
मां गंगा में बिखरी गंदगी
वाराणसी. मां गंगा सहित देश की अन्य नदियों को स्वच्छ करने का नया सलीका खोजा गया है। इस नई तकनीक पर इन दिनों बनारस के आईआईटी बीएचयू में फ्रांस के सहयोग से चल रहा है काम। आईआईटी गुवाहाटी का भी है सहयोग। इस अति महत्वपूर्ण शोध पर दो साल से काम चल रहा है। उम्मीद है कि अप्रैल में नई तकनीक के इस्तेमाल की शुरूआत हो जाएगी।
गंगा और गोदावरी जल के नमूनों पर शोध कर जुटाए गए आंकड़े
बताया जा रहा है कि इंडो-यूरोपिय यूनियन के प्रोजेक्ट स्प्रिंग के तहत आईआईटी बीएचयू ने काशी में मां गंगा और आईआईटी गुवाहाटी ने गोदावरी नदी जल पर प्रयोग कर आंकड़े जुटा लिए हैं। अब निर्मलीकरण की दिशा में काम चल रहा है। बताया जा रहा है कि मां गंगा व देश की अन्य नदियों को प्रदूषण मुक्त करने के लिए बायोटेक फिल्टर लगाए जाएंगे। ये बायोटेक फिल्टर फ्रांस के वैज्ञानिकों ने दो साल के अथक परिश्रम के बात तैयार किया है। यह बायोटेक फिल्टर किफायती भी होगा। कहा जा रहा है कि इस दिशा में चल रहे शोध कार्य का प्रथम चरण पूर्ण हो चुका है। कोरोना और लॉकडाउन न होता तो दूसरे चरण का काम भी अब तक पूर्ण हो चुका होता।
फ्रांस में भारतीय परिवेश के मुताबिक तैयार हो रहा फिल्टर
अब तक के इस सबसे उत्तम माने जा रहे शोध के बारे में बताया जा रहा है कि इसके पहले चरण में मां गंगा और गोदावरी नदी के जल के नमूने एकत्र किए गए। गंगा नदी पर आईआईटी बीएचयू के वैज्ञानिक काम कर रहे हैं। इन वैज्ञानिकों का कहना है कि इंडियन रिमोट सेंसिंग सेटेलाइट के सहयोग से गंगा में मिलने वाले गंदे पानी के ज्ञात अज्ञात स्त्रोतों को तलाश कर उनमें मौजूद भौतिक, रासायनिक और जैविक तीनों तरह के प्रदूषकों का सूक्ष्म अध्ययन किया गया। इस अध्ययन से प्राप्त समस्त आंकड़ो (डाटा) फ्रांस के वैज्ञानिकों के पास भेजा गया। आईआईटी बीएचयू के वैज्ञानिक अध्ययन के आंकड़ो पर अध्ययन के बाद फ्रांस के वैज्ञानिक भारतीय परिवेश के अनुकूल बायो फिल्टर तैयार करने में जुटे हैं। बताया तो यहां तक जा रहा है कि फ्रांस के वैज्ञानिकों ने भारतीय परिवेश के मुताबिक बायोटेक फिल्टर तैयार भी कर लिया है। अब इसे गंगा व असि नदी तथा गंगा व वरुणा संगम पर इंस्टाल किया जाना शेष है।
अप्रैल में इंस्टाल हो सकता है बायोटेक फिल्टर
बताया जा रहा है कि फ्रांस के वैज्ञानिकों की टीम अप्रैल में बनारस आएगा और गंगा नदी के भौतिक परीक्षण के बाद बायोटेक फिल्टर इंस्टाल किया जाएगा। वाराणसी में गंगा-असि और गंगा-वरुणा संगम पर बायोटेक फिल्टर इंस्टाल करने के बाद टीम गुवाहाटी जाएगी वहां गोदावरी नदी में बायोटेक फिल्टर इंस्टाल करेगी।
इन वैज्ञानिकों ने किया है काम
इस अति महत्वपूण शोध कार्य में आईआईटी बीएचयू के प्रो पीके सिंह, डॉ शिशिर गौर, डॉ अनुरण ओहरी, आईआईटी गुवाहाटी के प्रो संयुक्ता पात्रा का महत्वपूर्ण योगदान है। इनके अलावा आईआईटी खडगपुर, पाटिल स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग पुणे सहित यूरोपियन प्रौद्योगिकी संस्थान के वैज्ञानिकों ने भी सहयोग किया है।
Published on:
28 Feb 2022 12:12 pm
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