
BJP Bahubali MLA Sushil Singh
वाराणसी. बीजेपी के बाहुबली विधायक पर संकट आ सकता है। हाईकोर्ट ने बीजेपी के बाहुबली विधायक के आपराधिक इतिहास के बारे में मुख्य सचिव को व्यक्तिगत शपथ दाखिल करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह व न्यायमूर्ति रमेश सिंह की खंडपीठ ने बीजेपी के बाहुबली विधायक पर दर्ज मुकदमों की मौजूदा स्थिति का ब्यौरा भी देने को कहा है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद कई पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया है। पुलिस अब विधायक के खिलाफ दर्ज मुकदमों का विवरण जुटाने में जुट गयी है।
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माफिया से माननीय बने बृजेश सिंह के भतीजे व सैयदराजा से बीजेपी विधायक सुशील सिंह पर संकट के बादल छा सकते हैं। बृजेश सिंह के खास रहे रामबिहारी चौबे हत्याकांड को लेकर भी सुशील सिंह की मुसीबत बढ़ सकती है। हाईकोर्ट ने तीन साल पहले रामबिहारी चौबे हत्याकांड की सुनवाई पूरी नहीं होने का भी कारण पूछा है। माफिया से माननीय बने बृजेश सिंह के सबसे खास लोगों में रामबिहारी चौबे ही गिनती होती थी। चार दिसम्बर 2015 को चौबेपुर थाना क्षेत्र के श्रीकंठपुर स्थित रामबिहारी चौबे के आवास पर कुछ बदमाश पहुंचे थे। बदमाशों ने पहले रामबिहारी चौबे को बुलाया था और जब वह घर से बाहर आये थे तो बदमाशों ने पहले उनका पैर छुआ था और फिर अंधाधुंध गोली चला कर रामबिहारी चौबे की हत्या कर दी थी। सपा के तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव के राज में हुए इस हत्याकांड को लेकर जमकर राजनीति भी हुई थी। रामबिहारी चौबे के बेटे अमरनाथ चौबे ने इस हत्याकांड की सीबीआइ जांच की मांग की थी। मामला बृजेश सिंह के परिवार से जुड़ा होने के चलते पुलिस ने बदमाशों को पकडऩे में अधिक सक्रियता नहीं दिखायी थी। बनारस के तत्कालीन एसएसपी नितिन तिवारी ने इस मामले में सबसे बड़ी कार्रवाई करायी थी। छह अप्रैल 2017 को चौबेपुर पुलिस ने एमएलसी बृजेश सिंह के खास रहे अजय मरदह, आशुतोष सिंह व नागेन्द्र सिंह को रामबिहारी चौबे ही हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। तीनों की गिरफ्तारी की सूचना मिलते ही बीजेपी विधायक सुशील सिंह खुद मौके पर पहुंच गये थे और गिरफ्तारी का विरोध किया था।
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सीएम योगी सरकार में गिरफ्तारी को लेकर जमकर हुई थी राजनीति
बाहुबली मुख्तार अंसारी के आरोपों की माने तो राजनाथ सिंह व बृजेश सिंह परिवार के बीच अच्छे संबंध है। सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार में जब बृजेश सिंह के खास लोगों की रामबिहारी चौबे हत्याकांड में गिरफ्तारी हुई तो जमकर राजनीति हुई थी। खुद बीजेपी विधायक सुशील सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस करके एसटीएफ के एक दरोगा पर फर्जी ढंग से उनके लोगों को फंसाने का आरोप लगाया था। तत्कालीन एसएसपी नितिन तिवारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पकड़े गये लोगों की पहचान के लिए वादी से शिनाख्त परेड भी करा दी थी। इसके बाद पुलिस ने गिरफ्तार किये गये लोगों के बयान के आधार पर रामबिहारी चौबे ही हत्या का षडयंत्र रचने के आरोप में विधायक सुशील सिंह का भी नाम मुकदमे से जोड़ दिया था। राम बिहारी चौबे के बेटे अमरनाथ चौबे ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है जिसमे पुसिल पर उनके पति की हत्या की सही ढंग से जांच नहीं कराने की बात कही है साथ ही इस मामले की सीबीआइ जांच कराने का अनुरोध किया है इस पर ही सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अपना निर्देश जारी किया है। सात मई को जब मुख्य सचिव बाहुबली विधायक से जुड़े मुकदमों को लेकर व्यक्तिगत शपथ पत्र कोर्ट में दाखिल करेंगे तो कोर्ट उस पर सुनवाई करेगा।
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Published on:
04 May 2018 01:18 pm
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