
हरतालिका तीज
वाराणसी. पति की लम्बी उम्र के लिए महिलाएं हरतालिका तीज का व्रत करती हैं। यह भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को किया जाता है। भाद्रपद की शुक्ल तृतीया को हस्त नक्षत्र में भगवान शिव और माता पार्वती के पूजन का विशेष महत्व है। इस व्रत को करने से अखण्ड सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है वहीं कुंवारी लड़कियां भी मनचाहे पति के लिए करती हैं। क्योंकि मान्यता है कि मां पार्वती ने इस व्रत को करके ही शिवजी को पाया था।
हरतालिका तीज व्रत कैसे करें
इस दिन शादीशुदा महिलाएं नए लाल वस्त्र पहनकर,मेहंदी लगाकर, सोलह श्रृंगार करती है और शुभ मुहूर्त में भगवान शिव और मां पार्वती जी की पूजा की जाती है। इस पूजा में शिव-पार्वती की मूर्तियों का विधि विधान से पूजा किया जाता है। फिर हरतालिका तीज की कथा को सुना जाता है। माता-पार्वती पर सुहाग का सारा सामान चढ़ाया जाता है। भक्तों में मान्यता है कि जो सभी पापों को हरने वाला हरतालिका व्रत को विधि-विधान से किया जाता है। उसके सौभाग्य की रक्षा स्वयं भगवान शिव करते हैं।
ये है हरतालिका तीज व्रत का शुभ मुहूर्त
प्रात:काल हरतालिका तीज- सुबह 05:45 से सुबह 08:18 बजे तक
प्रदोषकाल हरतालिका तीज- शाम 6:30 बजे से रात 08:27 बजे तक
पूजा का वक्त- 1 घंटा 56 मिनट
पूजा से पहले जुटा लें ये पूजन सामग्री
हरतालिका तीज की पूजन सामग्री
हरतालिका तीज व्रत की पूजा से पहले इन पूरे पूजन सामग्री को जरुर रख लें।
- गीली काली मिट्टी या बालू रेत।
- बेलपत्र, शमी पत्र, केले का पत्ता, धतूरे का फल एवं फूल, अकांव का फूल, तुलसी, मंजरी, जनैव, नाडा, वस्त्र, सभी प्रकार के फल एवं फूल पत्ते, फुलहरा (प्राकृतिक फूलों से सजा )।
पार्वती मां के लिए सुहाग सामग्री
- मेहंदी, चूड़ी, बिछिया, काजल, बिंदी, कुमकुम, सिंदूर, कंघी, माहौर, बाजार में उपलब्ध सुहाग पुड़ा आदि।
- श्रीफल, कलश, अबीर, चन्दन, घी-तेल, कपूर, कुमकुम, दीपक, घी, दही, शक्कर, दूध, शहद पंचामृत के लिए।
Published on:
12 Aug 2018 12:31 pm
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