव और पार्वती का स्मरण करें और उनसे उन्हीं की तरह अटल सौभाग्य का आशीर्वाद मांगें। हरियाली तीज पर झूला झूलने का विशेष महत्व है। यह झूला भी अगर दो सखियां मिलकर, जोड़े में झूलें और झूलने के साथ शिव-पार्वती के गीत गाएं, तो इससे शिवजी शीघ्र प्रसन्न होकर मनोकामना पूरी करते हैं। इस व्रत में सुहागिनों के मायके से सिंजारा आने का भी चलन है। सिंजारा उपहार स्वरूप भेजी जाने वाली डलिया या छोटी टोकनी होती है, जिसमें घर की बनी मिठाई, चूडि़यां, मेहंदी, घेवर आदि होते हैं। सिंजारा भेजे जाने की प्रथा के कारण ही इसे सिंजारा तीज कहा जाता है। छोटी तीज पर सुहागिनों का मेहंदी लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। उत्तर प्रदेश में मेहंदी के स्थान पर आलता या महावर लगाए जाने का चलन है। दोनों ही वस्तुएं सुहागिनों के लिए समान रूप से शुभकारी हैं। राजस्थान में इस दिन राजपूत लाल कपड़े पहनते हैं और माता पार्वती की सवारी निकालते हैं। कई स्थानों पर इस दिन मल्लयुद्ध का भी चलन है।
व्रत की कथा
हरियाली तीज के व्रत की कथा स्वयं शिवजी ने पार्वती को उनका पिछला जन्म याद दिलाने के लिए सुनाई थी। कथा के अनुसार शिव जी ने पार्वती से कहा कि हे पार्वती! वर्षों पहले मुझे पति रूप में पाने के लिए तुमने हिमालय पर्वत पर घोर तप किया था। मौसम के विपरीत होने के बावजूद तुम अपने व्रत से डिगीं नहीं और सूखे पत्ते खाकर तुमने अपने व्रत को निंरतर रखा।
Published on:
26 Jul 2018 03:10 pm
बड़ी खबरें
View Allवाराणसी
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
